दोस्त की बहन की चुदाई
xxxdesi fuck story – फ्रेंड्स मैं हू सोनू जायसवाल मेरी उमर है 18 य्र्स और मैं हटता कटता गबरू जात किसी ब ल्दकी की चुत की खुजली को अपने 6″लंड से मिटा सकता हू. मैं लास्ट 2 साल से सेक्स स्टोरीस पढ़ रा हू, मुझे लगा मुजको भी अप्निस्टोरी शेयर करणी चाहिए सो आज मैं आप सब क साथ अपनी लाइफ की एक सेक्स इन्सिडेन्स शेयर करने जा रा हू.होप्फुली आप लोगो को ये पसंद आएगी. क्योंकि ये मेरी फ्ली स्टोरी है सो अगर कोई ग़लती हो जाए तो मुझे माफ़ करना.
तो मैं स्टोरी पे आता हू.बात आज से 3 साल फ्ले की है जब मेरे कज़िन की शादी थी.ह्मारा और उनका घर पास मे ही है, सब रिस्त्ेदार आए हुए थे. मेरी मौसी की लड़की सपना भी आई हुई थी,मैं सपना के बड़े मेनबता दु वो मेरी ही उमर की है, वो एक मस्त ल्दकी है जो सबसे घुल मिल के र्हती है,हमेशा हस्ती र्हती है और सबको साती र्हती है.और सूरात से भी बहुत सुंदर है.
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मेरी उससे अछी जमति थी पर मेरे मन मे कभी सेक्स जैसा कोई ख्याल नही आय था.सपना और उसके 2 भाई जोकि उससे छ्होटे है वो ह्मारे घर ही रुके थे.वो लोग शादी से 3 दिन फ्ले आ गये थे. मेरी छ्होटी बेहन और उसके भाई खेलते र्हते,एक दी लुक्का-च्चिपी खेलते खेलते वो मुझे बोले की भैया आप भी खेलो ना ह्मारे साथ.
मेने माना कर दिया,इतने मे सपना बीच मे बोली “क्यू नही खेल्त इनके साथ” “अब मैं बाकचा नही हू जो ये खेल खेलु” “ओहो बड़ा हो गया, चल मेंभी खेलती हू तू भी आ जेया” ओके..ठीक है तुज़से कौन जीत सकता है”.और हम सब लुक्का-च्चिपी खेलने लगे.मैं और सपना च्चिप गये,वोंेरे आगे थी,हम बैठे थे,तभी उसकी गान्ड मेरे लंड के उपर टकराई. मेरी पूरी बॉडी मे एक करेंट सा लगा.फ्ली बार ऐसा हुआ था.
उसने पिकचे मूड कर देखा, मैं अवाक सा बैठा था.उसने हल्की सी स्माइल दी और वापिस मड गयी. मुझे चस्का चड्ड़ने लगा.अगली बार मेने जान भुज कर अपना लंड उसकी गान्ड से टकराया,उसकी तेराफ से कोई रेक्ष्ण नही हुई,मे हिम्मत और बढ़ी.मुझ पर नशा सा च्चाने लगा था.इतने मे हम पकड़े गये और खेल ख़त्म.लुक्का चिप्पी का खेल तो ख़त्म हो गया पर मेरे दिमाग़ मे सपना से सेक्स का खेल शुरू हो गया.
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अब तो उसेच्चोड़ने की चाहत जाग उठी थी.चूँकि वो गर्मी के दिन थे इसलिए सब दोपहर को अंदर रूम्स मे जाकर लेट गये.मैं सपना के बगल मे जाके लेट गया.और ऐसे ही बातकरने लगे.थोड़ी देर बाद म,आइन जान भुज के उसकी गान्ड पर हल्का सा हाथ फिराया,कुछ इस तेरह फिराया की मानो आक्सिडेंट्ली हुआ हो पड़ी वो फिर भी कुछ नही बोली.मैं समझ गया आज तो मामला सेट है.धीरे धीरे मैं उसकी बॉडी को खि खि से च्छुए जा रा था और वो कुछ नही कह रही थी. फिर हिम्मत करके मेने उसकी जाँघो पर हाथ रखा,उसने एक दम तेज़ी से मेरा हाथ हटा दिया और मेरी तेराफ आँखे दिखाई.
मैं बाहर चला गया,वो भी पिकचे पीचे आई और बोली “ये क्या कर रा था” “वो कुछ नही ऐसे ही ग़लती से टच” ग़लती एक बार होती है”. मुझे लगा आज तो गया पड़ी तबी बोली “10 बार नही ” और आँख मार दी मेरी तेराफ.मैं मुस्कुरा पड़ा और वो भी.मेने उसकी गान्ड पर हल्का च्चंता मारा.वो बोली अंदर और हम दोनो अंदर चले गये.आने के बाद फिर से मेरी व्ह हरकत शुरू हो गयी,इस बार मैं उसके सामने लेता ,पर उसने माना कर दिया बोली ये बाकछे देख लेंगे तो गड़बड़ हो जाएगी,,अभी नही. मुझे भी यही ठीक लगा.
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मैं अब मौके की तलाश मे था.वो मुझे मिला शाम को जब सारे बाकछे बाहर चले गये गली मे और बाकचो के साथ ल्ेलने और घर मे बस मैं और सपना थे.वो बर्तन सॉफ कर रही थी मेने उसे पिकचे से ही पकड़ लिया.मेरालोदा तो सलामी देने लगा.उसने च्छुदाने की कोशिश की पर नाकाम.बोली अछा ठीक है मैं ये बर्तन सॉफ कर लू फिर आती हू तूहरे पास .मैं रूम मे चला गया वोआकर मेरे पास बैठ गयी.मैं उसे एक टक्क निहाराता र्हतो बोली “ऐसे क्या देख रा है”.
मैनसमझ नही पा रा था कैसे शुरू करू. मैं चुप रा और उसका हाथ पर हाथ रख दिया और धीरे से उसकेगाल और फिर बूब्स सहलाए.वो शर्मा गयी और मूह फेर लिया पड़ी मेने उसे अपनी तेराफ किया और उसे बाहों मे भर लिया.ःऊम अलग हुए तो मेने अपने हूँठ उसके हूँठो पर लगा दिए लेकिन उसेकईसस पाँद नही थी तो उसने माना कर दिया.बोली की बस गाल की ले लो.मूज़े एक बार तो अछा नही लगा पर मुझे लगा कोई नही.
मेने उसकले गॉल चूमने शुरू किए,हाथ अपने हाथो सेपकड़ लिए,गालो से उसकी गर्दन चूमि,जैसे ही उसकी गर्दन चूमि वो चाहक उठी.मेने उसेलेटा दिया ुआर उपर से नीचे तक उसका बदन चूमने लगा वो भी माधोस हुए जा रही थी.मेने उपर से ही उसके मम्मे दबाए.गोल मटोल एक दम संतरे जैसे.फिर उसके पेट से होते हुए उसकी चुत पड़ी हातर अखा और उपर से ही श्लाने लगा .
वोनशे मे चोर हुए जा रही थी.मेने उसका हाथ लोवर के उपर से हियपने लोड के उपर रखा,वो शर्मा सी गयी. फ़ि मेने उसकी सलवार खोलनी शुरूर की,फ्ले तो उसने पकड़ ली फिर जब मैं नही माना तो उसने हाथ हटा लिया.मेने उसकी बुर पर हटथ रखा ,एक दम कोमल नरम चुत,दोस्तोमेने पहली बार चुत च्छुई थी,उसकी चुत के थोड़े से दर्शन हुए थे की तबी दरवाजे पे घंटी बाजी.हम हड़बड़ा गये उसने अप्निसलवार उपर की और दरवाजा खोलने गयी.मम्मी और मौसी बाजार से वापस आई थी. मेरा मन टुउट गया पर क्या कर स्कता था.
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बस अगले मौके का इंतज़ार.आऊर वो मौका भी जलधि ही मिल गया.हमने प्लान किया की शादी वाले दिन सारे लोग टॉ जी के घर गये होंगे तब हम अपनी रास लीला रचानएगे. और ह्मारे प्लान के अनुसार हम लोग खाना खाने के बाद वापस ह्मारे घर आ गये.पहले मैं आया,मेरे बाद सपना भी आ गयी.रूवं मे आते ही में उससे लिपट गया.उसे दीवार के सारे खड़ा कर उसे चूमने लगा,मेने हूँठ उसके हूँठ पर रखे उसने म्ना किया पर इस बार मैं नही माना ुआर मेरी जिद्ड़ के सामने उसे झुकना पड़ा.
मैं बड़े मजे से उसके हूँठो का रस पॅयन किए जा रा थःअत्थो से उसके बदन को भी सहला रा था.दोस्तो तब मुझे लड़की को गरम करना जैसा कुछ नही पता था. मेने सीधे उसके कपड़े उतरने चाहे तो वो कुछ हिचकई,मेनेकहा क्या हुआ तो बोली की कुछ होगा तो नही,मेने पूछा क्या बोली की मुझे बाकचा हो गया तो.मैं हास पड़ा “अरे पगली ऐसे थोड़े होगा,कुछ नही होगा बस मजा आएगा तुझे भी और मुझे भी. और अगर कोई देख लेगा तो;
मेने खा कोई नही आएगा अब य्चा, सभी व्हा शादी मे व्यसत है.इस पर वो मन गयी.मेने उसकी सलवार उतरी, इस बार उसकी चूत के दर्शन अच्छे से हो रहे थे,गुलाबी रंग की हल्के छ्होटे छ्होटे बाल.
मेरे लंड मे तो देखते ही उफान आ गया.मेने अपने कपड़े उतरे और फिर लोड्ा उसकी चुत पे रख दिया. उसकी चुत एक दम भट्टी की तेरह उबाल रही थी.मेने उसे लंड चूसने को खा. फ्ले तो उसने ना-नुकर किया पर फिर लेलिया. मैं तो जैसे जन्नत मे था. और कुछ ही देर में मैं उसके मूह मे च्छुत्त गया.उसने बाहर थूक दिया.उसे पसंद नही आया. मेरा लंड थोड़ा ढीला प़ड़ गया. ंौुझे तो शर्म आ रही थी की इतनी ज्लडी मैं झड्द गया. पर तब वो बोली कोई बात नही पहली बार है ना.
उसने मेरा लंड अपने हाथ मे पकड़ा और सहलाने लगी. कुछ ही प्लो में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मेने पापा की अलमारी से कॉंडन निकाला, लंड पे चड़ाया . वो निकचे लेती थी और मैं उसके उपर से उसके अंदर डालने की कोशिश करने लग.पर लंड नही जा रा था.तब मेने उसके निकचे एकटकिया लगाया और उसका एक पैर थोड़ा उपर और साइड मे उठाया.उसकी चुत पे थोड़ा तूऊक् लगया और डालने की कोशिश की.लंड थोड़ा सा अंदर गया.उसे दर्द होने लगा और मुझे भी.पर वो फिर भी कुछ नही बोली.
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मेने थोड़ा और धक्का लगाया तो लंड और न्दर तक गया .इस बार उसकी चीख निकल गयी.उसकी आँखों मे आँसू आ गये और वो मुजसे बाहर निकालने को खने लगी. पर मेरे सिर पे तो जुनून सवार था. मैं कहा रुकने वाला था.
मेने उससे कहा की बस थोड़ा सा ही होगा गा प्ल्ज़ सहन कर लो मुझे भी तो हो रा है.वो अपने हाथो से मुझे पिकचे धेकलने लगिओ इस पर मेने उसके हाथ अपने हाथो स एक लिए.चूँकि ये मेरे पहली बार था सो मूजस क्टरोनिहोपा आ आर्मे एक और झटके में पूरा लंड उसकी चुत मे डाल दिया.इस बार उसकी चिल्ली ज़ूर ने निकली.”उउउइईईईई मा मार गयी…कामीने तू भाई है या कसाई”
मेरी रानी बस थोड़ा सा सहन कर ले अब मज़ा भी आएगा” और में लगातार धक्के माराता रहा.कुछ ही देर मे उसे भी मज़ा आने लगा. तब वो भी मेरा साथ देने लगी.”आआआअ..ईईईई….उूउउइइ की आवाज़े निकल रही थी.करीब 5-7 मिनिट बाद उसने अकड़ना सघुरूर कर दिया और फिर मुझे ज़ूर से पकड़ लिया, अपने नाख़ून मेरी पीठ मे चला दिए.बोली बस अब और नही प्ल्ज़ बाहर निकल ले.”पर मेरा तो अभी नही हुआ है: मैं बोला.
तो मीं हाथ से कर दूँगी.वो बोली. “नही यार प्ल्ज़” और मैं उसे छोड़ता ही र्हहा. 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा भी होने वाला था और इससे पहले की मैं कुछ सोचता मेरा फिर से निकल गया. पर मेने कॉंडम लगाया हुआ था इसलिए हम दोनो निसचिंत थे .मेने अपना लोड्ा बाहर निकाला,कॉंडम हटे,कॉंडम मेरे वीर्या से भर गयी थी.साथ मे खून भी लगा हुआ था.
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मेने उसके गालचुमे और फिर वो वॉश रूम चली गयी और मैं वही बेड पे पड़ा रा.फिर मैं भी ठीक होके हम दोनो वापस शादी मे चले गये.दोस्तो ये मेरा पहला सेक्स एक्सपीरियेन्स था.इसके बाद मेने और भी काई लड़कियो को चोदा है पर ये मज़ा अलग ही था.
