सबने मिलकर रंडी की तरह चोदा

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दोस्तों ये कहानी तृषा की है जो मेरे पड़ोस में रहती थी | उसकी उम्र  सिर्फ़ 16 साल की, पर ना जाने क्यो उसकी छाती अपनी माँ से भी बड़ी थी. हर हफ्ते जब भी वो आईने के सामने खड़ी होती, अपना शर्ट उतारती, उसके मम्मे ब्रा की बॉर्डर के बाहर उभर आते. वो तय नही कर पा रही थी कि उसे अपने मम्मे पसंद थे या नही. कभी कभी, जब वो भीड़ में होती तो अंजान मर्द उसके मम्मे ज़ोर से दबाते और तृषा के पैरो के बीच उसकी जवान चूत भीग जाती. लेकिन जब वो कपड़े खरीदने जाती तो जो ड्रेस उसे पसंद आता उसके बटन बंद नही कर पाती थी, उसके मम्मे बटन को दोनो बाजू से खीच कर ड्रेस को तंग बना देते थे. उसका छोटा 5फ्ट 2 इंच का कद, उसका 26 इंच का नाज़ुक पेट, 38 इंच की कमर काफ़ी सेक्सी थी, पर उसके मम्मे 16 साल की उमर में ही 38 इंच के हो चुके थे. खैर, मेरी ही ग़लती है – तृषा ने सोचा.

2 साल पहले की बात है… तृषा को स्कूल में संगीत के प्राक्टिज़ के लिए जल्दी जाना था. वो सुबह 6 बजे की बस में जाने वाली थी, पर घर से निकलने में देर हो गयी. वो बस पकड़ने के लिए रास्ते में भाग रही थी. किस्मत से ड्राइवर ने बस को रोका और तृषा डबल डेककर के पहले माले पर बैठ गयी. इतनी जल्दी सुबह बस में दो लड़के थे, और कोई नही था. वो हाफ्ते हुए बस की पिछली सीट पर बैठ गयी. उनके चेहरों से लग रहा था कि वो लड़के 18-19 साल के थे. शायद वो कॉलेज जा रहे थे? वो दो लड़के अपने आप में बात कर रहे थे, पर जान बूझकर ज़ोर से बात कर रहे था, ताकि तृषा सुन सके. एक बोला – साली को देखा रास्ते पर भागते हुए? दूसरा बोला – क्या मम्मे हिल रहे थे ना? इतनी उमर में इतने बड़े बड़े कॅलिंगर?? साली चुदी हुई लगती हैं. फिर दोनो हस पड़े और बोले – चुदने में कितना मज़ा आता होगा ना? चूत में ठोकते ठोकते उसके गुब्बारो को दबा दबा के उसके निपल को ज़ोरो से खिचना चाहिए, जैसे हम तबेले में गाय को को देखते है न ऐसे. यह बोलके वो और भी ज़ोर से हस्ने लगे.

तृषा शर्मा रही थी पर उसे यह सुनके मज़ा भी आ रहा था. उसे आज तक किसी लड़के ने उसकी मर्ज़ी से नही छुआ था. हा,भीड़ में कभी कभी मर्द उसका फ़ायदा उठाते थे, उसके मम्मे और कमर को भोपु की तरह दबाते थे और गायब हो जाते थे. और तृषा के पूरे बदन में सेक्स चढ़ जाता था. पर लड़कियों के स्कूल में पढ़ने के कारण उसका कभी लड़कों से ऐसे पाला नही पड़ा था. उसकी तंग ब्रा में उसके निपल खड़े हो रहे थे और नर्म कपड़ो से गोटियों की तरह खिल रहे थे. तृषा ने अपने शर्ट में हाथ डालकर अपने निपल की चींटी काटी. उसी वक्त एक लड़का मुड़ा और मुस्काराया. तृषा घभरा गयी और तुरंत अपना हाथ शर्ट से निकल कर खिड़की के बाहर झाकने लगी. वो लड़का ज़ोर से बोला – बेबी, मदद चाहिए क्या?

तृषा हंस पड़ी और लड़के की नज़र से नज़र मिलाई, फिर नज़र झुकाई, और अपने दातों तले अपने निचले होन्ट को चबाया.

वो लड़का अब तृषा के बगल में बैठ गया और हाथ बढ़ाते बोला – अमर. तृषा ने हाथ मिलाया और अपने आप को इंट्रोड्यूस किया और बोली – और आपके दोस्त का नाम? अमर चिढ़ते हुए बोला – दोनो को लोगि क्या? आए आशीष सुना क्या? तेरे को भी पूछ रही है! आशीष हसा और अगली सीट पर मुड़कर बैठ गया, ताकि वो तृषा को देख सके. आशीष बोला – क्यो बेबी, दो दो चाहिए क्या? तृषा अब घबरा गयी. अमर ने तृषा की आँखों में घबराहट पढ़ी और अपना एक हाथ उसके पीठ पर रगड़ा और बोला – श्ह्ह…. घबराने की कोई बात नही. कभी किसी लड़के ने ऐसा नही किया क्या? यह कहते हुए अमर ने अपना दूसरा हाथ तृषा की छाती पर अच्छी तरह फिराया, ना तो बहुत ज़ोर से, ना तो बहुत नाज़ुक. तृषा बोली – हा, भीड़ में मर्द ने हाथ लगाया है, पर इस तरह नही. आशीष ने तृषा की एक चूची ज़ोर से दबाते दबाते बोला – अच्छा लगता है बेबी मरद जब चान्स मारते हैं?? तृषा शर्मा के मुस्कुराइ. अमर ने उसकी निपल खीची और हस्ते हस्ते बोला – बहुत शरमाती हो जानेमन. हम दोनो के सामने नंगी फूंगी खड़ी होके चूची हिला हिला के नचोगी तब भी शरमाओगी क्या? ह्म्म?? यह कहते हुए आशीष और अमर दोनो ने उसकी एक एक निपल को अपने हाथों में लिया और निपल के सहारे से उसके मम्मे को ढपाधप हिलाने लगे और गाना गाने लगे – तेरी चूत में लौड़ा दे के मूत मारू आह बेबी आह

तो ऐसे शुरू हुआ तृषा के मम्मो का रोज़ मालिश. वो अमर और आशीष को सुबह मिलती, और कभी कभी शाम को. कभी पार्क में एक कोने में माली की झोपड़ी के पीछे, दोनो उसका शर्ट खोलकर उसके मम्मो को अच्छी तरह दबाते, रगड़ते, किस करते, चूस्ते, काटते, खेलते – 2 साल तक चलता रहा यह खेल. 32 इंच की छाती अब 2 साल बाद 38 इंच की हो चुकी थी. उसका कप साइज़ सी से अब एफ तक पहुच चुका था. अब वह कॉलेज जाने लगी – उसी कॉलेज में जिसमे अमर और आशीष लगातार 4 साल तक फैल होते रहे थे. अब वह फाइनल में थे, और तृषा पहले साल में.

आज तो तृषा 16 साल की है. उसकी चूत अब तक कुँवारी है. हा, जब भी अमर और आशीष उसके मम्मों के साथ मस्ती करते है, तो उसकी चूत में से पानी छूटता है, पर इसके अलावा तृषा को तो यह भी नही मालूम कि लड़की और औरत के बीच अंतर क्या है. उसे तो यह भी नही मालूम कि चुदाई किसे कहते है. जब भी उसके दो दोस्त उसके बदन से खेलते तो उसे कहते – साली एक दिन ऐसे चुदवाउँगा की याद रखेगी. पर ना जाने क्यो तृषा ने उन्हे या किसी को भी नही पूछा कि इसका मतलब क्या हैं? दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

कॉलेज का पहला दिन… तृषा का दिल ज़ोर से धड़क रहा था. वो पहले कभी लड़कों के साथ एक ही क्लास में नही बैठी थी. आज उसका पहला दिन था. तृषा ने सोचा – क्या मुझे आशीष और अमर जैसे और दोस्त भी मिलेगे? क्या वो भी मेरी चूचियो के साथ ऐसे ही खेलेगे? कितनी नादान थी तृषा!! उसे क्या मालूम था कि अभी तो शुरुआत भी नही हुई थी – उसे क्या मालूम था कि सिर्फ़ दो महीनो में वो पूरी तरह रंडी बन जाएगी और उसके गांड का छेद उसके चूत के छेद से भी बड़ा हो जाएगा. अरे, उसे तो यह भी नही मालूम था कि चुदाई कहते किसे हैं! बस, 1 हफ़्ता और… उसे मालूम हो जाएगा की सेक्स सिर्फ़ मम्मो के साथ ख़तम नही होता. मम्मो की दबाई तो शुरुआत हैं उसके पूरे बदन की बर्बादी की.

अमर और आशीष प्रोफ.संजय बिलास की कॅबिन में बैठे थे. थे तो संजय साहब प्रोफेसर, पर असल में, कॉलेज के बाहर उनके कई तालुकात थे – बंबई के कई आलीशान कोठे उनकी मेहेरबानी से चलते थे. बंबई के अंडरवर्ल्ड और नेता सब संजय बिलास से ही नई लड़कियों की सप्लाइ लेते थे. इस सप्लाइ के बिज़्नेस में संजय ने काफ़ी करोड़ो रुपये कमाए थे, अलीबाग में बड़ा बांग्ला, बंबई में बड़ा घर, आलीशान गाड़ी… और हर रात नई लड़की. अमर और आशीष प्रोफ संजय के चहेते थे, और क्यों ना हो? ज़्यादातर लड़कियाँ भी तो वह ही लाते थे. लेकिन पिच्छले 2 सालों से कुँवारी लड़कियों की सप्लाइ बंद हो चुकी थी. जिसे भी अमर-आशीष लाते प्रोफेसर के पास, वो सारी की सारी पहले बर्बाद हो चुकी थी. संजय फिर भी उन लड़कियों को चोद्ता, अपने दोस्तों से बाट्ता, लेकिन नवेली लड़की के लिए उसका लंड बरसों से तरस रहा था.

सौ टक्का शुद्ध है लड़की – अमर बोला. संजय को यकीन नही हो रहा था!

छाती तो देखो उसकी? – संजय बोला – कैसे कह सकते हो किसी से चुदी नही हैं?

अरे सर, एक काम करो ना, उसको चख लो पहले, अगर चूत फूटकर खूनी नही हुई तो मत देना ना पैसे! हम कहा भागे जा रहे हैं? हम इस लड़की के साथ 2 साल से खेल रहे हैं सिर, सिर्फ़ मम्मो के साथ, ताकि उसे बेचने पर अच्छा माल मिल सके. छ्होटे मम्मे वाली लड़कियों की आजकल कहा इतनी कीमत मिलती हैं? 2 साल की मेहनत लगी हैं, सीने की मालिश, चुसाइ, दबाई करके अच्छी तरह से उसे बड़ा कर दिया हैं, और एक बार भी उसे नही चोदा – ना तो उसके मूह को ना ही चूत/गांड को.

संजय के लंड की टोपी अब गीली होने लगी. वो इस लड़की को इसी वक़्त चोदना चाहता था. उसने अपनी तिजोरी से अमर और आशीष को 20,000 दिए और बोला – बाकी के 80,000 तुम्हारी गॅरेंटी सही होने पर.

जैसे ही अमर-आशीष कमरे से बाहर आए, संजय ने अपने दोस्तों को फोन लगाया – यार, इस शनिवार को क्या कर रहे हो? बंगले पर आना है क्या? कुँवारा माल मिला हैं. एक लाख का दाम हैं. सब मिलकर बाटेंगे तो अच्छा रहेगा… पता नही, सबको फोन लगा रहा हू. 10 जन तैयार हुए तो सिर्फ़ 10,000 में कुँवारी मिलेगी. संजय का दोस्त बोला – नही, यह तो बहुत महेंगा दाम हैं. मेरा बजेट सिर्फ़ 5,000 तक ही हैं. संजय बोला – यकीन कर उमेश, ऐसा माल बार बार नही आता. और सुन, लड़की पूरी बेख़बर हैं. चौड़े का मतलब भी नही मालूम उसे. हम सबको मिलके उसे सिखाना हैं.

उमेश का लौड़ा यह सुनकर खड़ा हो गया और वो बोला, ठीक हैं. मैं 20,000 देने तो तैयार हूँ, अगर उसकी पहले मैं मारू तो.
संजय हंसा और बोला – अरे पागल हो गया है क्या तू? कुँवारी हैं लड़की, तो पहले छोटा लौड़ा जाना चाहिए अंदर, वरना फॅट जाएगी.
उमेश अपने 10 इंच लंबे और 3 इंच मोटे लंड पर हाथ रगड़ते बोला – 25,000. बोल, मंजूर हैं?
साला बेहोश कर देगा लड़की को – संजय बोला और वह दोनो हंस पड़े, और अपने अपने लौड़ों को बेताबी से मसल्ने लगे… शनिवार के इंतेज़ार में.

तृषा आशीष और अमर के साथ नॅशनल पार्क के एक शांत कोने मैं बैठी थी. अमर बोला – शनिवार को क्या कर रही हो जानेमन?
तृषा: कुछ नही, जन्म दिन है मेरा, तो सोच रही थी कि सहेलियों के साथ पिक्चर देखने जाऊं.
आशीष: अच्छा, अब कॉलेज में सहेलियाँ बन गयी तो अपने यारों को भूल गयी क्या?
तृषा: नही नही, कहो आप – आपने कुछ सोच रखा हैं क्या उस दिन के लिए?
अमर ने आशीष को आँख मारी और दोनो अपनी गंदी नज़रों से तृषा के बदन को देखकर मुस्कुराए.
आशीष बोला: अपनी 17 साल की सालगिरह सिर्फ़ पिक्चर देखकर मनाओगी?? छ्ही!! हमने तो सोचा तृषा अब बड़ी हो गयी हैं, तो कुछ औरतों वाली बात करेगी.
तृषा: उम्म्म्म.. क्या मतलब?
अमर: अरे आशीष, क्या पहेलियों में बात कर रहा हैं यार?? अपनी ही तृषा हैं दोस्त, समझा उसको अपना क्या प्रोग्राम था… ऐसा कहते हुए अमर ने अपने दोनो हाथ तृषा की ब्रा के अंदर डाल दिए और उसे गोद में बिठा दिया.

जैसे ही अमर ने तृषा की चुचियों की मालिश शुरू की, तृषा की चूत गीली होने लगी. आशीष झुका और अपने हाथ तृषा की चड्डी में डाल दिए. तृषा को अचंभा हुआ – उन दोनो ने 2 सालो में ऐसा कभी नही किया था. वह डर गयी, सोचने लगी – हाय, अब क्या होगा?? अगर आशीष को पता चला कि मेरे पैरों के बीच की जगह चिकनी और गीली होती हैं तो वो क्या सोचेगा?? उसे क्या मालूम था कि हर लड़की के साथ ऐसा होता हैं! आज तक वो सोचती थी कि सिर्फ़ उसके साथ ऐसा होता हैं! आशीष ने अपनी उंगिल्या अच्छी तरह तृषा की कुँवारी चूत में हर कोनो में फिराई – तृषा एक नाज़ुक तितली की तरह हड़बड़ाने लगी; अमर ने उसके मम्मो को ज़ोर से दबाया और उसे हिलने नही दिया. तृषा के मूह से कराह निकलने लगी. कुछ देर बाद आशीष ने अपना हाथ निकाला और अपनी उंगलिया तृषा की नज़रों के सामने फैलाई – तृषा ने देखा की एक अनोखा सा रस आशीष की उंगलियों पर फैला हुआ था. वो शरमाई, उसे लगा की यह रस पेशाब हैं. दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

सॉरी! तृषा बोली.
आशीष और अमर समझ गये कि तृषा चालू लड़की थी, लेकिन नादान भी थी. उसे यह भी नही मालूम था कि वह पानी सेक्स का पानी था, पेशाब नही. आशीष हंसा, और बोला…
अरे यार, पता हैं यह क्या हैं??
तृषा की नज़रें गिरी हुई थी – नही, वो बोली.
अमर: जब पैरों के बीच ऐसा घड़ा रस आता हैं उसका मतलब तुम्हारा बदन तुमसे कुछ कह रहा हैं.
तृषा की नज़र उठी और बोली – क्या कह रहा है?

आशीष ने उसके चेहरे पर अपनी रस भारी उंगलिया फैलाई और बोला – तुम्हारा बदन कह रहा है कि अब वो तयार हैं, वो तुमसे कह रहा हैं कि अब मुझे औरत बनना हैं.

तृषा को यह कुछ भी समझ नही आ रहा था. आशीष और अमर उसे सब कुछ बताना नही चाहते थे, उनका प्रोफ के साथ कांट्रॅक्ट था कि वह तृषा को बिल्कुल नादान रखेगे. पर उसे कुछ ना कुछ तो बताना होगा ना… शनिवार को उसके साथ क्या होगा उसके कुछ तो अंदाज़ा देना होगा ना??

अमर बोला: अच्छा, यह बताओ (उसने तृषा का शर्ट उतार दिया, और ब्रा को खोले बिना ही उसके मम्मे उपर से खींच कर बाहर निकाले, ताकि वह और भी गोल, और भी कड़क, और भी चुस्साकाड़ लग रहे थे)…. जब में ऐसे करता हू (अमर ने उसके दोनो निपल को एक साथ मूह में लिया और उसे चूसने लगा)… तो तुम्हे अच्छा लगता हैं ना?
तृषा दर्द से चीखी!! अमर और आशीष की आदत थी यह, कभी कभी दोनो निपल को साथ में ही मूह मे लेके दातों के बीच चबा के बहुत देर तक चूस्ते. एक ख़तम होता तो दूसरा शुरू होता. उसे यह बहुत पसंद था, पर बहुत दर्द भी होता था.
आशीष बोला: दर्द होता हैं तो अच्छा लगता हैं ना?

तृषा बोली: हां, बहुत अच्छा लगता हैं, पर पता नही क्यों?

अब आशीष ने दोनो निपल मूह मे लिए और चू चू की आवाज़ करके चूसने लगा, जैसे उसके बड़े बड़े मम्मे दूध से भरे थे और आशीष सालों से प्यासा था.

अमर बोला: अब अगर सिर्फ़ हम दोनो ही नही, अगर…. उम्म्म… ऐसा मानो की….अगर

आशीष ने उसके मॅमन को मूह से बाहर निकाला और ज़ोर से निपल पर चटा मारा…

आशीष बोला: अगर हम कुछ और दोस्तों को लेकर तुम्हारे जनमदिन पर आए और वो भी तुम्हारे बदन को इस तरह से खेले तो तुम्हे अच्छा लगेगा क्या बेबी?

आशीष ने उसके मूह की बात छ्चीन ली थी! तृषा ने तो यह कितनी बार सोचा था कि एक बार कॉलेज में आ जाए तो शायद उसे और दोस्त मिले और शायद वो भी उसके बदन को सहलाए.

तृषा शर्माके बोली – हां.

तृषा की चुसक्कड़ चुचियाँ –2

आशीष और अमर का लौड़ा और भी बड़ा हो गया यह सुनके. तृषा चालू तो थी, यह उन्हे पता था, पर अब तो उसमे एक बेहतरीन रंडी के सारे लक्षण दिखाई दे रहे थे.

आशीष ने तृषा की चड्डी उतार दी और अमर ने तृषा की चूत की गोटी पे धीरे धीरे उंगली फिराना शुरू किया. फिर अमर ने उसे अपने कंधों पर उठाया और आशीष की जीप की पिच्छली सीट पर बिठा दिया. जीप के काँच काले थे, इस वजह से अगर कोई आस पास भी आए तो जीप के अंदर ऐसी कमसिन रंडी को नही देख सकते थे. अमर ने तृषा का शर्ट उतार दिया और उसकी ब्रा का बटन खोल दिया. आशीष ने उसका स्कर्ट उतार दिया. तृषा को अब बहुत शर्म आने लगी. 2 साल में उसे अपने मम्मे नंगे दिखाने की आदत हो चुकी थी, पर ऐसे कभी वो किसी भी मर्द के सामने नंगी नही हुई थी. उसके ध्यान में आया, जब वह अमर और आशीष को पहली बार बस में मिली थी, तो एक ने बोला था, हमारे सामने नंगी होके मम्मे हिलाकर नचोगी तब भी शरमाओगी क्या? और अब…. 2 सालों बाद, वो उन दोनो के सामने नंगी बैठी थी. दोनो ने उसके एक एक पैर को लिया और फैलाया और उसकी चूत को देखा. तृषा की आँखें बंद थी… उसे बहुत शर्म आ रही थी. उसकी चूत की गोटी में नये नये अरमान उठ रहे थे. अमर और आशीष की उंगलिया उसकी चूत के साथ खेल रही थी और उसकी चूत से लगातार रस की बारिश हुई जा रही थी.

साली को चोदने का इतना मन कर रहा है ना – आशीष बोला.

सब्र कर यार, पूछ्ते हैं ना संजय सर को अगर हम शनिवार को आ सके – अमर बोला.

आशीष: उम्म… उसका मतलब… मतलब…

अमर: अरे बेबी, उसका मतलब तुम्हे लड़की से औरत बनाना.

तृषा को समझ नही आ रही थी यह बात: ऐसा कैसे होता है?

आशीष बोला: हर लड़की के 17वे जनमदिन पर कुछ लड़की मिलके उसे औरत बनाते हैं.

तृषा को अचंभा हुआ: हर लड़की ऐसा करती है??

अमर: हर लड़की नही, पर तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की तो ज़रूर ऐसे करती है. वरना लड़की होने का फयडा क्या होता हैं? हम तुम्हारे साथ खेलते हैं तो अच्छा लगता हैं ना? अब सोचो, हमारे सब दोस्त मिलकर तुम्हारे साथ खेले तो और कितना मज़ा आएगा? अब और कोई सवाल नही जानेमन… कुछ सवाल अपने जनमदिन के लिए भी तो रखो! हम सब मिलकर तुम्हे समझा देगे!

ऐसा कहते हुए अमर और आशीष ने अपनी जीभ अपने होटो पे सहलाई और तृषा के मम्मो को फिर से रगड़ रगड़ के उसके चूत से पानी च्छुतवया.

अब तृषा शनिवार का बेसब्री से इंतेज़ार कर रही थी.

शनिवार के दिन तृषा अमर के घर आई.

आशीष और अमर ने उसके लिए कपड़े भी ला रखे थे. ब्रा – उसके साइज़ से 3 साइज़ छ्होटी, उसके मम्मे आधे से भी ज़्यादा उपर से निकल आ रहे थे. शर्ट – फिर से उसके साइज़ से 2 साइज़ छ्होटी, और बटन तो उसकी नाभि से शुरू होते थे. पूरे शर्ट में सिर्फ़ 3 बटन, उपर कोई भी बटन ना था. तृषा ने ऐसा शर्ट पहले कभी नही पहना था. उसकी छाती और भी बड़ी लग रही थी, ऐसा लग रहा था की उसके मम्मे उसके शर्ट और ब्रा से लड़ाई कर रहे थे. एक छ्होटी सी चड्डी भी दी अमर और आशीष ने, पर आगे और पीछे का कपड़ा इतना तंग था के ना पूच्छो! तृषा ने सोचा, अरे चड्डी पहनने का तो क्या मतलब हुआ जब सब कुछ तो दिख रहा है. पीछे कपड़े के नाम पर सिर्फ़ एक पट्टी थी, और वह पट्टी उसके दो गंद के गालों के बीच घुसी जा रही थी. आगे के कपड़े से आर पार सब कुछ दिख रहा था – उसकी चूत के होन्ट, उसके होटो के बीच में से निकलती हुई उसकी गोटी – सब कुछ दिख रहा था! अब उसने स्कर्ट पहना – स्कर्ट था या बहुत बड़ा बेल्ट? मुश्किल से 6 इंच लंबा! अगर वो ज़रा भी मूडी तो उसकी जवानी सब देख सकेगे! उसे शर्म भी आ रही थी और मज़ा भी आ रहा था. दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

प्रोफ संजय ने अपनी आलीशान जीप और ड्राइवर भेजे, तृषा जीप में चढ़ रही थी और उसकी गांड पूरी तरह से दिख रही थी. जैसे ही वो सीट में बैठी, उसके पैरो के बीच उसकी चूत दिखने लगी.

‘सब लोग आ गये क्या?’, अमर ने ड्राइवर को पूछा.

ड्राइवर मुस्काराया, उसके लिए यह नयी बात नही थी, पर आज तक जितनी लड़कियों को संजय सर चोद कर बाँट चुके थे, उनमे से तृषा सबसे कमसिन और खूबसूरत थी. उसे देखखार ड्राइवर की लौड़ा भी खड़ा हो गया.

‘हां, 11 दोस्त, सब पार्टी मना रहे है’, ड्राइवर ने अपना आईना तृषा की तरफ मोड़ा और उसे आँख मारी.

11 लोग सुनके अमर और आशीष को अचंभा हुआ. सर ने तो कहा था कि सिर्फ़ 3 लोग होगे, आशीष बोला. तृषा की 11 लोगो से मिलकर चुदाई होगी इस ख़याल से दोनों के बदन में सेक्स चढ़ गया.

‘पहली बार है’, अमर ने ड्राइवर से कहा. और सब ज़ोर ज़ोर से हस्ने लगे.

ड्राइवर बोला – ‘हट चूतिया, काश में भी आ सकता, पहली बार में 11 को कभी नही देखा. कुछ लोगो की क्या किस्मत होती हैं!’

तृषा डर के मारे कुछ बोल नही पा रही थी. उसके मॅन तरह तरह की तस्वीरें बना रहा था, 11 मर्दों के सामने नाचना, 11 मर्दो के हाथ उसके बदन पे, 11 मर्द उसकी निपल की चींटी काटेगे… वो खुली आँखों से सपने देख रही थी.

उसी वक्त ड्राइवर ने दरवाज़ा खोला और बोला, चलो बेबी, जनमदिन मुबारक हो…

ऐसा कहते हुए उसने अपना हाथ तृषा की चूत पे फिराया. जब उसने हाथ बाहर निकाला तो उसकी उंगलिया चिकनी और गीली हो गयी थी. तृषा शरमाई… उसकी दिल तेज़ी से धड़क रहा था.

ड्राइवर हंसा और आशीष & अमर को बोला – कुछ मदद की ज़रूरत हो तो फोन करना.

आशीष बोला- तब तो और भी मज़ा आएगा, 14 जन से चौड़ा!!! हम कोशिश करेगे.

णीश ने फिर उनसे पूछा – चौड़ा मतलब??

अमर अपने हाथ तृषा के भारी गोल चुसक्कड़ कॅलिंगरों पर फिराते हुए बोला – वो तो तुम्हे प्रोफेसर साहब समझाएगे.

जब वो तीनो बंगले में आए तो सब लोग शराब पी रहे थे. रूम के एक कोने में बहुत बड़ा टीवी था जिसमे कुछ अँग्रेज़ मर्द एक लड़की का नाच देख रहे थे और वह लड़की धीरे धीरे हर मर्द के पास जाके अपने गोल मम्मे उनके मूह पे हिला रही थी और मर्द के हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे. तृषा की चूत यह देख कर और भी गीली हो गयी.

सर – अमर ने संजय को आवाज़ दी.

सब लोग तृषा की तरफ मुड़े और धरे के धरे रह गये. वो अपनी तस्वीर से कही ज़्यादा खूबसूरत और जवान लग रही थी. उसके कपड़े देख कर कोई भी उसके नंगे बदन का पूरी तरह से अंदाज़ा लगा सकता था. शर्ट से उसके बड़े कड़क काले निपल उभर रहे थे. वह शर्मा रही थी और बार बार अपने स्कर्ट को नीचे सरकाने की कोशिश कर रही थी ताकि उसकी चूत कोई देख ना सके, पर स्कर्ट इतना टाइट था कि उसकी मेहनत बेकार थी.

प्रोफ संजय ने तृषा को बुलाया – आओ बेबी, शरमाती क्यो हो? ऐसा कहते कहते उसने तृषा को अपनी गोद में बिठा दिया. संजय का लौड़ा पूरी तरह से सख़्त हो गया था और जैसे ही तृषा उसकी गोद में बैठी, उसके लौड़ा तृषा की गांड पे दब रहा था. संजय के सारे दोस्त तृषा की जवान कमसिन चूत देख रहे थे. संजय ने अपने सब दोस्तों को बारी बारी इंट्रोड्यूस किया… हर मर्द तृषा के पास आता, और उसके बदन पे हाथ फिराता, कोई उसकी कमर या छाती पर चटा मारता, कोई अपने हाथों से उसके दो गालों को दबाता और अपना दूसरा हाथ उसके स्कर्ट में डालता. एग्ज़िबिशन की पुतले की तरह हर ग्राहक ने तृषा को परखा. संजय ने इशारे से अमर और आशीष को बाहर भेज दिया… अब बारी थी उमेश की.

उमेश कम से कम 46 साल का था, 6.4 फुट लंबा भारी कद, सफेद कुर्ता पिजामा, सोने की चैन, मूह में सिगरेट लिए उमेश तृषा के नज़दीक आया. तृषा घभरा गयी. उसने नज़रें चुराई और टीवी की तरफ देखने लगी. पिक्चर में अब सब मर्द नंगे हो चुके थे. तृषा डर के मारे काप रही थी. किसी ने तृषा को एक ग्लास थमाया और बोला – दवाई पियो. तृषा बोली – क्या है इसमे? उमेश बोला – जादू की दवाई है, चुप चाप पी लो. तृषा को उमेश से बहुत डर लग रहा था, वो बिना कुछ कहे शराब पी गयी. उसके बदन में गर्मी चढ़ गयी. अब उमेश ने उसके शर्ट के बटन को खोला और उसके मम्मो को हर जगह से दबाने लगे, परखने लगा… ‘ह्म्‍म्म… बहुत मज़ा किया हैं इसके साथ?’, ऐसा कहते हुए उसने एक एक चून्चि को ब्रा के कप के बाहर उठाया. दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

सब मर्द अब तृषा को लगातार देख रहे थे और अपनी पॅंट में अपने लॉड को सहला रहे थे. लॉलिपोप खओगि? उमेश ने तृषा को पूछा. तृषा को अचंभा हुआ, उसने स्कूल के बाद कभी लॉलिपोप नही खाई थी. ‘नहीं, अब मैं स्कूल में नही हू!’ तृषा बोली. यह सुनकर सब मर्द ज़ोर ज़ोर से हंस पड़े, एक ने तृषा का स्कर्ट उतार दिया, और दूसरे ने तृषा की ब्रा खोल दी. अब तृषा सिर्फ़ उस छ्होटी चड्डी में 11 मर्दों से सामने चुदान रंडी की तरह खड़ी थी.

मतलब – तृषा समझ नही पा रही थी.

मर्दो की लॉलिपोप, ऐसा कहते उमेश ने तृषा को टीवी दिखाया. वह अँग्रेज़ लड़की अपने घुटनों के तले ज़मीन पर थी और एक के बाद एक मर्द उनका लौड़ा उसके मूह में धकेल रहे थे. तृषा धरी की धरी रह गयी, वो अपने नज़रें टीवी से हटा नही पा रही थी! उमेश ने उसके कंधो से उसे ज़मीन पर धकेला और अपनी पॅंट से अपना 9इंच क्ष 3इंच का लंबा तगड़ा मोटा लौड़ा तृषा के होटो पे फिराया.

‘मूह खोल छीनाल’, उमेश बोला. तृषा के पास कोई चारा नही था. उसने मूह खोला. ‘और ज़्यादा’, उमेश बोला. तृषा ने मूह और ज़्यादा खोला. उमेश ने उसके मम्मों पे ज़ोरदार चटा मारा. ‘और ज़्यादा रांड़’. जैसे ही तृषा ने अपना मूह पूरी तरह खोला, उमेश ने अपने लौड़ा उसके छोटे नादान मूह में ख़ुसेड दिया. तृषा ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी पर उमेश नही रुका. वह तृषा के चेहरे को पकड़ कर उसके मूह को ज़ोरो से चोदने लगा. अब तृषा को चारों ओर से सभी ने घेर लिया, और अपना लौड़ा हिलाते हिलाते तृषा के बदन पे मारने लगे. कोई उसके बालों को खींच कर उसे अपने लौड़ा चुस्वाता, तो कोई उसके हाथ को लेकेर ज़बरदस्ती अपने लॉड की मालिश करता. जहा भी तृषा देखती, सब नंगे मर्द अपना लौड़ा उसके मूह के सामने हिलाते. एक मिनिट के लिए भी तृषा का मूह खाली नही रहा. उसके मूह से लगातार थूंक की लंबी लहरे टपक रही थी, उसके आँखों से पानी बरस रहा था, पर कोई भी मर्द रुकने का नाम नही ले रहा था.

ऐसे ही सभी ने तृषा के मूह को चोदा.. बार बार, तकरीबन एक घंटे तक. तृषा थक चुकी थी… उसे अमर और आशीष कही भी नही दिखाई दे रहे थे. उसके मम्मों को हर मर्द चूस रहे थे, काट रहे थे, चॅटा मार रहे थे… उसके निपल की ज़ोरो से चींटी काट रहे थे, और मूह की चुदाई रुकने ना नाम नही ले रही थी. दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

अब उमेश ने उसे सोफे पे लिटाया और उसके पैरो को अलग किया. उसकी चूत अभी तक चिकनी थी. लाइट मे उसकी चूत चमक रही थी, और उसकी गोटी सूज कर बाहर झाक रही थी.

उमेश ने अपनी उंगलियों से तृषा की चूत के होंठ खोले और उसके छेद को परखा… इतना छोटा छेद उमेश ने कई बरसों में नही देखा था. कई लोग अपने फोन से तृषा की चूत के छेद की तस्वीर खींच रहे थे. यह देखकर वो शर्म के मारे लाल हुई जा रही थी और अपने हाथों से अपने मम्मों को च्छुपाने की कोशिश करने लगी. किसी ने उसके हाथों को पकड़ के बाँध लिया.

उमेश तृषा के पैरों के बींच अपना लंबा, मोटा, तगड़ा, लाल, सूजा हुआ डंडा हाथों में लिए उसकी गोटी पर मार रहा था.

अब यह लौड़ा इसके अंदर जाएगा, उमेश बोला. सिर्फ़ मेरा ही नही, सब का… तृषा की आँखों में डर भर गया.

दोस्तो उसके बाद तो तृषा को जबरदस्ती सबने मिलकर एक रंडी की तरह चोदा |

दोस्तों कैसे लगी मेरी कहानी बताना ना भूले फिर जल्द ही एक और मस्त कहानी के साथ मुलाकात होगी तब तक पढ़ते रहिये मस्ताराम.नेट और मुठ मारते रहिये और हमारी बहने अपनी चूत में अंगुली डाल कर हिलाती रहे |

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5 Comments
  1. June 13, 2017 | Reply
    • June 18, 2017 | Reply
      • Rk kaushik
        June 22, 2017 | Reply
  2. June 13, 2017 | Reply
  3. anil jaat
    June 22, 2017 | Reply

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