आंटी का दूध
Chudakkad aunty ke boobs – हेलो दोस्तो, आज बहुत दीनो बाद मैं अपनी कहानी आप लोगो को सुनने जा रहा हूँ, मेरा नाम हर्ष है, मैं 24 साल का हूँ, मुझे उमिद है आप सभी ने मेरी पूरेानी कहानिया पढ़ी होंगी, मैं मुंबई मे रहता हूँ, आज मैं आपको जो कहानी सुनने जा रहा हूँ वो 2 महीने पहले घाटी हुई है,
मैं जहा पे रहता हूँ वाहा पे दो घर छोड़के एक मकान मे नये किरायेदार आए थे, उसमे उनकी पूरी फॅमिली थी भैया, भाभी, उनके आंटी और अंकल और उनका छोटा 6 साल का लड़का सोनू, भैया कही मंक मे जॉब करते थे और भाभी स्कूल टीचर थी और भैया के अंकल भी कही जॉब करते थे, और उनकी बीवी घर पे ही रहती थी उनके पोते को संभालने के लिए, उनका नाम था कावेरी सिन्हा था,
उनकी उमर 52 साल थी, दिखने मे एक दम मस्त थी अपने आप को बहुत मेंतेन कर रखा था उन्होने, थोड़े ही दीनो मे हमारे घर उनका आना जाना शुरू हुआ, और अच्छे रीलेशन बन गये हमारे उनके साथ, भैया और भाभी कभी-कभी घूमने जाते तो उनके लड़के को घर पे ही छोड़ते थे और कावेरी आंटी उसकी देखभाल कराती थी,
जब भी मैं घर पे रहता था तो मैं भी उनके लड़के के साथ खेलने उसके घर जाता था और वो भी बहुत मस्ती कराता था.
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लेकिन मुझे कावेरी आंटी मे बहुत इंटेरेस्ट था, वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी और मैं जड़तर उनसे बाते कराता रहता था, और वो भी मुझसे खुल कर बाते कराती थी, कावेरी आंटी के बड़े बताता हूँ उनके बूब्स कुछ 38 के होंगे और कमर 34 की और उनकी गान्ड कुछ 40 की है,
मैं जब भी उन्हे देखता था मुझे कुछ ना कुछ हो जाता था, मैने कही बार उनके नाम से लॅंड हिलाया था, मैं जब भी उनके घर जाता कावेरी आंटी को ही देखता रहता था और मैने बहुत बार उनकी क्लीवेज देखी और ये भी पता चला था के वो अंदर ब्रा नही पहनती थी, उ
सकी वजह से वो मुझे और भी सेक्सी लगती थी, एक दिन मेरे घर वाले बाहर गये हुए और मैं घर पे अकेला था, तो मैने ऐसे ही टाइम पास करने के लिए सोनू को बुलाया था और हम दोनो ऐसे ही घर मे खेल रहे थे, फिर कुछ देर बाद उसकी अंकली भी आ गयी देखने के लिए और वो सोफे पे बेठ गयी हमारे साथ, और सोनू भी उनकी गोद मे जाके बेठ गया,
तभी मेरे दिमाग़ मे कुछ आया और मैं भी उनके बगल मे जाके बेठ गया, और फिर ऐसे ही मज़ाक मे मैं सोनू को छिड़ने लगा, मैं “सोनू अंकली मेरी है”, सोनू “नही मेरी है”, और आप सभी को पता है अगर छोटे बच्चों के साथ ऐसे खेलने से वो भी चिढ़ते है.
फिर मैं कावेरी आंटी के करीब गया और उनके हाथ मे हाथ लेके फिर से कहने लगा, और फिर वो भी आंटी का हाथ मेरे हाथ से चुद़ता था, ऐसे ही कर करके मैने आंटी को साइड से अपनी बाहों मे लिया, एक पल के लिए मुझे थोड़ा दर भी लगा क्योकि अगर आंटी को बुरा लगा तो,
लेकिन आंटी ने कुछ नही कहा वो बस स्माइल दे रही थी, अब मैने थोड़ी देर और आंटी को वेसए ही रखा फिर आंटी ने भी अपना सिर मेरे खंधो पर रख कर सोनू को छिड़ने लगी और हास रही थी, आंटी “हन सोनू मैं हर्ष की हूँ, तुम्हारे तो मम्मी पापा है”, अब सोनू भी चिढ़ गया था और रोने वाला था,
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ये बात हम दोनो ने संजी फिर आंटी ने थोड़ा आगे झुक कर उसे सिने से लगाया और फिर से मेरे कंधे पर अपना सिर रख कर उसे कहने लगी, आंटी “हन मेरा बच्चा मैं तुम्हारी हूँ अब तो खुश”, फिर सोनू भी मुझे देख कर हासने लगा,
लेकिन यहा मेरी हालत बहुत खराब थी एक तो आंटी इतनी चिपक के बेठी थी के मेरा लॅंड अब खड़ा हो गया था, और अंदर झटके मार रहा था, उसके बाद आंटी ने सोनू को गोद मे उठाया और खड़ी हो गयी, उसके बाद मैं भी खड़ा हुआ और आंटी के पीछे जाके सोनू से बात कर रहा था और आंटी की गान्ड पर मेरा लॅंड धीरे-धीरे सहला रहा था.
लेकिन आंटी ने एक बार भी कुछ नही कहा और ना ही पीछे मूड के देखा, मुझे थोड़ी और हिम्मत आई और आंटी को पीछे से हग किया और सोनू से कहा, मैं “ये मेरी आंटी है तुम्हारी नही”, और उसे चिड़के दिखाने लगा और मैने अपना लॅंड आंटी की गान्ड की दरार मे घुसा दिया,
लेकिन फिर भी आंटी ने कुछ नही कहा और सोनू से कहा के मैं तुम्हारी हूँ डियर डोंट वरी और फिर हसके चली गयी, अब मुझे भी ऐसा लग रहा था शायद आंटी को भी अच्छा लगा होगा, अब कुछ ना कुछ करके आंटी छोड़ने के बड़े मे सोचने लगा था,
फिर कुछ दिन निकल गये अब आंटी भी मुझे मोका मिलने पर इधर-उधर छू लेती थी और मैं भी आंटी को छू लेता था कुछ ना कुछ रीज़न के बहाने, और ऐसे ही एकबार मैं उनके घर गया था तब मैने देखा आंटी ने सोनू को अपनी गोद मे लिटाया था और उनका एक बूब उसे चूसने के लिए दिया और उपर से पल्लू लिया था,
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ये देख कर मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन जेसे ही आंटी की नज़र मुज पर पड़ी,
आंटी “अरे हर्ष आओ बेठो इसको आदत है अभी भी दूध पीने की, इसकी मम्मी नही रहती”, मैं “लेकिन आंटी क्या अब भी आपका दूध आता है”,
आंटी “अरे नही बेटा वो तो ऐसे ही इसे समझने के लिए करना पड़ता है”.
मैं “अच्छा ऐसा है क्या”, और इतना कह कर मैं जानबुज कर आंटी के बाजू मे जाके बेठ गया, और बार-बार मेरी नज़र आंटी के बूब्स के उपर ही जा रही थी, और ये बात आंटी ने भी नोटीस की और कहने लगी, आंटी “क्या हुआ हर्ष ऐसे क्यो देख रहे हो क्या तुम्हे भी दूध पीना है”, और इतना कह के आंटी हासने लगी,
फिर मैने भी हिम्मत करके कहा, मैं “हन आंटी पिलाओगी क्या आप?”, आंटी ‘चल हट बड़े भी कभी दूध पीते है क्या”, और अब मैं भी ज़िद करने लगा,
मैं “प्लीज़ आंटी एक बार पीला दो ना, किसी को नही बताउँगा मैं”, आंटी “अरे बेटा लेकिन इससे दूध नही आता है, तो केसे”, मैं “तो क्या हुआ आंटी बस एक बार मेरा मन है चूसने का प्लीज़”, आंटी “ओक रुक पहले सोनू को सुला देती हूँ फिर तू पे लेना”,
मैने ओक कहा और फिर थोड़ी देर बाद सोनू सो गया और आंटी मुझे अपने बेडरूम मे लेके गयी और वाहा पर खड़े-खड़े ही बूब्स चूसने के लिए बोलने लगी, लेकिन मैने माना किया और कहा”, मैं “नही ना आंटी आप मुझे अपनी गोदी मे लो और फिर मैं चुसूंगा”,
आंटी “ऑश ओक आओ जल्दी”, फिर आंटी बेड पर बेठ गयी और मैं उनकी गोद मे अपना सिर रख कर बेठ गया.
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अब आंटी ने अपना ब्ल्ौसे उठाया और एक बूब बाहर निकाला और मेरे मूह मे दस दिया, अहहह आंटी के निपल थोड़े ब्राउन कलर के थे, आआहहहहाः अब मैं तो पागल हो गया था उन्हे देख कर और चुस्कर, आहह उम्म्म्माआ मुआहहाा मैं उनके निपल चूस रहा था और मेरा लॅंड भी खड़ा हो गया था और वो पेंट के उपर से दिख रहा था,
आंटी “आहह थोड़ा धीरे-धीरे चूसो ना बेटा ह्म्म्म्म”, लेकिन अब मैं सुनने के मूड मे नही था और मैने अपने एक हाथ से आंटी का दूसरा बूब भी पकड़ने लगा था, लेकिन वो हाथ मे नही आ रहा था फिर आंटी ने अपना ब्लाउस पूरा उतार दिया,
और अब मैं आराम से आंटी का पूरा बूब्स चूसने लगा था और दूसरा एक हाथ से सहलाने लगा था, आंटी “आहह बेटा क्या कर रहे हो अहहहहहा अब बस हो गया कितना चुसोगे अहहहहहाः,
मैं “उम्मा नही आंटी बहुत मस्त है आपके दूध मज़ा आ रहा है चूसने मे उम्म्माआ, कितने नरम है अहहहहहहाः उम्म्म्माआ”, अब आंटी भी मोन कर रही थी और उनका ध्यान मेरे खड़े लॅंड पर बार बार जा रहा था और मैं भी अब बिना चिंता किए आंटी के बूब्स चूस रहा था,
अब आंटी से भी रहा नही जा रहा था वो कभी मेरे बाल सहलाती थी तो कभी-कभी मेरे को गुर्ती थी.
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अब उनसे और कंट्रोल नही हुआ, आंटी “आहह बेटा ये तुम्हारी पेंट मे क्या रखा है, जो इतना टाइट हो गया है”, मैं “उम्माआ आहः आप ही देख लो ना आंटी निकल के क्या है”, फिर आंटी ने मेरी पेंट के बतन खोले और मैने आनी गान्ड उठाई और पेंट नीचे कर दी अंडरवियर के साथ,
मेरा लॅंड बाहर आ गया था आआहहहाः कितनी रहट मिली थी मेरे लॅंड को, आह और फिर आंटी ने लॅंड हाथ मे लिया और सहलाने लगी, आंटी “आहह कितना बड़ा है तुम्हारा बेटा आअहह क्या मैं भी इसे चूस सकती हूँ”, आईं “आहह क्या सच मे आप इसे चुसोगी अहहहहा”,
आंटी “हन बेटा एक मिनिट”, और आंटी ने अपनी सारी और पेटिकोट निकल दिया और मुहे बेड पर बिठा के खुद नीचे बेठकर मेरा लॅंड चूसने लगी, मैं “अहह कितना मज़ा आ रहा है आंटी आआहहहहः”, आंटी “आहह अमा कितने सालो बाद लॅंड मिला है और वो भी इतना मोटा और टेस्टी आहहः, मुझे भी मज़ा आ रहा है आअहह”,
मैं “मतलब अब आप अंकल से चुद़वति नही हो क्या”, आंटी “आहह “नही बेटा उन्हे फ़ुर्सत नही होती अब आअहह, अब वो सब टॉपिक मत निकालो तुम बस एंजाय करो उम्म्माआ”, ऐसे ही आंटी ने 10 मिंट चूसा और मैने अपना सारा माल आंटी के मूह मे छोड़ दिया और आंटी ने सारा पे लिया.
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अब वो मेरे बाजू मे आके लेट गयी और फिर से मेरे लॅंड को सहलाने लगी, आंटी “आहह हर्ष ये बात किसी को मत बठाना प्लीज़”, मैं “आंटी इसकी तुम चिंता मत करो, मैं आपको कब से चाहता हूँ और आपको प्यार करने की इच्छा बहुत पहले से थी उम्म्माआ”, अब हम दोनो स्मूच करने लगे थे,
फिर मैं धीरे-धीरे उनकी पूरी बॉडी को किस करके चूमते हुए नीचे तक आ गया और उनकी चुत चातने लगा, ये शायद आंटी ने एक्सेप्ट नही था और वो ज़ोर-ज़ोर से मोन कर रही थी, आंटी “आहहह बेटा ये क्या कर रहे हो आहहहा अहहहहहह आअहहः अहहहहह”, और वो मेरे बालो को सहला रही और मेरा मूह और अंदर डाल रही थी,
मैं अपनी ज़ुबान से उन्हे चोदे जा रहा था, अहहहहा कितनी टेस्टी थी उनकी चुत (सच मे गाइस मुझे चुत चूसने मे बहुत मज़ा आता है, अगर किसी को भी अपनी चुत चटवानी है तो मुझे बोल देना मेरा मैल आइ डी नीचे है) कुछ 15 मिंट तक चुत चूसने के बाद वो झाड़ गयी, लेकिन मेरा लॅंड अब खड़ा हो गया था,
फिर उन्होने मेरे लॅंड को थोड़ी देर सहलाया और मिशनरी पोज़ लेकर मेरा लॅंड अपनी चुत पर रख दिया, और मैने उनके बूब्स को हाथ मे लेके एक ज़ोरदार झटका लगाया और उनकी तबाद-तोड़ चुदाई करने लगा.
आंटी भी मेरा साथ दे रही थी नीचे से अपनी गान्ड उठा-उठा के आआहहहः सच मे बहुत मज़ा आ रहा था,
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उनकी चुत मरने मे आहहहहा वो भी मज़े ले रही थी आहहहा, फिर कुछ देर बाद मैने उन्हे उठा के अपनी गोदी मे लिया और खड़े-खड़े उन्हे छोड़ने लगा था अहाहाहह, आंटी “आहह और ज़ोर से चोदा बेटा बहुत अच्छा लग रहा है अहाहहा अहहहहः”, और बार-बार मुझे चूम रही थी और चाट रही थी,
मैं भी पूरे जोश मे उनकी चुदाई कर रहा था अहहहहः, फिर 30 मिंट की चुदाई के बाद हम दोनो साथ मे झाड़ गये,
एक तूफान थम गया था और आंटी को बेड पर लिटा कर मैं भी उनकी बाजू मे लेट गया, आआआअहह फिर 10 मिंट बाद आंटी ने मुझे उठाया और हम दोनोने कपड़े पहने और तब तक सोनू भी जाग गया था,
फिर मैं अपने घर निकल आया, उसके बाद हमे जब भी मोका मिलता हम चुदाई करते हा, सच मे बहुत मज़ा आता है,
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