मेरी कज़िन निर्मला के साथ वन नाइट स्टॅंड

मेरे घर से 2 किलोमिटर पे ही मेरे फुफेरे अंकल रहते हैं. उनके फॅमिली का मेरे घर आना-जाना लगा रहता है.उनकी बेटी का नाम निर्मला है. वो मल्टिमीडिया की स्टूडेंट है. वो दिखने में बहुत खूबसूरात थी.हाँ तो दोस्तो अब असली बात पे आता हूँ.

उसे जब से मैने देखा था दिल की बस एक ही विश थी-उसके चुत के दर्शन करना. 1 दिन मौका मिला. हुआ यूँ की वो क्लास से रिटर्न होते समय हमारे घर पहुँची. चूँकि वो बहुत दीनो के बाद आई थी इसलिए पापा ने उसे कुछ घंटों के लिए रोक लिया. 4 घंटे बाद पापा ने मुझे उसके साथ उसे घर तक ड्रू-आउट करने के लिए भेज दिया. मैं उसे बाएक पे बिठया और चल दिया. रास्तों में बढ़ता ब्रेकर के कारण बार बार ब्रेक लगता था तो उसकी बूब्स मेरे पीठ प सात जाता था. इस से मेरे मॅन का शैठान जगह गया था. थोड़ी देर में उसका घर आ गया. हम जैसे ही घर के दूर पे पहुँचे तो देख की दूर बंद थी.

फोन करने पे पता चला की आंटी की तबीयत खराब थी और अंकल उन्हे लेकर हॉस्पिटल गये थे. अंकल ने मुझे कहा की रात भर के लिए तुम मेरे घर पे निर्मला के साथ रुक जाओ. इतना सुनते ही मेरा दिल गार्डेन गार्डेन हो गया. रात मे खाना निर्मला ने ही बनाई और फिर हम साथ में ही खाना खाए. फिर हम लोग टीवी देखने चले गया. टीवी पे सेक्सी सीन चल रहा था. देखते ही मेरा लंड पहाड़ हो गया. मैने 1 नज़र निर्मला को देखा. वो मस्ती में मूवी देख रही थी. मैने आव देखा ना ताव सीधे उसे अपनी बाहों में भर कर उसके होंठों से अपने होंठ सटा दिए और किस करने लगा. वो हकबाकाई, मगर मैने उसे नही छोडा और किस करते रहा. कुछ देर के बाद वो कसमसाई और मेरी चंगुल से चुत कर बोली, ये आप क्या कर रहे हैं. मैने कहा-जान आज नही आज चोदने का मौका मिला है. आज मना मत करना. वो बोली- भैया मैं आपकी कज़िन हूँ.

ये ठीक नही है. मैने कहा- जवानी 1 बार मेरे नाम कर देने से तेरी जवानी ख़त्म नही हो जाएगी. किसी को पता भी नही चलेगा और सुहग्रात कैसे मनाया जाता है इसका एक्सपीरियेन्स भी तो आ जाएगा.वो नही मन रही थी. तब मैं समझ गया की ऐसे कम नही चलेगा. ज़बरदस्ती करना ही होगा. मैने उसे फिर से अपनी बाहों मे भर के किस्सिंग लीप लॉक स्टार्ट किया. उसके निचले होठों को चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था .मैने अपना हाथ ज़बरदस्ती उसके कमीज़ मे डाल कर दोनो चुचि मसलने लगा. मैने देर करना ठीक नही समझा और उसे ज़बरदस्ती पूरा नंगा कर दिया. मेरे कई सालों की ख्वाहिस पूरी हो गयी थी. उसकी चुत पाउ रोती की तरह फूली हुई थी.

गुलाबी चुत काफ़ी चिकनी थी.वो रूम में इधर उधर भागने लगी तो मैने पकड़ के दोनो हाथ और दोनो पैर पलंग से सटा कर बाँध दिए. अब मैं भी पूरा नंगा हो गया और उसके उप्पर सो गया. मेरा लंड निर्मला के चुत को टच कर रहा था. मैने उसके होठों को चूसना शुरु किया.चूस्ते चूस्ते मैने उसके चुचि के निप्पल को चुभलने लगा. मैने धीरे धीरे उसके चुत के छेद मे उंगली डाल के अंदर करने लगा. 10 मिनिट बाद वो भी उत्तेजित हो गयी और आआआः.. सी… करने लगी. मैने भी सब कुछ छोड के लंड को चुत के मुहाने पे रखा और जोरदार धक्का दिया.

उसके मुँह से चीख निकल गयी. मैने एक और धक्का मारा लंड आधा उसके चुत में घुस गया. धीरे धीरे मैने उसके निप्पल चूस्ते हुए उसके होंठ चूस्ते हुए पहले से भी ज़्यादा ताक़त के साथ दर्दनाक धक्का मारा, लंड पूरा निर्मला के चुत में घुस गया. वो तड़प रही थी और मैं धक्के लगा रहा था. जनता था की पहली बार चुदवाने में थोड़े देर के लिए दर्द तो होता ही है. अब लंड को बाहर निकल के फिर से धक्का मारा.

इसी तरह धक्का पे धक्का मर रहा था. अब वो भी मेरा थोड़ा साथ देने लगी थी. अचानक मेरा लंड वीर्या चोद दिया और निर्मला का चुत मेरे वीर्या सेब्र गया. मैं थोड़ी देर चित्त लेता रहा. फिर अपना लंड निर्मला के मुँह में डाल कर अंदर बाहर करने लगा. 2-3 मिनिट में मेरे लंड से फिर वीर्या निकला लेकिन इस बार निर्मला के मुँह में गिरा. इस तरह मैने निर्मला के चुत को फाडा और चोदा.

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