मेरी चुदाई की दास्तान – Part 2
Meri chodai ki kahani – उन का लंड बहुत ही मुलायम , बहुत ही नरम था , बिलकुल किसी बच्चे के लंड की तरह . मैंने धीरे धीरे उन के लंड पर चड्डी के ऊपर से ही हाथ फिराने लगी . जल्दी ही उन का लंड बड़ा होने लगा , फूलने लगा , जैसे गुब्बारे में हवा भर रही हो . मेरे हाथ लगाने से चाचा का लंड बड़ा हो कर खड़ा हो गया और कड़क हो गया था .
चाचा अभी भी नींद में थे और शायद कोई चुदाई वाला सपना देख रहे थे जब मैंने उन के लंड को खड़ा कर दिया था . जल्दी ही उन की आँख खुल गयी , शायद मेरी पकड़ उन के लंड पर होने से .
Part 1 – मेरी चुदाई की दास्तान
मुझे देख कर वो बोले – अरे डार्लिंग ! मैं तुम्हारा ही सपना देख रहा था .
मैं बोली – और मैं सचमुच आप के पास हूँ .
चाचा मेरी तरफ घूम गए . मेरा गाउन मेरे घुटनों के ऊपर था और उन्होंने मेरे पैर से होते हुए अपना हाथ मेरी कमर तक घुमाया . उन को पता चल गया था की मैंने गोवन के नीचे कुछ नहीं पहना है . उन्होंने मेरे गाउन की गाँठ खोल कर उस को मेरे हाथों से बाहर निकाल कर उतार फेंका .
Meri chodai ki kahaniya
अब मैं चाचा के सामने बिलकुल नंगी लेती थी और मेरी अभी अभी बाल साफ़ की हुई चिकनी चूत चाचा के सामने थी . मैंने भी चाचा की चड्डी उतार कर उनके लंड को आज़ाद कर दिया था . मेरे हाथ चाचा के बदन पर घूम रहे थे और चाचा के हाथ मेरे सेक्सी बदन पर फिर रहे थे .
उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और हम दोनों के होंठ आपस में मिल गए .
मेरी मुलायम जीभ को उन्होंने अपने मुह में ले कर चूसा . मैं तो और भी गरम हो चली थी . अपने नंगे बदन को मैं चाचा के नंगे बदन से रगड़ने लगी . चाचा का पूरी तरह तना हुआ , खड़ा हुआ , कड़क , गरम , लम्बा और मोटा लौड़ा किसी लोहे की rod की तरह , मेरे पैरों के बीच में से मेरी गांड को touch कर रहा था .
मैं अपनी दोनों कड़क चूचियां चाचा की बालों भरी छाती पर रगड़ रही थी .
मैं चाचा का लंड अपनी चिकनी चूत में लेने को बेक़रार थी . मैंने अपना हाथ नीचे कर के चाचा के लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया . उन के हाथ मेरे बदन पर घूमते हुए मेरी गोल गोल गांड पर पहुंचे और चाचा ने मेरी गांड को दबाया .
उन की उँगलियाँ कई बार मेरी गांड के बीच की दरार में घूमी तो मैं और भी बेक़रार हो चली . चाचा समझ चुके थे की मैं जल्दी से जल्दी चुदवाना चाहती हूँ . उन्होंने मुझे थोड़ा ऊपर किया और मेरी चूची और निप्पल चूसने लगे . वो कुछ इस तरह से अपनी जीभ मेरी निप्पल पर घुमा रहे थे की मैं तो पागल सी हो गई थी .
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अब हम चुदाई करने की परफेक्ट पोजीसन में थे . मैंने फिर से अपना हाथ नीचे किया और चाचा के तने हुए लंड को पकड़ कर मेरी गीली चूत के दरवाजे पर रखा और अपनी गांड नीचे की . मैं चाचा के ऊपर सोई होने की वजह से सिर्फ उन के लंड का मुह ही मेरी चूत के अन्दर जा पाया .
तब तक चाचा ने अपना चूची चुसाई का काम पूरा कर लिया और अब मैं चाचा के लंड पर बैठ गयी थी .
मेरी चूत तो गीली थी ही , मेरे उन के लंड पर दो तीन बार उठने बैठने की वजह से चाचा का पूरे का पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर चला गया . मजेदार चुदाई के लिए मैंने अपने दोनों हाथ पीछे कर के चाचा की जाँघों पर रख लिए ताकि उनका लम्बा लंड आराम से मेरी चूत में आ जा सके .
वो मेरी चूचियां मसल रहे थे और मैं उन के ऊपर , उनका लंड अपनी चूत में ले कर चुदाई के लिए तैयार थी .
चूत और लंड की अन्दर बाहर करके चुदाई करने के पहले मैंने चाचा को surprise दिया . मैंने चाचा के लंड को अपनी चूत में पकड़े हुए अपनी गांड को थोड़ा ऊपर हो कर गोल गोल घुमाया , किसी grinder की तरह . हे भगवान …. मैंने ऐसा पहली बार किया था और मुझे बड़ा मज़ा आया
मैं अपनी गांड गोल गोल घुमाते जा रही थी और उन का लंड मेरी चूत के अन्दर घूम रहा था . आप खुद समझ सकतें है की इस का क्या असर होता है . जब मैं अपनी गांड गोल गोल घुमा रही थी तब चाचा मेरी गांड को नीचे से पकड़ कर दबा रहे थे , मसल रहे थे . वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रहे थे क्यों की उन को भी मज़ा आ रहा था . 10 / 15 बार अपनी गांड घुमाने के बाद अब मैं चुदवाना चाहती थी .
अब मैं अपनी गांड ऊपर नीचे कर रही थी और चाचा का लंड मेरी चूत में अन्दर बाहर होने लगा . चाचा भी पूरा support कर रहे थे अपनी गांड ऊपर नीचे करके . मैं जब अपनी गांड नीचे करती , चाचा अपनी गांड ऊपर करते और उन का लौड़ा मेरी चूत के काफी अन्दर तक पहुँच जाता .
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मैंने धीरे धीरे अपनी गांड ऊपर नीचे करनी शुरू की थी लेकिन मेरी रफ़्तार अपने आप बढती गई . मैं अपनी चूत का धक्का नीचे लगा रही थी और चाचा अपने लंड का धक्का अपनी गांड ऊपर कर के मेरी चूत में लगा रहे थे . मैंने देखा की मेरी दोनों चूचियां हर धक्के के साथ ऊपर नीचे हिल रही थी , नाच रही थी .
अपनी खुद की चुचियों को इस तरह हिलते हुए देख कर मुझे एक बार फिर अपनी माँ की बड़ी बड़ी , नंगी चुचियों की याद आ गयी जो की पापा से चुदवाते समय नाच रही थी . हम दोनों अपनी अपनी गांड ऊपर नीचे करते हुए चुदाई में मगन थे .
मैं तो चाचा से चुदाई शुरू करने के पहले से गरम थी जब मैंने अपनी माँ को अपने पापा से चुदवाते हुए देखा था और मैंने अपनी चूत पर भी अपना हाथ काफी देर तक फिराया था , इसलिए मैं जल्दी ही अपनी मंजिल की तरफ , झड़ने की तरफ बढ़ने लगी थी .
मेरे चाचा जानते थे की मैं बहुत जल्दी झड़ने वाली हूँ . वो नीचे से मुझे जोर जोर से चोदने लगे और मैं भी ऊपर से जोर जोर से चुदवाने लगी . हमारी चुदाई से रूम में चुदाई की आवाजें गूंजने लगी . चाचा का लम्बा , मोटा और कड़क लंड मेरी रसीली चूत में अन्दर बाहर होता हुआ ” फचा फच .. फचा फच ” की आवाज कर रहा था .
मेरा तो ये मानना है की चुदाई का संगीत ही दुनिया का सबसे प्यारा संगीत है . मेरी गांड तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी . मुझे पता था की चाचा के लंड का रस इतनी जल्दी नहीं निकलने वाला है , पर मेरा तो हो गया था . ओह चाचा ….. मेरा हो रहा है …. मैं तो गई …….. और मैं सचमुच गयी .
मैं झड़ गई थी . बहुत ही जोर से झड़ी थी .
मैं अपनी गांड चाचा की जांघों पर टिका कर उन के लंड को अपनी चूत में लिए बैठ गई थी . मैं अपनी चूत भींच भींच कर झड़ने का मज़ा ले रही थी और थोड़ी देर ऐसे ही आँखें बंद किये बैठी रही . क्या जोरदार चुदाई की थी चाचा ने .
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मैं कितनी खुश किश्मत हूँ की हर चुदाई में मैं कम से कम दो बार झडती हूँ . चाचा मेरी चूचियां मसल रहे थे . मैं जानती थी की चुदाई तो अभी और बाकी है , क्यों की चाचा के लंड का पानी निकलना अभी बाकी है .
मैं थक चुकी थी इस लिए मैं चाचा के ऊपर से नीचे उतर गई . चाचा का लंड , मेरी चूत के रस से गीला लंड , night bulb की रौशनी में चमक रहा था . चाचा ने एक बार फिर मेरे सेक्सी बदन पर हाथ फिराया और मुझे घुमने को कहा , अपनी तरफ पीठ करने को कहा .
एक बार तो मैंने सोचा की चाचा आज मेरी गांड मारने वाले है . पर मुझे पता था की उन को गांड मरना पसंद नहीं है . इस का मतलब वो मेरी चिकनी चूत पीछे से चोदना चाहते थे .
मैं अपनी साइड पर , दूसरी तरफ मुह करके , चाचा की तरफ पीठ करके लेट गई . अपना ऊपर का पैर मैंने थोड़ा और ऊपर किया और चुदवाने की पोजीसन बनाई . चाचा ने अपना गीला कड़क लंड अपने हाथ से पकड़ कर मेरी चूत में पीछे से डाला .
मेरी चूत भी गीली थी और चाचा का लंड भी गीला था इस लिए बिना ज्यादा दिक्कत के, दो तीन धक्कों में उनका लंड मेरी चूत में पीछे से घुस गया . चाचा ने मेरी चूचियां पकड़ी और अपने लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर करते हुए मुझे चोदने लगे . उन की गांड आगे पीछे हिल रही थी और उन के पैर मेरी नंगी गांड पर हर धक्के के साथ टकरा रहे थे .
आप को तो पता है की हर पोजीसन में चुदवाने का अपना अलग मज़ा है . कुछ इसी तरह का मज़ा पीछे से चुदवाने में भी आता है . मैंने चाचा से चुदवाते हुए अपने माँ बाप के बारे में सोचा . वो दोनों एक जोरदार चुदाई के बाद सो गए होंगे पर ये नहीं जानते थे की उन की बेटी अब दुसरे रूम में अपने चाचा से चुदवा रही है .
चाचा के गरमा गरम लंड के धक्के मेरी गरम और गीली चूत में लग रहे थे . और एक बार फिर वही , चुदाई का मधुर संगीत बजने लगा . चाचा का लम्बा लंड मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था और उनके दोनों पैर मेरे दोनों पैरों के बीच में थे . Aap meri chodai ki story sex kahanii website par padh rahe hain.
मैं चुदवाती हुई फिर से एक बार अपनी मंजिल पर पहुँचने के करीब थी और मैं भी अपनी गांड हिला हिला कर , आगे पीछे करके चुदाई में चाचा का साथ दे रही थी . मेरा दूसरी बार होने वाला था . चुदवाते हुए मैंने चाचा के लंड के सुपाड़े को अपनी चूत में और कड़क , और मोटा होता महसूस किया तो मुझे पता चल गया की चाचा का लंड भी पानी बरसाने को तैयार है .
मैं भी झड़ने के काफी पास थी और चाचा मेरी चूत में जोर जोर से , तेजी से धक्के मारने लगे . और फिर मैं तो पहुँच ही गयी . मैं दूसरी बार झर चुकी थी . चाचा लगातार मुझे चोदते जा रहे थे . और अचानक उन के लंड ने अपना गरम गरम प्रेम रस मेरी रसीली चूत में बरसना शुरू कर दिया .
चाचा ने पीछे से मुझे जोर से कस कर पकड़ लिया . मैं तो जैसे हवा में उड़ रही थी . चाचा का लंड नाच नाच कर मेरी चूत अपने रस से भर रहा था और मैंने मज़े के मारे अपनी गांड भींच कर के उन के पानी बरसते हुए लंड को अपनी चूत में जकड़ लिया .
चाचा मेरी चूचियां मसल रहे थे , मेरी गांड दबा रहे थे और मेरी आँखें तो मजेदार चुदाई के कारण बंद सी हो रही थी . हम कुछ देर वैसे ही पड़े रहे . मेरी चूत में चाचा का लंड शांत हो चुका था . थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना नरम होता लंड अपनी गांड पीछे कर के मेरी चूत से निकाल लिया .
मैं खड़ी हो कर बाथरूम में अपनी चूत साफ़ करने चली गई . जब मैं वापस आई तो चाचा को वैसा ही नंगा सोया देख कर मैं हंस पड़ी . उन का नरम हो चुका लंड अब नुन्नी बनकर उन की गोलियों पर आराम कर रहा था . चाचा जानते थे की मुझे नुन्नी बने नरम लंड से खेलना बहुत अच्छा लगता है , शायद इसी लिए .
मैंने बिस्तर पर आ कर उन के नरम नुन्नी लंड को सीधे अपने मुंह में ले लिया और किसी लोली पॉप की तरह चूसने लगी . Aap meri chodai ki story sex kahanii website par padh rahe hain.
मैंने उन का लंड चूसते हुए उन के लंड का रस ही नहीं , अपनी खुद की चूत के रस का भी स्वाद लिया . इस समय उन का लंड इतना नरम और इतना छोटा लुल्ली हो गया था की मैं उस को पूरे का पूरा अपने मुंह में ले गई थी . मैंने अपने हाथ से उनकी गोल गोल गोलियों को भी मसला .
मैंने उन के लुल्ली लंड को मुंह से बाहर निकाल कर अपनी हथेली पर लिया तो वो एक छोटे चूहे के जैसे लग रहा था . मैंने उन के नरम लंड को अपनी मुलायम चुचियों के साथ रगड़ा , फिर से उस को मुंह में ले कर चूसा तो वो फिर से बड़ा होने लगा .
फिर उन के लौड़े की लम्बाई इतनी बढ़ गई.
