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शर्दी की रात में सेक्स

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“ठंडी अभी ना पड़ेगी तो कब पड़ेगी…और तू रजाई सही लेता क्यूँ नहीं..मुझे सब पता हैं तू रात को देर से सिगारेट पिने के लिए ही बहार खुलें में सोता है. तुझे सर्दी लग जाएगी तो फिर ना कहेना….” दीदी बोलती गई और मैं एक कान से सुन के दुसरे से निकालता गया, अरे अब मैं 20 का हो चूका था और सिगारेट वाली बात उसकी सही थी लेकिन मेरे बहार सोने की वजह कुछ और थी. एक देसी लड़की भावना से मेरा सेटिंग हुआ था और आइडिया से आइडिया फ्री करवा के उसके साथ रोज रात को मैं देर तक बाते करता रहेता था. मुझे इस देसी लड़की की चूत लेनी थी मगर मौका नहीं मिल रहा था क्यूंकि इसका भाई को पता चल गया था और वह उस पर नजर रख्खे हुए था. मैं इस देसी लड़की के साथ फोन पर ही सेक्स कर के मुठ मार लेता था और वो फोन सेक्स करवा मुझे आनंदित कर देती थी. लेकिन आज कुछ और ही हुआ, आज भावना से बात करते करते मुझे एक और देसी लड़की गायत्री की चुदाई का मौका मिल गया. गायत्री दीदी की पड़ोसन थी और उसका फिगर होगा कुछ 34-30-36. वैसे वह मुझ से ज्यादा बात नहीं करती थी लेकिन आज मैंने उसे रात के दो बजे घर के बहार देंखा.

मुझ से रहा नहीं गया और मैं उसके पास गया, “अरे गायत्री इतनी रात को यहाँ क्यों बैठी हो.”

गायत्री, “दीपू मेरे मम्मी डेडी इंदोर गए है घर मे मैं और दादी है लेकिन मुझे घर में डर लग रहा है. दादी को उठाया लेकिन वह को घोड़े बेच के सोयी है. इसलिए मैं यहाँ आके बैठ गयी हूँ.”

मैंने कहा, “यहाँ जमीन पर बैठने से अच्छा है तूम मेरी खटिया पर आ जाओ. मैं वैसे भी अभी नहीं सोऊंगा. मुझे अपनी गर्लफ्रेंड से बात करनी है…”

गायत्री मेरी चारपाई पर आ गई और मैंने उसे ठंड से बचने के लिए मोटी चद्दर दे दी. मैंने तकिये के निचे छुपाई सिगारेट निकाली और भावना को फोन लगाया. भावना फोन सेक्स के लिए तैयार बैठी थी और जैसे ही उसने फोन उठाया वोह बोली, “अरे कहा चले गए थे मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए बेताब बनी हुई थी….!” गायत्री फोन से बहार आ रहा आवाज सुन गई और उस से हँसी रोकी नहीं गई. देसी लड़की भावना ने राज खोल ही दिया मेरा. मेरा मन अब भावना से बातों में नहीं लग रहा था क्यूंकि जब गायत्री हंसी मुझे लगा की उसे चोदने का मौका आज मिल सकता है मुझे. हम, तूम और तन्हाई ऐसा ही कुछ सिन था ना. मैंने भावना को इधर उधर समझा के फोन रख्खा. मेरी सिगारेट भी ख़तम हो चुकी थी. गायत्री मेरे तरफ देख के बोली, “गर्लफ्रेंड है आप की….?”

मैने कहा, “हाँ भी और नहीं भी…खर्चे करवाने में हाँ और काम के लिए नहीं……!”

देसी लड़की गायत्री और एक बार हंस पड़ी. मैंने करीब से उसके देसी सेक्सी स्तन देंखे. मस्त बड़े बड़े स्तन थे और यह 18-19 की ही होगी अभी तो. चुदाई के लिए बिलकुल सही उम्र होती है यह लड़कियों के लिए क्यूंकि यह उम्र में ही उनके सभी सेक्स होर्मोन और ओर्गन फुल्ली डेवेलोप हुए होते है और वह चुदाई का अनुभव करना चाहती है. मैंने गायत्री के चुन्चो से नजर हटाये बिना ही उसे पूछा, “तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है…वैसे तूम हो बड़ी खुबसूरत इसलिए एकाद तो होगा ही.”

गायत्री बोली, “था एक शंभू लेकिन मेरे कजिन राहुल ने उसे मार मार के सीधा कर दिया”

मैंने इस देसी लड़की की गांड और बाकी के शरीर पर नजर डालते हुए कहा, “कहाँ तक पहंचे थे तूम लोग रिश्तें में”

गायत्री,”सोरी…मैं कुछ समझी नहीं”

मैंने बेझिझक उसे कहा, “सेक्स करते थे तूम दोनों?”

गायत्री हंसी और बोली, “उसी रात का प्लानिंग था जिस रात राहुल भैया ने उसकी पिटाई कर दी, लेकिन साला डरपोक निकला मैंने उसे फोन किया इसके बाद तो उसके कभी रिसीव ही नहीं किया”

गायत्री की जवानी और उसकी बातें सुनके मेरा लंड खड़ा हो चूका था, वैसे मैंने कभी सोचा नहीं था की वो इतनी बिंदास्त बातें कर लेती है. मुझे पूरा यकीन था अगर सही गियर दबाता गया तो आज चुदाई का बंदोबस्त जरुर हो जाएगा. मैंने गायत्री को कहा, “तूम सेक्सी लगती हो यार, तुम्हे कोई भी मिल जाएगा…साला एक हमारी किस्मत फूटी है की गर्लफ्रेंड है लेकिन कुछ मजे नहीं करवा रही”

गायत्री बोली, “वो फोन पे तो चुदाई की बातें कर रही थी.”

मैंने कहा, “फोन पे ही सब कुछ हो रहा है, मैं रोज रात को दिल को समझा के सोता हूँ”

गायत्री की नजर मेरे लंड की तरफ पड़ी, और शायद यह देसी लड़की समझ गयी थी की मेरा लंड पेंट के अंदर खड़ा हो चूका था. मैंने गायत्री का हाथ अपने हाथ में लेके उसे अपनी छाती पर रख के कहाँ देखो, “हैं ना फ़ास्ट फ़ास्ट धडकने”

गायत्रींने हाथ हटाया नहीं और मैंने धीमे से उसका हाथ इस तरह निचे किया के जाते जाते वह मेरे लंड से घिस के जाएँ. मेरा लंड उसके हाथ को छूते ही गायत्री को भी मेरी गर्मी का अहेसास हुआ. वोह उठ के जाने की चेष्टा में थी तभी मैंने उसे वेधक सवाल किया, “क्या हम दोनों एक दुसरे की मदद नहीं कर सकते? तुम्हे मुझ से कोई खतरा नहीं होगा…!”

गायत्री उठ के जाने वाली थी लेकिन मैंने उसका हाथ पकड के चारपाई मैं खिंच लिया और उसके होंठ से अपने होंठ चिपका दिए. पहले थोडा एक्टिंग की लेकिन फिर यह देसी लड़की मेरे होंठो से अपने होंठ लगा के चूसने लगी. मैंने चद्दर को झटका और गायत्री को अंदर ले लिया मैं भी अंदर आ गया. मेरा लंड कब का खड़ा था इसलिए मैंने अपनी पेंट अंदर उतार दी और गायत्री के बूब्स दबाने लगा. गायत्री उह आह आह ओह करती रही और मैंने उसे सम्पूर्ण नग्न कर दिया. गायत्री की चूत मस्त साफ़ थी, दिखी तो नहीं लेकिन कपडे उतारते वक्त मेरे हाथ उसकी चूत पर गए थे और मुझे एक मस्त मुलायम चूत का स्पर्श हुआ था.

मैं अब गायत्री की चूत को चुसना और चाटना चाहता था इसलिए मैंने 69 की पोजीशन बना के उसकी चूत की तरफ अपना मुहं ले गया. गायत्री की चूट के उपर होंठ लगाते ही वोह आह आह ओह करने लगी और मैंने धीरे से उसको जीभ चूत के अंदर तक दे दी. वोह मेरा लंड पकड के हिला रही थी, मैंने उसे कहाँ,

“ले लो मुहं में मेरी जान..मुझे भरोसा है की तुम्हे बहुत मजा आएगा….!”

गायत्री लंड को मुहं में चलाने लगी और मैं और भी जोर से उसकी चूत को चूसने लगा. कुछ 5 मिनिट तक हम एक दुसरे के सेक्स अंग चूसते रहे और मैं अगर गायत्री और चुस्ती तो झड ही जाता इसलिए मैंने लंड उसके मुहं से निकाला और उसके पेरेलल सो गया. उसका एक पाँव उठा के मैंने अपने झांघ पर रख दिया. उसकी चूत कुछ खुल गई और मैंने उसकी चूत के अंदर दो ऊँगली डाल के मस्त हिलाना चालू कर दी. इसके दो फायदे थे पहला यह की गायत्री की चूत की उत्तेजना बढ़ती और वह खुल भी जाती…और दूसरा यह की मेरा लंड जो उत्तेजना के चरम सीमा पर खड़ा था वो शांत हो जाता. गायत्री से अब रहा नहीं जा रहा था, वो मेरे कंधे पे दांत से काटने लगी और अपने नाख़ून मुझे गडाने लगी और बोली…..”दे दो मुझे लंड दे दो, मेरी चूत बहुत खुजली कर रही है..इसकी मस्त चुदाई कर के उसकी सारी खुजली मिटा दो…जल्दी आह आह आह्ह्ह्ह….!’

मैंने अब लंड को चूत के छेद पर रख दिया और धीमे धीमे चूत के अंदर डालने लगा. गायत्री वर्जिन थी इसलिए उसकी चूत बहुत ही टाईट थी. मैं लंड इस देसी लड़की की चूत में आराम आराम से घुसेड़ना चालू किया, फिर भी गायत्री को दर्द हो रहा था और वह वहीँ दबे आवाज में मुझे धीरे से करने को कहने लगी. मैंने धीमे धीमे कर के आधा लंड इस देसी लड़की की चूत में दे दिया था और उस से बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैंने कुछ 3-4 मिनिट धीमे धीमे कर के पूरा लंड गायत्री की चूत में घुसेड दिया. उसकी साँसे फुल गई और उसे ठंडी में भी पसीना होने लगा था. मैंने अब लंड के झटके देने चालू कर दिए और गायत्री की चीखे बढ़ने लगी. मेरे लंड के उपर भी इस देसी लड़की की वर्जिन चूत की सख्ताई का दबाव था इसलिए मैं भी तुरंत इस चूत के अंदर झड गया. लेकिन इस रात में मैंने सुबह 4 बजे तक गायत्री को दुबारा एक बार लंड चूत के अंदर दे दिया और तब तो मैं इस देसी लड़की को 20 मिनिट तक चोद दिया था….मैंने यह फैसला भी कर लिया था की भावना के बदले अब मेरी बाइक में गायत्री बैठेगी….!

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