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मेरी चूत की गर्मी बॉस ने शांत किया

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दोस्तों मै राहुल आज फिर एक मजेदार कहानी ले कर आया हूँ आशा करता xxx kahani,hindi sex story,antarvasna,Kamukta,kamukta. com,hindi sex stories हूँ आप सभी मेरी सभी कहानियो की तरह इस कहानी को भी प्यार देगे | दोस्तों ये कहानी एक शादी शुदा औरत की है जिसकी शादी हो चुकी है उसका नाम शौम्या है और उसकी उम्र करीब ३२ साल है उसका पति, मनोहर, पुलिस वाला है। शौम्या एक सुन्दर औरत है जो दिखने में एक २१-२२ साल की लड़की की तरह दिखती है। ५’ ३” ऊंचा कद, छोटे स्तन, गठीला सुडौल शरीर, रसीले होंट, काले लम्बे बाल ओर मोहक मुस्कान। उनके दो बेटा था जो १२ साल की उम्र में भगवन को प्यारा हो गया था। इस हादसे से शौम्या को बहुत आघात लगा था। इसके बाद बहुत कोशिशों के बाद भी उनको कोई बच्चा नहीं हुआ था। मनोहर एक शराबी कबाबी किस्म का आदमी था जो की पत्नी को सिर्फ एक सेक्स का खिलौना समझता था।

 

उसकी आवाज़ में कर्कशता और व्यवहार में रूखापन था। वोह रोज़ ऑफिस से आने के बाद अपने दोस्तों के साथ घूमने चला जाता था। पुलिस में होने के कारण उसका मोहल्ले में बहुत दबदबा था। उसको शराब और ब्लू फिल्म का शौक था जो उसे अपने पड़ोस में ही मुफ्त मिल जाते थे। रोज़ वोह शराब पी के घर आता और ब्लू फिल्म लगा कर देखता। फिर खाना खा कर अपनी पत्नी से सम्भोग करता। यह उसकी रोज़ की दिन चर्या थी। बेचारी शौम्या का काम सिर्फ सीधे या उल्टे लेट जाना होता था। मनोहर बिना किसी भूमिका के उसके साथ सम्भोग करता जो कई बार शौम्या को बलात्कार जैसा लगता था। उसकी कोई इच्छा पूर्ति नहीं होती थी ना ही उस से कुछ पूछा जाता था। वह अपने पति से बहुत तंग आ चुकी थी पर एक भारतीय नारी की तरह अपना पत्नी धर्म निभा रही थी। पहले कम से कम उसके पास अपना बेटा था पर उसके जाने के बाद वह बिलकुल अकेली हो गई थी। उसका पति उसका बिलकुल ध्यान नहीं रखता था। सम्भोग भी क्रूरता के साथ करता था। न कोई प्यारी बातें ना ही कोई प्यार का इज़हार। बस सीधा अपना लिंग शौम्या की योनि में घुसा देना। शौम्या की योनि ज्यादातर सूखी ही होती थी और उसे इस तरह के सम्भोग से बहुत दर्द होता था। पर कुछ कह नहीं पाती थी क्योंकि पति घर में और भी बड़ा थानेदार होता था। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | इस पताड़ना से शौम्या को महीने में पांच दिन की छुट्टी मिलती थी जब मासिक धर्म के कारण मनोहर कुछ नहीं कर पाता था। मनोहर की एक बात अच्छी थी की वो पुलिसवाला होने के बावजूद भी पराई औरत या वेश्या के पास नहीं जाता था।
शौम्या एक कंपनी में सेक्रेटरी का काम करती थी। वह एक मेहनती और ईमानदार लड़की थी जिसके काम से उसका बॉस बहुत खुश था। उसका बॉस एक ४२ साल का सेवा-निवृत्त फौजी अफसर था। वह भी शादीशुदा था और एक दयालु किस्म का आदमी था। कई दिनों से वह नोटिस कर रहा था कि शौम्या गुमसुम सी रहती थी। फौज में उसने औरतों का सम्मान करना सीखा था। उसे यह तो मालूम था कि उसका बेटा नहीं रहा पर फिर भी उसका मासूम दुखी चेहरा उसको ठेस पहुंचाता था। वह उसके लिए कुछ करना चाहता था पर क्या और कैसे करे समझ नहीं पा रहा था। वह उसके स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचाना चाहता था। उधर शौम्या अपने बॉस का बहुत सम्मान करती थी क्योंकि उसे अपने बॉस का अपने स्टाफ के प्रति व्यवहार बहुत अच्छा लगता था। बॉस होने के बावजूद वह सबसे इज्ज़त के साथ बात करता था और उनकी छोटी बड़ी ज़रूरतों का ध्यान रखता था। सिर्फ शौम्या ही नहीं, बाकी सारा स्टाफ भी बॉस को बहुत चाहता था।
एक दिन, जब सबको महीने की तनख्वाह दी जा रही थी, बॉस ने सबको जल्दी छुट्टी दे दी। सब पैसे ले कर घर चले गये, बस शौम्या हिसाब के कागजात पूरे करने के लिए रह गई थी। जब यह काम ख़त्म हो गया तो वह बॉस की केबिन में उसके हस्ताक्षर लेने गई। बॉस, जिसका नाम विवेक है, उसका इंतज़ार कर रहा था। उसने उसे बैठने को कहा और उसका वेतन उसे देते हुए उसके काम की सराहना की। शौम्या ने झुकी आँखों से धन्यवाद किया और जाने के लिए उठने लगी।
विवेक ने उसे बैठने के लिए कहा और उठ कर उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने प्यार से उस से पूछा कि वह इतनी गुमसुम क्यों रहती है? क्या ऑफिस में कोई उसे तंग करता है या कोई और समस्या है? शौम्या ने सिर हिला कर मना किया पर बोली कुछ नहीं। विवेक को लगा कि ज़रूर कोई ऑफिस की ही बात है और वह बताने से शरमा या घबरा रही है। उसने प्यार से उसके सिर पर हाथ फिराते हुए कहा कि उसे डरने की कोई ज़रुरत नहीं है और वह बेधड़क उसे सच सच बता सकती है। शौम्या कुछ नहीं बोली और सिर झुकाए बैठी रही। विवेक उसके सामने आ गया और उसकी ठोडी पकड़ कर ऊपर उठाई तो देखा कि उसकी आँखों में आँसू थे।
विवेक ने उसके गालों से आँसू पौंछे और उसे प्यार से अपने सीने से लगा लिया। इस समय शौम्या कुर्सी पर बैठी हुई थी और विवेक उसके सामने खड़ा था। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | इसलिए शौम्या का सिर विवेक के पेट से लगा था और विवेक के हाथ उसकी पीठ और सिर को सहला रहे थे। शौम्या अब एक बच्चे की तरह रोने लग गई थी और विवेक उसे रोने दे रहा था जिस से उसका मन हल्का हो जाये। थोड़ी देर बाद वह शांत हो गई और अपने आप को विवेक से अलग कर लिया। विवेक उसके सामने कुर्सी लेकर बैठ गया। पास के जग से एक ग्लास पानी शौम्या को दिया। पानी पीने के बाद शौम्या उठकर जाने लगी तो विवेक ने उसे बैठे रहने को कहा और बोला कि अपनी कहानी उसे सुनाये। क्या बात है ? क्यों रोई ? उसे क्या तकलीफ है ? शौम्या ने थोड़ी देर इधर उधर देखा और फिर एक लम्बी सांस लेकर अपनी कहानी सुनानी शुरू की। उसने बताया किस तरह उसकी शादी उसकी मर्ज़ी के खिलाफ एक गंवार, क्रूर,शराबी के साथ करा दी थी जो उम्र में उस से १५ साल बड़ा था। उसके घरवालों ने सोचा था कि पुलिस वाले के साथ उसका जीवन आराम से बीतेगा और वह सुरक्षित भी रहेगी। उन्होंने यह नहीं सोचा कि अगर वह ख़राब निकला तो उसका क्या होगा? शौम्या ने थोड़ी हिचकिचाहट के बाद अपने दाम्पत्य जीवन की कड़वाहट भी बता डाली। किस तरह उसका पति उसके शरीर को सिर्फ अपने सुख के लिए इस्तेमाल करता है और उसके बारे मैं कुछ नहीं सोचता। किस तरह उसके साथ बिना किसी प्यार के उसकी सूखी योनि का उपभोग करता है, किस तरह उसका वैवाहिक जीवन नर्क बन गया है। जब उसने अपने १३ साल के बेटे के मरने के बारे में बताया तो वह फिर से रोने लगी। किस तरह से उसके घरवाले उसे ही उसके बेटे के मरने के लिए जिम्मेदार कहने लगे। किस तरह उसका पति एक और बच्चे के लिए उसके साथ ज़बरदस्ती सम्भोग करता था और अपने दोस्तों के सामने उसकी खिल्ली उड़ाता था। विवेक आराम से उसकी बातें सुनता रहा और बीच बीच में उसका सिर या पीठ सहलाता रहा। एक दो बार उसको पानी भी पिलाया जिस से शौम्या का रोना कम हुआ और उसकी हिम्मत बढ़ी। धीरे धीरे उसने सारी बातें बता डालीं जो एक स्त्री किसी गैर मर्द के सामने नहीं बताती।

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शौम्या को एक आजादी सी महसूस हो रही थी और उसका बरसों से भरा हुआ मन हल्का हो रहा था। कहानी ख़त्म होते होते शौम्या यकायक खड़ी हो गई और विवेक के सीने से लिपट गई और फिर से रोने लगी मानो उसे यह सब बताने की ग्लानि हो रही थी। विवेक ने उसे सीने से लगाये रखा और पीठ सहलाते हुए उसको सांत्वना देने लगा। शौम्या को एक प्यार से बात करने वाले मर्द का स्पर्श अच्छा लग रहा था और वह विवेक को जोर से पकड़ कर लिपट गई। विवेक को भी अपने से १५ साल छोटी लड़की-सी औरत का आलिंगन अच्छा लग रहा था। वैसे उसके मन कोई खोट नहीं थी और ना ही वह शौम्या की मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था। फिर भी वह चाह रहा था कि शौम्या उससे लिपटी रहे। थोड़ी देर बाद शौम्या ने थोड़ी ढील दी और बिना किसी हिचकिचाहट के अपने होंट विवेक के होंटों पर रख दिए और उसे प्यार से चूमने लगी। शायद यह उसके धन्यवाद करने का तरीका था कि विवेक ने उसके साथ इतनी सुहानुभूति बरती थी। विवेक थोड़ा अचंभित था। वह सोच ही रहा था कि क्या करे ! जब शौम्या ने अपनी जीभ विवेक के मुँह में डालने की कोशिश की और सफल भी हो गई। अब तो विवेक भी उत्तेजित हो गया और उसने शौम्या को कस कर पकड़ लिया और जोर से चूमने लगा। उसने भी अपनी जीभ शौम्या के मुँह में डाल दी और दोनों जीभों में द्वंद होने लगा। अब विवेक की कामुकता जाग रही थी और उसका लिंग अंगडाई ले रहा था। एक शादीशुदा लड़की को यह भांपने में देर नहीं लगती। सो शौम्या ने अपना शरीर और पास में करते हुए विवेक के लिंग के साथ सटा दिया। इस तरह उसने विवेक को अगला कदम उठाने के लिए आमंत्रित लिया। विवेक ने शौम्या की आँख में आँख डाल कर कहा कि उसने पहले कभी किसी पराई स्त्री के साथ ऐसा नहीं किया और वह उसका नाजायज़ फायदा नहीं उठाना चाहता। अब तो शौम्या को विवेक पर और भी प्यार आ गया। उसने कहा- आप थोड़े ही मेरा फायदा उठा रहे हो। मैं ही आपको अपना प्यार देना चाहती हूँ। आप एक अच्छे इंसान हो वरना कोई और तो ख़ुशी ख़ुशी मेरी इज्ज़त लूट लेता। विवेक ने पूछा कि वह क्या चाहती है, तो उसने कहा पहले आपके गेस्ट रूम में चलते हैं, वहां बात करेंगे।
ऑफिस का एक कमरा बतौर गेस्ट-रूम इस्तेमाल होता था जिसमें बाहर से आने वाले कंपनी अधिकारी रहा करते थे। उधर रहने की सब सुविधाएँ उपलब्ध थीं। शौम्या, विवेक का हाथ पकड़ कर, उसे गेस्ट-रूम की तरफ ले जानी लगी। कमरे में पहुँचते ही उसने अन्दर से दरवाज़ा बंद कर लिया और विवेक के साथ लिपट गई। उसकी जीभ विवेक के मुँह को टटोलने लगी। शौम्या को जैसे कोई चंडी चढ़ गई थी। उसे तेज़ उन्माद चढ़ा हुआ था। उसने जल्दी से अपने कपड़े उतारने शुरू किए और थोड़ी ही देर में नंगी हो गई। नंगी होने के बाद उसने विवेक के पांव छुए और खड़ी हो कर विवेक के कपड़े उतारने लगी। विवेक हक्काबक्का सा रह गया था। सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। वह मंत्र-मुग्ध सा खड़ा रहा। उसके भी सारे कपड़े उतर गए थे और वह पूरा नंगा हो गया था। शौम्या घुटनों के बल बैठ गई और विवेक के लिंग को दोनों हाथों से प्रणाम किया। फिर बिना किसी चेतावनी के लिंग को अपने मुँह में ले लिया। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | हालाँकि विवेक की शादी को २० साल हो गए थे उसने कभी भी यह अनुभव नहीं किया था। उसके बहुत आग्रह करने के बावजूद भी उसकी पत्नी ने उसे यह सुख नहीं दिया था। उसकी पत्नी को यह गन्दा लगता था। अर्थात, यह विवेक के लिए पहला अनुभव था और वह एकदम उत्तेजित हो गया। उसका लिंग जल्दी ही विकाराल रूप धारण करने लगा। शौम्या ने उसके लिंग को प्यार से चूसना शुरू किया और जीभ से उसके सिरे को सहलाने लगी।

अभी २ मिनट भी नहीं हुए होंगे कि विवेक अपने पर काबू नहीं रख पाया और अपना लिंग शौम्या के मुँह से बाहर खींच कर ज़ोरदार ढंग से स्खलित हो गया। उसका सारा काम-मधु शौम्या के स्तनों और पेट पर बरस गया। विवेक अपनी जल्दबाजी से शर्मिंदा था और शौम्या को सॉरी कहते हुए बाथरूम चला गया। शौम्या एक समझदार लड़की थी और आदमी की ताक़त और कमजोरी दोनों समझती थी। वह विवेक के पीछे बाथरूम में गई और उसको हाथ पकड़ कर बाहर ले आई। विवेक शर्मीला सा खड़ा था। शौम्या ने उसे बिस्तर पर बिठा कर धीरे से लिटा दिया। उसकी टांगें बिस्तर के किनारे से लटक रहीं थीं और लिंग मुरझाया हुआ था। शौम्या उसकी टांगों के बीच ज़मीन पर बैठ गई और एक बार फिर से उसके लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मुरझाये लिंग को पूरी तरह मुँह में लेकर उसने जीभ से उसे मसलना शुरू किया। विवेक को बहुत मज़ा आ रहा था। शौम्या ने अपने मुँह से लिंग अन्दर बाहर करना शुरू किया और बीच बीच में रुक कर अपने थूक से उसे अच्छी तरह गीला करने लगी।

विवेक ख़ुशी के मारे फूला नहीं समा रहा था। उसके हाथ शौम्या के बालों को सहला रहे थे। धीरे धीरे उसके लिंग में फिर से जान आने लगी और वह बड़ा होने लगा। अब तक शौम्या ने पूरा लिंग अपने मुँह में रखा हुआ था पर जब वह बड़ा होने लगा तो मुँह के बाहर आने लगा। वह उठकर बिस्तर पर बैठ गई और झुक कर लिंग को चूसने लगी। उसके खुले बाल विवेक के पेट और जांघों पर गिर रहे थे और उसे गुदगुदी कर रहे थे। अब विवेक का लिंग बिलकुल तन गया था और उसकी चौड़ाई के कारण शौम्या के दांत उसके लिंग के साथ रगड़ खा रहे थे। अब तो विवेक की झेंप भी जाती रही और उसने शौम्या को एक मिनट रुकने को कहा और बिस्तर के पास खड़ा हो गया। उसने शौम्या को अपने सामने घुटने के बल बैठने को कहा और अपना लिंग उसके मुँह में डाल दिया। अब उसने शौम्या के साथ मुख-मैथुन करना शुरू किया। अपने लिंग को उसके मुँह के अन्दर बाहर करने लगा। शुरू में तो आधा लिंग ही अन्दर जा रहा था पर धीरे धीरे शौम्या अपने सिर का एंगल बदलते हुए उसका पूरा लिंग अन्दर लेने लगी। कभी कभी शौम्या को ऐसा लगता मानो लिंग उसके हलक से भी आगे जा रहा है। विवेक को बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

उसने अपने धक्के तेज़ कर दिए और मानो भूल गया कि वह शौम्या के मुँह से मैथुन कर रहा है। शौम्या को लिंग कि बड़ी साइज़ से थोड़ी तकलीफ तो हो रही थी पर उसने कुछ नहीं कहा और अपना मुँह जितना ज्यादा खोल सकती थी खोल कर विवेक के आनंद में आनंद लेने लगी। विवेक अब दूसरी बार शिखर पर पहुँचने वाला हो रहा था। उसने शौम्या के सिर को पीछे से पकड़ लिया और जोर जोर से उसके मुँह को चोदने लगा। जब उसके लावे का उफान आने लगा उसने अपना लिंग बाहर निकालने की कोशिश की पर शौम्या ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और दोनों हाथों से विवेक के चूतड पकड़ कर उसका लिंग अपने मुँह में जितना अन्दर कर सकती थी, कर लिया। विवेक इसके लिए तैयार नहीं था। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह किसी लड़की के मुँह में अपने लावे का फव्वारा छोड़ पायेगा। इस ख़ुशी से मानो उसका लंड डेढ़ गुना और बड़ा हो गया और उसका क्लाइमेक्स एक भूकंप के बराबर आया। शौम्या का मुँह मक्खन से भर गया पर उसने बाहर नहीं आने दिया और पूरा पी गई। विवेक ने अपना लिंग शौम्या के मुँह से बाहर निकाला और झुक कर उसे ऊपर उठाया। शौम्या को कस कर आलिंगन में भर कर उसने उसका जोरदार चुम्बन लिया जिसमे कृतज्ञता भरी हुई थी।

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शौम्या के मुँह से उसके लावे की अजीब सी महक आ रही थी। दोनों ने देर तक एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ से गहराई से खोजबीन की और फिर थक कर लेट गए। विवेक कई सालों से एक समय में दो बार स्खलित नहीं हुआ था। उसका लिंग दोबारा खड़ा ही नहीं होता था। उसे बहुत अच्छा लग रहा था। दिन के डेढ़ बज रहे थे। दोनों को घर जाने की जल्दी नहीं थी क्योंकि ऑफिस शाम ५ बजे तक का था और वैसे भी उन्हें ऑफिस में देर हो ही जाती थी। आमतौर पर वे ६-७ बजे ही निकल पाते थे। दोनों एक दूसरे की बाहों में लेट गए और न जाने कब सो गए। करीब एक घंटा सोने के बाद विवेक की आँख खुली तो उसने देखा शौम्या दोनों के टिफिन खोल कर खाना टेबल पर लगा रही थी। उसने अपने को तौलिये से ढक रखा था। विवेक ने अपने ऑफिस की अलमारी से रम की बोतल और फ्रीज से कोक की बोतलें निकालीं और दोनों के लिए रम-कोक का ग्लास बनाया। शौम्या ने कभी शराब नहीं पी थी पर विवेक के आग्रह पर उसने ले ली। पहला घूँट उसे कड़वा लगा पर फिर आदत हो गई।

दोनों ने रम पी और घर से लाया खाना खाया। खाने के बाद दोनों फिर लेट गए। विवेक को अचानक ध्यान आया कि अब तक उसने शौम्या को ठीक से छुआ तक नहीं है। सारी पहल शौम्या ने ही की थी। उसने करवट बदलकर शौम्या की तरफ रुख़ किया और उसके सिर को सहलाने लगा। शौम्या ने तौलिया लपेटा हुआ था। विवेक ने तौलिये को हटाने के लिए शौम्या को करवट दिला दी जिस से अब वह उल्टी लेटी हुई थी। विवेक ने उसके हाथ दोनों ओर फैला दिए और उसकी टांगें थोड़ी खोल दीं। अब विवेक उसकी पीठ के दोनों तरफ टांगें कर के घुटनों के बल बैठ गया और पहली बार उसने शौम्या के शरीर को छुआ। उसके लिए किसी पराई स्त्री को छूने का यह पहला अनुभव था। कुछ पाप बड़ा आनंद देते हैं। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उसके हाथ शौम्या के पूरे शरीर पर फिरने लगे। शौम्या का स्पर्श उसे अच्छा लग रहा था और उसकी पीठ और चूतड़ का दृश्य उसमें जोश पैदा कर रहा था। शौम्या एक तमिल लड़की थी जो नहाने के लिए साबुन का इस्तेमाल नहीं करती थी। उसे पारम्परिक मुल्तानी मिट्टी की आदत थी जिससे उसकी काया बहुत चिकनी और स्वस्थ थी। वह बालों में रोज़ नारियल तेल से मालिश करती थी जिस से उसके बाल काले और घने थे। इन मामलों में वह पुराने विचारों की थी। उसके पुराने विचारों में अपने पति की आज्ञा मानना और उसकी इच्छा पूर्ति करना भी शामिल था। यही कारण था की इतने दिनों से वह अपने पति का अत्याचार सह रही थी। विवेक शौम्या के शरीर को देख कर और छू कर बहुत खुश था। उसे उसके पति पर रश्क भी हो रहा था और गुस्सा भी आ रहा था कि ऐसी सुन्दर पत्नी को प्यार नहीं करता था। विवेक ने शौम्या के कन्धों और गर्दन को मलना और उनकी मालिश करना शुरू किया।

कहीं कहीं गाठें थी तो उन्हें मसल कर निकालने लगा। जब हाथ सूखे लगने लगे तो बाथरूम से तेल ले आया और तेल से मालिश करने लगा। जब कंधे हो गए तो वह थोड़ा पीछे खिसक गया और पीठ पर मालिश करने लगा। जब वह मालिश के लिए ऊपर नीचे होता तो उसका लंड शौम्या की गांड से हलके से छू जाता। शौम्या को यह स्पर्श गुदगुदाता और वह सिहर उठती और विवेक को उत्तेजना होने लगती। थोड़ी देर बाद विवेक और नीचे खिसक गया जिस से लंड और गांड का संपर्क तो टूट गया पर अब विवेक के हाथ उसकी गांड की मालिश करने लगे। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उसने दोनों चूतडों को अच्छे से तेल लगाकर मसला और मसाज करने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। शौम्या भी आनंद ले रही थी। उसे किसी ने पहले ऐसे नहीं किया था। विवेक के मर्दाने हाथों का दबाव उसे अच्छा लग रहा था। विवेक अब उसकी जाँघों तक पहुँच गया था। विवेक की उंगलियाँ उसकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से को टटोलने लगी। शौम्या ने अपनी टांगें थोड़ी और खोल दीं और ख़ुशी से मंद मंद करहाने लगी। विवेक ने हल्के से एक दो बार उसकी योनि को छू भर दिया और फिर उसके घुटनों और पिंडलियों को मसाज करने लगा।

 

शौम्या चाहती थी कि विवेक योनि से हाथ न हटाये पर कसमसा कर रह गई। विवेक भी उसे जानबूझ कर छेड़ रहा था। वह उसे अच्छी तरह उत्तेजित करना चाहता था। थोड़ी देर बाद शौम्या के पांव अपने गोदी में रख कर सहलाने लगा तो शौम्या एकदम उठ गई और अपने पांव सिकोड़ लिए। वह नहीं चाहती थी कि विवेक उसके पांव दबाये। पर विवेक ने उसे फिर से लिटा दिया और दोनों पांव के तलवों की अच्छी तरह से मालिश कर दी। शौम्या को बहुत आराम मिल रहा था और न जाने कितने वर्षों की थकावट दूर हो रही थी। अब शौम्या कृतज्ञता महसूस कर रही थी। विवेक ने शौम्या को सीधा होने को कहा और वह एक आज्ञाकारी दासी की तरह उलट कर सीधी हो गई। विवेक ने पहली बार ध्यान से शौम्या के नंगे शरीर को सामने से देखा। जो उसने देखा उसे बहुत अच्छा लगा। उसके स्तन छोटे पर बहुत गठीले और गोलनुमा थे जिस से वह एक १६ साल की कमसिन लगती थी। चूचियां हलके कत्थई रंग की थी और स्तन पर तन कर मानो राज कर रही थी। विवेक का मन हुआ वह उनको एकदम अपने मुँह में ले ले और चूसता रहे पर उसने धीरज से काम लिया। हाथों में तेल लगा कर उसने शौम्या की भुजाओं की मालिश की और फिर उसके स्तनों पर मसाज करने लगा।

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