रेलगाड़ी में पेलम पेल

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नमस्कार दोस्तों…

आज मैं आपको एक कुंवारी लड़की की कहानी सुनाने जा रहा हूँ और उम्मीद करूँगा की आपको खूब पसंद आएगी.

यह कहानी, मंजू नाम की लड़की की है जिसकी चुदाई मैंने रेलगाडी में की थी और मेरी उससे मेरी मुलाकात भी रेलगाड़ी में ही हुई थी.

मैं अपने शहर से गॉव जा रहा था..

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

रेलगाड़ी के १ नंबर के ए.सी वाले डब्बे में बैठा था, जहाँ अच्छे खासे परदे भी होते हैं..

वहीँ, मेरे बाजु वाली सीट पर मंजू भी बैठी थी.. कुछ दूर के सफर पर हमारी अच्छी खासी दोस्ती भी हो गयी क्यूंकि उस अकेलेपन में तो बस कोई ना कोई बात करके वक्त गुज़ारने को चाहिए होता है..

मेरी उससे खूब बन रही थी, तभी मैंने कुछ और सफर में उसकी असली नियत की पहचान की.

कुछ समय बाद, जब मंजू शौचालय गयी तो मैंने उसे खुल्ले बैग को खखोला जिसमें नंगे – नंगे लड़कों की कीताबें देखी और समझ गया की यह मंजू साली टेढ़े किस्म की लड़की है और मुझे यह भी शक़ हो गया की इसके ऐसे स्वभाव से यह कुंवारी भी नहीं होगी.

कुछ देर बाद, जब मंजू अपने वस्त्र बदल कर आई तो उसके चुचों के बीच का गलियार साफ़ दिखाई दे रहा था.

जिससे मैं भी खूब गरम हो चुका था और रात होने तक मैंने उसके आधे दिख रहे चुचों का खूब मज़ा लिया.

रात को खाना हमने एक साथ खाया और उसके बाद हम एक सीट पर बैठ कर ही बात कर रहे थे.

वहाँ बैठ कर मैंने एक दो बार उसकी जांघ पर हाथ भी मारा जिस पर उसने कोई विरोध नहीं किया.

मैं पूरा का पूरा खुल चुका था..

खुल कर अपने हाथ को उसकी जांघ पर लहराने लगा.

अब जब वो भी गरम हो गयी तो हमने पर्दा लगा दिया और वहीँ लेटकर एक – दूसरे के साथ चुसम – चुसाई करने लगे.

मैंने अब लेटे – लेटे उसके टॉप को उतार दिया उसके मस्ताने चुचों को अपने मुंह में भर के पीने लगा.

मैंने कुछ देर बाद, उसकी पैंट को नीचे से खोल कर उतार दिया और उसकी पैंटी के बाजु से उसकी चूत में ऊँगली करने लगा..

अब मैंने उसे थोड़ी ही देर बाद पूरी नंगी कर दिया और खुद भी नंगा होकर अपनी ऊँगलीयां उसकी चूत में अंदर देने लगा.

मुझे उसकी चूत में ऊँगली करने बाद उसे कुंवारेपन का पता चला क्यूंकि उसे काफी दर्द हो रहा था.

अब मैंने उसकी चूत को अपने लंड के करीब लाने के लिए टांगों को बिल्कुल खोल दिया, जिससे वो तडप कर मेरे लंड को अपने हाथ से आगे – पीछे मसलने लगी.

मैंने ज्यादा ना सोचते हुए, बस अपने लंड को उसकी चूत में अंदर जोर के झटकों से देता चला गया और उसकी अ आह ह्हः अआ ह ह्हा करके चीखे भी निकलने लगी.

उसकी चूत से हल्का – हल्का खून भी निकल रहा था.

पर मैंने सब – कुछ साफ़ कर उसकी चुदाई पर ही ध्यान रखा..

हम थोड़ी ही देर में सातवें आसमान पर पहुँच चुके थे, वो भी बड़ी – बड़ी सिसकारियाँ ले रही थी और अपनी चूत के उपर से मसल रही थी.

हमने पूरे सफर में जम कर चुदाई की और उसने जाने से पहले मुझे चुम्मी भी दी, पर वो ही हमारा आखिरी मिलन था.

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One Comment
  1. June 26, 2017 | Reply

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