साले की बीवी

ए बड़ी ही रेर टाइप का इन्सिडेंट है, कई बार देखा गया है इन-लॉस में सास, और साली के साथ जमाई राजा का हम बिस्तर होना
लेकिन साले की बीवी के साथ सेक्स का अनुभव बहुत ही कम बार देखा गया है… कहानी की शुरूवात कुछ इस प्रकार है…
(ओन्ली नेम्स अरे फीकटीऔस और थे स्टोरी इस रियल वन)
मेरा नाम विजय है, लगभग 12 साल पहले मेरी शादी सुधा से हुई, शादी के तुरंत 2 साल में ही हम
कपल ने 2 लड़कोन को जन्म दे दिया और हम दो हमारे दो को सार्थक कर दिया, हमारे बीच में बहुत ही अच्छे रिलेशन्स है


हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरह सॅटिस्फाइड है, मैं और मेरी पत्नी दोनों ही एक दूजे के प्रति वफादार है…
हमारी शादी के वक्त मेरा एकलौता साला अभिजीत 18 (***एडिटेड***) साल का था और पढ़ाई कर रहा था…
हमारी शादी के 8 साल बाद अभिजीत का एजुकेशन पूरा हो गया और वो बढ़िया सी जॉब पे फिट हो गया…
फिर क्या था उसके लिए सुन्दर गोरी चिट्ठी पुष्पा का सुझाव आया तो सभी ने उस रिश्ते के लिए हां कर दी…
इस साल उनकी शादी की 4त आनिवर्सयरी थी लेकिन शादी के 4 साल बाद भी बच्चा ना होने से दोनों ही परेशान थे..
मैंने और सुधा ने दोनों को डाक्टरी इलाज के लिए उकसाया और दोनों का हर एक चेक आप करवाया लेकिन दोनों बिलकुल भी फिट थे
उन दोनों में कोई भी शारीरिक प्राब्लम नहीं थी… ये बात बहुत ही हैरानी वाली थी..
मेरी सास और ससुर दोनों ही परेशान हुए जा रहे थे एकलौता लड़का और उसे कोई संठान नहीं
पुजापाठ, जप, तंत्र, मंत्र, दवाई सब कुछ ट्राइ हो चुकी थी लेकिन परिणाम कुछ नहीं …
मैंने और सुधा ने प्राइवेट्ली अभिजीत और पुष्पा से बात की की कही उन दोनों के शारीरिक संबंधों में तनाव या कोई प्राब्लम तो नहीं,
लेकिन ऐसा कुछ भी उन दोनों के बीच में प्राब्लम वाला नहीं था.. मैं और सुधा दोनों ही परेशानी में डूब गये.
उसे दिन आनिवर्सयरी सेलेब्रेट करने के लिए सुधा, मैं और बच्चे रीडी हो गये.. सुधा बहुत ही सेक्सी लग रही थी.. हमने बच्चों को हॉल में
बिठा के कार्टून नेटवर्क लगा दिया और बेडरूम बंद करके ड्रेसिंग से बहाने एक दूसरे के चूमने लगे. 12 साल की शादी शुदा जिंदगी में मैंने
उसे दिन तक किसी भी और नारी का विचार अपने मन में आने ना दिया और सुधा से भी इम्तहान प्यार करते रहा सुधा भी अपनी पूरी जवानी और
हुस्न मुझपर लुटाती रही .. बेडरूम में हमने साले की आनिवर्सयरी सेलेब्रेट कर ली और खूब सेक्स किया…
उसके बाद हम आनिवर्सयरी वेन्यू पे जाने के लिए रीडी हो गये..
मैं सुधा और बच्चे जैसे ही मेरे ससुराल पोंछे हमारा ज़ोर शोर से स्वागत किया गया..
पुष्पा निःसंठान होने की वजह से बच्चों को बहुत प्यार करती थी और हमारे बच्चों को तो उसने जैसे खुदके बच्चे ही समझ के रखा और
उनकी हर जिद पूरी करती ..
पार्टी खत्म होने वाली थी बच्चे सोने के लिए नाना नानी के कमरों में जा रहे थे के हमारे छोटे लड़के ने पुष्पा के सारी पे आइस्करीम गिरा
दिया, पुष्पा ने कुछ नहीं कहा उल्टा बच्चों को और चॉकलेट दिए और उन्हें नाना नानी के कमरों तक पहुँचा दिया ..
मेरा ध्यान मेरे साले साहब पे गया वो एकदम टेन्स दिखाई दे रहा था…
मैंने सुधा को इशारा किया तो सुधा अभिजीत से बात करने के लिए गयी…
मैं मन ही मन में सोच रहा था की हे भगवान कितना सुन्दर कपल है ये, और इनके संठान नहीं..
सुधा और अभिजीत लॉन में बैठे बातें कर रहे थे की इतने में पुष्पा वहां सारी चेंज करके आई..
बाला की खूबसूरती पाई थी उसने गोरा चीट्टा बदन, भरे हुए मध्यम आकर के स्तन, ऐसी लग रही थी जैसे अभी अभी दूध से नहा के
आई थी..
लगभग 5.3 इंच हाइट थी, अभी 24 साल की थी , मैं खुद की तारीफ नहीं करूँगा दोस्तों मैं तो उसे अप्सरा की तारीफ करूँगा.
काले घने बाल, भरपूर मजबूत कंधे सुडौल और पर्फेक्ट फिगर.. जिसे देखकर कोई भी लालचा जाए ऐसी..
सुधा और अभिजीत की बताओ में वो भी शामिल हो गयी, थोड़ी देर बाद तीनों ने मुझे गपशप के लिए इन्वाइट किया..
मैं वहां पे गया तो बात वही चल रही थी की संठान कब होगी…
तब मेरे मन में ये ख्याल आया की अगर मैं पुष्पा के साथ सेक्स करूं तो क्या मैं इसको संठान दिला पाऊँगा..
और इस विचार के साथ ही मेरा लंड पूरी तरह से गरम हो कर हथौड़े की तरह आंडरवेयर पे वार करने लगा..
मन ही मन खुद को कोस रहा था की इतना बूरा विचार क्यों मेरे मन में में आ रहा है ….
थोड़ी कशमकश के बाद मैं खामोश हो गया और मैंने सुधा से जल्दी से खाना खाने और घर चलने की बात कही..
फिर सुधा ने और पुष्पा ने डिनर टेबल रीडी किया और खाना परोसा..
मेरा साला मल्टिनॅशनल कंपनी में होने की वजह से विस्की रूम का आदि था..
उसने हम सब को विस्की का ऑफर किया मैं तो कभी शराब पीता नहीं तो मैंने नहीं ली.,,,
सुधा कई बार बाहर पे चुकी थी तो उसने विस्की को मना नहीं किया..
पुष्पा को डिनर सर्व करना था इसलिए उसने भी मना कर दिया…
जैसे जैसे टाइम होता चला गया ये भाई और बहन पीते चले गये पीते चले गये इतने की उन दोनों को कुछ भी होश ना रहा..
बिना खाना खाए ही दोनों टेबल पे ही सो गये.. फिर मैंने और पुष्पा ने मिलकर दोनों को हाल में सुला दिया… और आदतन खाना खाने बैठ गये..
मेरे मन में जो विचार आए थे उनकी वजह से मैं पुष्पा की आंखों में आँख डाल के बात नहीं कर पा रहा था..
फिर भी मेरे मन में ये सवाल आया की क्या पुष्पा के मन में भी कुछ ऐसा चल रहा होगा तो ??
उसका वो चमकीला गोरा बदन मेरे लंड को फिर से सुलगाने लगा… खाना खत्म होते होते पाया की अब वहां पे सिर्फ़ पुष्पा और मैं दोनों ही जगह
रहे थे, मैं वहां से निकालने की तैयारी करने लगा तो पुष्पा बोली जीजाजी आप यही रुक जाए क्योंकि अभिजीत भी पूरी तरह से पिया हुआ है
और सुधा दीदी, बच्चे सोए है..
मेरे मन में वासना के राक्षस उबाल पड़े थे लेकिन मैं अपनी पत्नी से वफादार था इसलिए मैंने फिर भी वहां से जाने की जिद की..
पुष्पा जैसे नाराज़ सी हो गयी और उसने कहा जीजाजी आपसे एक बात करनी है अगर आपको अच्छी लगे तो आप रुक जाओ वरना आप जा सकते हो..
मेरे मन में लड्डू फूटा.. पुष्पा ने मुझे टेरेस पे आने के लिए कहा…
मैं टेरेस पे पहुंचा तो देखा Pऊश्प चाँद के रोशनी में खड़ी है मेरी और देखती मैंने पूछा क्या बात है… उसने कहा जीजाजी क्या आपको
नहीं लगता की मेरा और अभिजीत का रिश्ता अच्छा रहे और हम खुश रहे.. मैंने कहा ओफ्कोर्स मेरी तो ये दिलिखवाहिश है की तुम दोनों सुखी और
संतनवान रहो… पुष्पा बोली जीजाजी मुझे नहीं मालूम की हम दोनों में क्या कमी है और ना ही मेडिकल फील्ड इसका जवाब दे रही है.. मुझे बॅस
अब एक ही ख्याल आ रहा है.. मैंने पूछा क्या..?
जीजाजी या तो अभिजीत की दूसरी शादी करवाई जाए या फिर अडॉप्षन किया जाए..
मैंने उसके दोनों बताओ से इनकार किया.. और कहा की सोचो अगर तुम खुद प्रेगञेन्ट हो जाओ तो…
वो बोली 4 साल से हम दोनों कोशिश कर रहे है लेकिन हर बार की असफलता ने अभिजीत को निराश कर दिया है..
वो ये सब कहने में झीजक रही थी मैंने उसके मन के भाव पढ़ लिए और जान गया की इसके मन में मेरे बड़े में क्या चल रहा है ???
मैंने कहा ” एक काम करो नीचे बेडरूम में चलो मैं तुम्हें इसका टालतोड़ सल्यूशन देता हूँ..”
वो झट से बेडरूम की तरफ चल पड़ी… मैं उसके पीछे पीछे बेडरूम तक गया…. मेरा मन बहुत तेजी से धड़क रहा था… लेकिन जाते जाते..
मैं उसके भी और ध्यान दे रहा था तो देखा पुष्पा के वक्ष भी बुरी तरह से नीचे ऊप्पर हो रहे थे….
अब हम दोनों बेडरूम में पोहॉंच गये.. बेडरूम पूरी तरह से सुहागरात की तरह सजा के रखा गया था क्योंकि आनिवर्सयरी जो थी…
वो दरवाजे पे खड़ी मेरा स्वागत कर रही थी.. मैंने जैसे ही रूम में एंट्री मारी उसने दूर लॉक कर दिया… इससे उसकी मंशा साफ जाहिर हो
गयी वो पीछे मुड़ी तो मैंने देखा की उसकी सांसें फूली हुई थी.. वो मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी लेकिन उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी…
कमरा पूरी तरह से रोशनी से भरा हुआ था, मैं उसके करीब गया और उसको अपनी बाहों में भर लिया उसने कोई विरोध नहीं किया मेरी हिम्मत और
बढ़ती गयी,, मैंने पुष्पा के गले पे चूमना शुरू कर दिया… गोरा बदन जैसे गुलाबी सा होने लगा पहली बार सुधा की जगह कोई और मेरी
बाँहों में थी.. मैंने उसे बेड पे लिटा दिया और उसके ऊप्पर चुंबन की बरसात करने लगा मैंने उसके पेट पे गर्दन पे कमर पे अपने होंठ रखने
शुरू कर दिए, वो सिसकने लगी, तड़पने लगी.. मैंने उसका पल्लूओ कंधे पे से हटा के बेड पे फेंक दिया तो ब्लाउज से वक्ष की मूव्मेंट बड़ी
ही उत्तेजणपूर्ण और रोमांच के उफ्फान पे थी.. मैं मन ही मन अभिजीत से जलन महसूस करने लगा…मेरे हाथ मेरे कंट्रोल में नहीं थे
बड़ी ही तेजी से मेरे हाथ उसके पेट कमर, वक्ष, और गर्दन पे से घूम रहे थे वो बड़ी ही प्यारी पीड़ा का अनुभव करने लगी… एकबार मैंने
उसके और देखा और फिर उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए, एक पल के लिए जैसे मानो पूरा शरीर गरम हो गया सांसें उखाड़ने लगी और ऐसा
लगा की मैं स्वर्ग में आ गया हूओ…. मैं उसके होंठ अपने होंतोसे चूस रहा था, वो भी अपने होठों से मेरे होठों को चूस रही थी 10 मिनिट
तक हम यौही चिपके हुए से थे फिर मेरे लंड ने बगावत करनी शुरू करदी और वो आंडरवेयर से जंग करने लगा… शायद पुष्पा की चुत भी
गरम हो चुकी थी वो भी अपने शरीर से मेरे शरीर को रगड़ रही थी… पहले मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा उतार दिया
और उसकी मध्यम आकर के लेकिन बड़े ही सुन्दर वक्ष को देखा और उनको चूमना शुरू किया… फिर उसकी सारीपेटीकोआट का नाडा खींच के गाँठ
निकल दी अब वो सिर्फ़ पैंटी में थी वाइट रंग की वो पैंटी जो रही रही के उसके चुत को साफ से दिखा रही थी और चुत का आकार धारण कर रही
थी,, देखकर मेरा तो खून जैसे उबलने लगा…. इतनी गोरी चिट्ठी, मुलायम टांगे मस्त आकर की उभार वाली चुत को देख के मैं तो उसका
दीवाना हो गया… वो भी झट से उठी और मेरी शर्ट और पेंट उतरने लगी वो अपने घुतनों के बाल बैठी थी तो उसकी पीठ पे हाथ फेरने लगा
फीत से उसके गान्ड की तरफ मेरे हाथ बढ़ने लगे उसके बड़े ही सुडौल नितंब नाज़ुक मुलायम और मस्त थे… मैंने पीछे से हाथ डालके उसकी
पैंटी उतारनी शुरू कर दी वो तब तक मेरे कपड़े उतार चुकी थी और अब मैं भी आंडरवेयर से निजात पाना चाहता था… मैंने खुद अपनी आंडरवेयर
उतार दी और अपना ठाना हुआ लॅंड उसके सामने दिखा दिया… उसकी क्लीन शेव्ड चुत बहुत ही आकर्षक थी मेरा मन उसको चातने की कह रहा था
और लंड उसके अंदर जाने को तड़प रहा था …. मैंने उसे अपनी बाँहों में उठा लिया और फिर से बेड पे लिटा या और पुष्पा की दोनों टांगे उप्पर उठा
के उसके चुत को चातना आरंभ किया… सुधा की तरह वो भी मुझे मीठा ही लगा टेस्ट में थोड़ा सा डिफरेन्स था लेकिन चातने में मजा आ रहा
था… अब मैं पूरी ताक़त से अपनी जीभ उसके चुत पे से घुमा रहा था और नीचे मेरा लंड पूरी वेटिंग पे खड़ा था… मेरे चातने का असर
पुष्पा पे मुझसे कई गुना ज्यादा हो रहा था वो अपनी हाथों से तकिये को जकड़े हुए थी और उसकी चुत पूरी तरह से मेरे सेनापति के लिए
द्वार खोल के रीडी थी.. मैंने अपना लंड ठीक उसके चुत के छेद तक पहुंचाया और एक छोटासा धक्का दे दिया… उसके चुत से बहुत सारा रस
टपक रहा था इसलिए मेरे लंड को घुसने में आसानी हो रही थी लेकिन फिर भी उसकी चुत बड़ी ही टाइट थी और सुधा के मुकाबले आधी ही थी..
जैसे ही मेरे लुंक का उभर वाला भाग उसके चुत के मुंह पे आया उसके मुंह से एक दबी हुई चीख आई… मैं ने उसके होठों पे फिर से अपनी
होंठ रख दिए तो अब वो चीख भी नहीं पा रही थी और मेरा लंड प्रेशर के साथ उसके किल्ले के दरवाजे को झिंझोड़ता हुआ उसकी चुत में
घुस गया.. उसके होंठ जैसे सफेद पड़ गये और दर्द का अनुभव चेहरे पे दिखाने लगा.. लेकिन वो फिर रीडी पोज़िशन में आई और उसने मुझे ऊप्पर
उतने के लिए मेरे कमर को हाथ से उतने की कोशिश करने लगी मैं उसका इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे मेरा लंड अंदर बाहर करने
लगा हम चूमते रहे लंड को अंदर बाहर करते रहे वो झूमती रही कमर को आगे पीछे करती रही… 10-12 मिनिट में वो शांत हो गयी और
थोड़ी ही देर में मेरा भी काम हो गया मैंने उसकी कमर को थोड़ी देर के लिए ऊप्पर उठा के हाथों से पकड़ा और मेरे लंड को चुत के अंदर ही
रहने दिया….
उसके बाद तक कर चोद हो कर हम एक दूजे के बाँहों में सो गये और एक छोटी सी झपकी लेने के बाद मैं जगह गया और मैंने उसे
उठाया… अब हमारा रिश्ता जैसे पति पत्नी का रिश्ता बन गया था… वो पूरी तरह से निर्वस्त्र मेरे साथ बैठी थी.. मैंने उससे कहा की
एक ही बार ऐसा करवाने से तुम प्रेग्नेंट नहीं हो सकती… उसकी आंखों में एकदम से पानी उभर आया… मैंने उसको समझाते हुए एक किस लिया और
कहा की आज जो कुछ हुआ है ऐसा अगर हर माह तुम्हारे मेंकसे पीरियड के 8 दिन बाद हर रोज़ और और मेंकसे पीरियड से 8 दिन पहले तक करने से
ही पता चलेगा की तुम प्रेगञेन्ट हो सकती हो या नहीं… वो बड़ी ही असहाय नज़ारो से मुझे देख रही थी… फिर मैंने उसे एक छोटा सा उपाय बताया
की क्यों ना अभिजीत और पुष्पा दोनों हमारे यहां 3-4 महीने रहने के लिए आ जाए ताकि हवा पानी चेंज होने से संठान की उम्मेड बढ़ती है तो
उसने इस आइडिया को स्वीकार किया लेकिन कहने लगी की सुधड़ी को अगर पता चल गया तो क्या होगा.????
मैंने कहा की इसकी तुम चिंता मत करो मैं इसका सल्यूशन जानता हूओ… उसने कहा कैसे लेकिन ….. मैंने कहा की दोनों भाई बहन पीने के
शौकीन है डेली एक पेग तो जरूर पिएँगे मैं उन की शराब में बेहोशी की दवा डालने का इंतजाम करता हूँ और फिर देखना काम बन जाएगा…
वो खुश हुई और मुझे किस कर लिया….. हमारा काम बन गया मेरे सास ससुर इस बात से खुश हुए और उन्होंने साले और उसकी बीवी को हमारे यहां रहने की पर्मिशन दे दी..
मेरा साला भी खुश था और सबसे ज्यादा खुश मैं और पुष्पा थे… फिर रोज मैं नयी नयी शराब की बोतल लेकर आता और खामोशी से उसमें नींद की गोलियां मिला देता….
मेरी बीवी सुधा और अभिजीत जैसे ही नींद के हवाले होते हम दोनों एक हो जाते… दिन बड़े ही कशिश वाले होते और रात बहुत ही हसीना,
उसके बाद 2 महीने लगभग हर रात मैं पुष्पा का रस पिता रहा और वो मेरा लंड चुसती रही.. हर रात कुछ ना कुछ नया सा हम
ट्राइ करते रहे वो पूरी शिद्दत से मुझसे चूड़ रही थी मैं भी बड़ी प्यार से उसे चोद रहा था… 3 र्ड महीने में जब उसकी मेंकसे नहीं आई
तो हम सभी बड़े ही खुश हो गये. और डॉक. के पास्स चेक आप के लिए गये तो पुष्पा पेट से थी…
मेरे सास ससुर तो मानो जैसे पागल हुए जा रहे थे इस बात को लेकर, मेरा साला भी बहुत ही खुश रहने लगा उनकी खुशी देखकर
सुधा मुझे बोली डार्लिंग तुम्हारे प्लेस चेंजिंग के आइडिया ने पुष्पा और अभिजीत के जिंदगी में एक बड़ा ही बदलाव लेकर उनको जिंदगी और शादी शुदा लाइफ का
सबसे बड़ा गिफ्ट दिया है… मेरी बीवी और साले के मन में मेरी इज्जत तरफ गयी और वो दोनों भी ये बात खुले आम कहने लगे,,
फिर एक दिन मैंने डिसाइड किया की अब ये सिलसिला बंद कर देना चाहिए और मैंने पुष्पा से कहा के अब तुम दोनों खुदके घर में रहोगे तो अच्छा होगा,
और अभिजीत और पुष्पा दूसरे ही दिन जाने के लिए रीडी हो गये.. फिर से उसी रात सेलेब्रेशन का माहौल बन गया..उसे रात सेलेब्रेशन ने फिर से हमको
नज़दीक आने का चान्स दिया लेकिन हम दोनों अब उदास थे क्योंकि पति पत्नी का जो नाता हम 2 महीने से निभा रहे थे वो अब रुकने वाला था…
और उसे रात हमने खूब जमकर सेक्स किया…..पुष्पा का जाने का मन नहीं था लेकिन मेरे समझाने के कारण वो मन गयी.. फिर सोचा क्या पता जिंदगी फिर कोन से मोड पे हमें पास ले आए..
अब मैं मेरी सुधा को पहले से भी ज्यादा प्यार करता हूँ और पुष्पा का ख्याल मेरे दिमाग में भी नहीं आता..
अभिजीत तो पुष्पा को पहले से कही बढ़कर प्यार करने लगा है क्योंकि उसकी वजह से तो वो बाप बन रहा है….
अब मैं ये सोचता हूँ की मेरे ससुराल के परिवार में मैंने इस कदर खुशी के रंग भर दिए है, लेकिन क्या ये पाप है या पुण्या.

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