किरायेदार की सेक्सी बेटी
Hot tenantsex story – मेरा नाम राम चौधरी है, मैं उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर स्संभाल का रहने वाला हू. मेरी उमर 20 साल है और जो कहानी मैं आपके सामने ला रहा हू वो मेरी ज़िंदगी की सॅकी घतना है. मैं ज़्यादातर अपने शहर से बाहर हे रहता हू, अपने घर थोड़े दिन हे रह पता हू.
एक बार जब मैं घर पर आया हुआ था तब मैने देखा की हमारे घर पर एक किरायेदार रहने के लिए आए हुए है और उनकी एक लड़की भी है जो की बहुत सुंदर है, उसका शेरर गढ़ा हुआ है, उसकी आँखे नीली थी. वो हमेशा अपने बालो को स्वराती रहती थी और यह सब करते हुए वो मुझे और भी अछी लगती थी. उसके पास एक सुंदर क्या थी और मेरे पास उसे पाने की असीम एक्चा.
उसका नाम गीता था. वो मुझे बहुत आकर्षित कराती और मैं उसे पाने का हर वक़्त खवाब देखता था इसलिए यूयेसेस-से बात करने का कोई ना कोई बहाना डुनधता रहता था. कुछ दीनो मैं शायद उसे भी पता चल गया की मैं उसे चाहता हू और शायद वो भी दिल हे दिल मैं मुझे चाहने लगी पर शायद मुझसे कहने मैं हिचकिचाती थी.
जब मुझे इस बात का पता चला तो मैं उसे अपने दिल की बात बतने के लिए सही वक़्त का इंतेज़्ज़र करने लगा.
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तभी कुछ दीनो बाद मेरे घर वालो ने मेरी नानी के घर जाने का प्लान बनाया तो मैने जाने से इनकार कर दिया. तब मेरे अलावा घर के सभी सदस्यो ने जाने का प्लान बना लिया और मुझे घर रहने के लिए कहा गया. मैं मॅन हे मॅन बहुत खुश था की आब मैं घर पर अकेला रहूँगा . जब दो दिन बाद घर वाले चले गये तो गीता की मा ने हे मेरे लिए खाना बना लिया और गीता मुझे खाना पहुचने के लिए मेरे कमरे मैं आई. वो शायद जानबूझ कर खुद हे मुझे खाना देने आई थी. जब वो कमरे मैं आई तो मैने उसका हाथ पकड़ लिया.
इसस्स-से वो घबराकर थोड़ा सिमट से गयी और अपना हाथ छुड़ाने का असफल प्रयास करने लगी. मैने उसे अपने पास बैठाया और बिना वक़्त गवाए उसे अपने दिल की सारी बात बता दी. इस पर वो थोड़ा शरमाई और हंसकर कमरे से भाग गयी. मैं उसके इस इशारे को समझ गया था और इसके लिए मुझे कुछ भी पूछने की जारोरात नही थी.
फिर जब वो दोबारा बर्तन लेने मेरे कमरे मैं आई तो मैं उसकी बाहो को पकड़ा और अपनी बाहो मैं जाकड़ लिया और उसके होतो को लगभग 15 मिनिट तक चूमता रहा. जिस-से वो गरम तो हो गयी थी पर उसे अपनी मा का ख़तरा भी था, तब वो थोड़ा डार्कर बोली- मैं बाद मैं आयूंगी, अभी मेरी मम्मी मेरा इंतेज़्ज़र कर रही है.
यह कहा कर वो चली गयी.
मई यही सोचता रहा की वो आएगी या नही.
इसके बाद मैं उसका काफ़ी देर तक इंतेज़ार कराता रहा. अचानक मेरे कमरे के किवाड़ खुलने की आवाज़ आई, मैं समझ गया की वो हे है. कमरे मैं थोड़ा अंधेरा था जिस-से वो मुझे सॉफ नज़र नही आ रही थी मगर मुझे पता था की वो हे आई है. मैं तुरंत उठा , अंधेरे मैं अंदाज़ा लगता हुआ उसका हाथ पकड़ा और उसे गले लगा लिया और अंधेरे मैं हे उसे चूमता रहा.
मई उसे बहुत पसंद कराता था शायद इसलिए मेरा उसे छोड़ने को मॅन नही हो रहा था. उसे चूमते हुए हे मैं अंदर ले आया क्यूंकी मैं कोई भी पल खराब नही करना चाहता था. फिर एस हे उसे अपने बिस्तेर पर लेटते हुए मैं उसके पूरे जिस्म का मुआएना कर रहा था.
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उसका जिस्म तराशा हुआ था और मैं इस जिस्म की एक-एक बूँद को निचोड़ लेना चाहता था. मैं मॅन हे मन सोच रहा था की इतने दिन से मैं जो सपना देख रहा था वो आज पूरा हो जाएगा. उसके बाद मैने धीरे धुरे उसके सारे कपड़े जिस्म से अलग किए. वाह… क्या मस्त नज़ारा था.और समय का उपयोग करते हुए मैने उसके उरज़ो को चूसने शुरू किया जिस-से यूयेसेस पर नशा सा होने लगा और वो अपने पूरे जोश मैं आने लगी.
मई भी उसके उरज़ो को जोश मैं आकर इतने ज़ोर से दबा रहा था की वो दर्द से करहाने लगी. मगर मस्ती यूयेसेस पर इस कदर सॉवॅर थी की वो इसका कोई विरोध नही कर रही थी. हम दोनो एक साथ मस्ती के सागर मैं गोते लगा रहे थे.
मैने फिर उसके उरज़ो को हाथ मैं पकड़ा और धीरे धीरे नीचे की और बढ़ने लगा और उसके पाते को चूमने लगा जिस-से वो अपने शेरर इधर उधर हिलने लगी और वो अपने मूह से मस्ती भारी सिसकारी मरने लगी आहह… उउउंम्म… उउफ्फ.. और अपने हाथ से मेरे बालो को सहलाने लगी.उसकी मस्त आवाज़े मुझ मैं और जोश भर रही थी.
मई उसके पाते को जी भर कर चूमने लगा और कही कही पर हल्के से अपने दाँत गाड़ा देता जब यूयेसेस-से बर्दाश्त नही हुआ. तो एक झटके के साथ उठी और मुझे अपनी बाहो मैं भर लिया और कहने लगी- राम मुझे इतना प्यार मत करो की अपने आप को संभाल ना सकुन… मैने यह सब करके अपने अंदर एक आग पैदा कर दे है जिस-से मेरा पूरा शेरर जला जा रहा है… तुम प्लीज़ इस आग को शांत कर दो, प्लीज़… नही तो मैं कही आज मॅर ना जायू!
यह कह कर वो दुबारा मेरे गले लगी और मुझे पागलो की तरह चूमने लगी. वो धीरे धीरे मेरे भी सारे कपड़े मेरे बदन से अलग करने लगी. इस-से मेरा लंड मेरी पेंट फाड़कर बाहर आने को तैयार था. उसे बस आब गीता की यौनी को चखना था.
तभी गीता ने मेरी पेंट उतरी और मेरा लंड उसके सामने सलामी देने लगा, लेकिन वो थी की मेरे लंड को छोड़कर मेरी टॅंगो को चूम रही थी. मेरा लंड उसके चेहरे पर बार बार लग रहा था. जब मुझसे रहा ना गया तो मैने उसके मूह को पकड़ा और अपना लंड उसके मूह मैं डाल दिया ऑरा एज पिच करने लगा. कुछ देर मैं वो भी मेरा साथ देने लगी.
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वो नयी थी इसलिए जल्दी तक कर मेरा लंड मूह से बाहर निकाला और बस कहने लगी. मैने भी मौके की नज़ाकत को समझते हुए उसे लिटाकर उसकी यौनी पर अपना मूह रख दिया.
उसकी यौनी काफ़ी गीली हो चुकी थी मगर उसकी यौनी की स्मेल ने मुझे मदहोश कर दिया जिस-से मैं उसकी यौनी को पागलो की तरह चातने लगा. मैं अपनी जीभ उसकी यौनी के अंदर डालने लगा तो वो भी मदमस्त हो गयी और अपने कूल्हे उठा-उठा कर मेरे पूरा साथ देने लगी और कुछ देर बाद वो अपने आप को जकड़ते हुए मेरे मूह मैं हे सखालित हो गयी जिस-से इसकी यौनी आब पूरी तरह गीली हो चुकी थी. फिर मैं भी हटकर उसके होतो को चूमने लगा.
उसने मुझे बताया की यह सब उसके साथ पहली बार हो रहा है और मुझे कसम देने लगी की मैं उसे आब कभी नही छोड़ूँगा. मैने भी उसे विश्वास दिलाया और उसे अपने गले से लगा लिया.
आब मुझे पता था की वो एक कुँवारी है और मैं आब कोई जल्दबाज़ी नही कर सकता. मैं उसे आब कभी नही चोदूगा इसलिए मैने उसे चिट लेटया और उसकी यौनी मैं धीरे धीरे अपने हाथ की छोटी उंगली डालने लगा. वो हल्के हल्के कराह रही थी मगर मैं उसे नज़रअंदाज़ करते हुए अपनी उंगली उसकी यौनी मैं धकेलटा रहा . आब लगभग मेरी पूरी उंगली उसकी यौनी मैं समा चुकी थी और आब वो भी शांत थी तो मैने इससे हे सही मौका समझकर अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उसकी यौनी पर रखकर यूयेसेस-से पूछा – क्या कोई दर्द तो नही हो रहा?
उसने ना मैं अपनी गर्दन हिलाई तब मैं अपना लंड धीरे धीरे उसकी यौनी पर रगड़ने लगा. मैं कोई भी ग़लती नही करना चाहता था. इसलिए बिना ज़ल्दबाज़ी किए आराम से कर रहा था.
फिर हल्के से मैं अपना लंड उसकी कुँवारी यौनी मैं डालने लगा. जैसै हे मैने अपना लंड थोड़ा अंदर करने की कोशिश की वो ज़ोर से कराह उठी. मैने उसे समझाया की थोड़ा बर्दाश्त करे, क्यूंकी उसका पहली बार है तो थोड़ा दर्द तो होगा, वो भी थोड़ी शांत हुई तो मैने दुबारा अपना लंड उसकी यौनी मैं डाला, थोड़ा ज़ोर लगा कर मैने अपना लंड उसकी चुत मैं धकेल दिया. इस-से उसे दर्द तो हुआ पर वो शांत हे रही. मैने उसे उसकी सहमति समझकर एक और हल्के से झटका लगाया.ताकि मेरा लंड थोड़ा अंदर चला जाए.
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आब मेरा लंड उसकी यौनी मैं लगभग 2 इंच तक चला गया. उसे भी हल्का सा दर्द था मगर वो उसे सहन कर सकती थी शायद इसलिए वो अभी तक शांत थी या कोशिश कर रही थी अपने आप को शांत रखने की. उसे शांत पाकर मैं एक ज़ोर का झटका लगाया और मेरा लगभग 3 इंच लंड अंदर चला गया. मगर वो इस बार बर्दाश्त नही कर सकी और ना चाहते हुए इस बार उसके मूह से हल्की से चीख निकल गयी और वो अपनी चीख को दबाते हुए झटपटाने लगी.
तो मैं थोड़ा रुक गया और यूयेसेस-से बोला- मुबारक हो, तुम आब कुँवारी नही रही.
यह कहकर मैने एक और ज़ोरदार झटका मारा और इस बार मेरा लगभग 5 इंच लंड उसकी यौनी मैं समा गया. वो झटपटा रही थी और चुतने का असंभव प्रयास कर रही थी. मैने पहले अपने आप को संभाला और गीता पर अपनी पकड़ और मजबूत की और एक और ज़ोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड उसकी यौनी मैं डाल दिया.
वो आब बहुत ज़यादा झटपटा रही थी इसलिए मैं थोड़ी देर तक रुका रहा और उसके होतो पर अपने होठ रखकर पागलो की तरह चूमने लगा और साथ साथ उसका शेरर अपने हाथो से सहलने लगा. जब वो थोड़ा शांत हुई तो मैने भी धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.
थोड़ी हे देर मैं देखते देखते वो अपने दर्द को भूल कर पूरे सुरूर मैं आ गयी और अपने कूल्हे उपर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी. जब मैने उसे इस हालत मैं देखा तो मेरे जोश की कोई सीमा नही रही, वो इतनी मादकता के साथ संभोग के उन्न पॅलो का आनंद ले रही थी की यूयेसेस आनंद को शब्दो मैं ब्टाया नही जा सकता है. मैं तो उसे देखकर हे इतना रोमांचित हो रहा था की मैने अपने धक्को की गति इतनी बढ़ा दे की खुद हे हफने लगा.
मगर वो आब मंज़िल के करीब पहुच चुकी थी तो मेरा भी रुकने का कोई सवाल नही था, मैं अपनी पूरी ताक़त से उसे चोद रहा था. जब वो अपने चरम पर पहोची तो उसने अपनी टॅंगो से बुरी तरह ज़कड़ लिया और धीरे धीरे सखलित हो गयी.
तब मैने भी थोड़ी से रहट की साँस ली और हफ्ते हुए उसके उपर गिर गया और उसे अपनी बाहो मैं भर कर चूमने लगा. मगर मैने अपना लंड बाहर नही निकाला और एस हे उसके उपर पड़ा रहा.
थोड़ी साँस आने के बाद मैने उसे घोड़ी बन-ने के लिए कहा और वो भी बिना कुछ कहे घोड़ी बन गयी और मैं उसे फिर से छोड़ने लगा. वो भी थोड़ी देर मैं फिर से जोश मैं आने लगी और फिर से मेरा साथ देने लगी. इस बार मैने उसे कई स्तईलो से चोदा . धीरे धीरे मैने अपने धक्को की गति को बढ़ाना शुरू किया और थोड़ी देर बाद मैं भी स्खलित हो गया.
तभी मेरे साथ गीता भी चरम पर पहुच गयी. वो मुझसे पहले सखालित हुई मगर फिर भी वो लगातार मेरा साथ दे रही थी. थोड़ी देर बाद मैं भी झाड़ गया और उसके उपर गिर गया और उसे बेठहाशा चूमने लगा.
इसके बाद यूयेसेस रात हमने 3 बार और सेक्स किया. और सूबह तक साथ रहे. बाद मैं जब सवेरा हो गया तो वो मुझे थोड़ी देर चूमकर मेरे कमरे से चली गयी. जब वो कमरे से जा रही थी तो उसके कदम लड़खड़ा रहे थे…. फिर भी वो अपने लड़खड़ते हुए कदमो के साथ बिना रुके मेरे कमरे से चली गयी.
यूयेसेस दिन मैं और वो पूरे दिन सोते रहे वो आब भी मुझसे बहुत प्यार कराती है. मैं जब भी अपने घर जाता हू तो उसके साथ संभोग ज़रूर कराता हू.
