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माँ बेटी की गांड में लंड

मुनमुन अपनी चूत के अंदर थूंक लगा के ऊँगली कर रही थी और लता आंटी ने अपना भोसड़ा मेरे मुहं के ऊपर पहले से रख दिया था. उसकी बड़ी गांड मेरे मुहं के उपर टाईट आ गई थी जिस से मुझे सांस लेने में भी मुश्किल आ रही थी. लता आंटी की चूत चुदने के बाद तो जैसे और भी गरम हो चुकी थी. मुनमुन ने मेरे खड़े हुए लंड को अपने हाथ में लिया और वो उसे अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी. वाऊ क्या मजेदार टाईट चूत थी उसकी; अपनी माँ की कम्पेरिशन में. मुनमुन ने चूत के अंदर लौड़े को घिसना चालू किया और मैं इधर लता आंटी की चूत को कुत्ते के जैसे जबान निकाल के चाट रहा था. लता आंटी अपनी गांड को हिला के अपनी चूत को मेरे मुहं के ऊपर चला रही थी. मुनमुन मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और एक ही झटके में लंड ने उसकी चूत को आरपार कर लिया. मुनमुन आह कर के रह गई और वो अब धीरे धीरे मेरे लंड के ऊपर उछलने लगी. मैं निचे से उसकी चूत को चोदने के लिए गद्दे के ऊपर अपनी गांड को हिला रहा था जिस से उसकी चूत के अंदर मेरा लंड अंदर बहार हो सकें. मुनमुन भी मस्त जम्प लगा लगा के अपनी चूत के अंदर मेरा लंड अंदर बहार कर रही थी. बड़ा कामुक द्रश्य था; माँ बेटी को एक ही बिस्तर में चोदने वाला.

लता आंटी की गांड में ऊँगली

मुनमुन को चोदते चोदते मैंने अपनी उंगलिया उसकी गांड के ऊपर रख दी और मैं उसे ऊपर निचे होने में मदद करने लगा. और तभी मेरा हाथ गलती से उसके पिछले छेद पे जा पहुंचा. मैंने सोचा की साला यहाँ पे भी मजा लिया जा सकता हैं. और क्यूंकि मैंने वायेग्रा खा रखी थी इसलिए मेरा लौड़ा भी इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था. मैंने सोचा की बेटे अनूप आइडिया तो सही हैं लेकिन मुनमुन की गांड में देने से कही उसकी गांड फट ना जाएँ. मैंने सोचा की तब तो यह पहले आंटी के उपर ही ट्राय करना पड़ेंगा. मैंने मुनमुन को जोर जोर से चोदना चालू कर दिया और अपनी ऊँगली उसके गुदा के मुख पर हलके हलके से फेरने लगा. मुझे पता था की ऐसा करने से वो जरुर उत्तेजित होंगी अपने पिछवाड़े में लौड़ा लेने के लिए. मुनमुन को ऊँगली करने के बाद मैंने वही उंगलिया लता आंटी के पिछवाड़े के ऊपर सेट कर दी. लता आंटी को ऊँगली देते ही गुदगुदी हुई और वो समझ गई की आज अनूप मेरे पीछे भी लौड़ा डाल देंगा. मैंने अपनी ऊँगली को लता आंटी की गांड में पूरा अंदर डाला और अंदर बहार करने लगा. लता आंटी से बर्दास्त नहीं हो रहा था और वो जोर जोर से मोनिंग करने लगी, “आह अनूप आह्ह ओह ओह ओह क्या कर रहे हो आअह्ह्ह्ह बर्दास्त नहीं होता अब तो……!”

उदार मुनमुन भी अपनी माँ की मोनिंग सुन के और उत्तेजित होने लगी. उसके लौड़े के ऊपर के झटके यकायक बढ़ से गए. मुनमुन ने अपने हाथ बेड के ऊपर रखे और वो अपनी चूत को और भी जोर से मेरे लौड़े के ऊपर मारने लगी. बड़ा कामुक द्रश्य था और मेरी सभी उत्तेजना जैसे के लंड के अंदर आ के समा गई थी. अब तो मैं भी पिछवाड़े के टाईट छेद को लेने के लिए उतारू हो गया था. मैंने मुनमुन को अपने लंड से और आंटी को अपने मुहं से हटाया. और मैं बोला, “चलो आप दोनों कुतिया बन जाओ. आप को मैं गांड संभोग का मजा दूंगा आज तो…!”

माँ बेटी बड़ी मजेदार

मुनमु के चहरे का रंग उड़ता दिखा मुझे. लेकिन उसकी रंडी माँ तो तुरंत कुतिया बन गई और उसने अपने कूल्हें भी फाड़ दिया. मुनमुन भी उलट गई और मैंने उसकी गांड के ऊपर एक चमाट लगाई.  लता आंटी के पिछवाड़े के ऊपर मैं अपनी तोप को सेट की और लता आंटी ने मेरे लौड़े को बोल्स के पास यानी के आखरी सरें से पकड़ लिया. और फिर वो ही मेरे लंड को धीरे धीरे अपनी गांड में डालने लगी. वाऊ क्या सख्त ched था ये जिसमे मेरा लौड़ा आहिस्ता आहिस्ता जा रहा था. मुनमुन फटी आँखों से अपनी माँ की गांड में जाता हुआ मेरा तना हुआ लंड देख रही थी. और लता आंटी ने देखते ही देखते अपने पिछवाड़े में पुरे लौड़े को ले लिया. मैंने लौड़े के बेस में थोडा थूंक दिया ताकि अंदर बहार होने पे लता आंटी की गांड की चमड़ी छिल ना जाएँ. लता आंटी अपने कूल्हें उछालने लगी अब और मेरा लंड अंदर बहार होने लगा. आह आह आह ओह ओह ओह की आवाजें हम दोनों के ही मुहं से निकल रहा था और आंटी अब अपनी मरवा लेने के लिए पगला सी गई थी. मैंने आंटी की गांड के ऊपर 4-5 चमाट लगाई और उसे लाल लाल कर डाली.

मुनमुन अभी तक बस देख रही थी और मैंने सोचा की यह देख देख के तैयार हो गई होंगी. मैंने उसे भी वही कुतिया बनने के लिए कह दिया. मुनमुन झुकी और अपने कूल्हों को पीछे से ऊँचा क्र दिया. मेरे सामने दो दो गांडे थी एक माँ की और एक बेटी की. मैंने हलके से लता आंटी के छेद से लौड़ा निकाला और मुनमुन को देना चाहा. लेकिन मुनमुन की तो बड़ी टाईट थी और अंदर जाने में ही 1 मिनिट लग गया. लेकिन अंदर जाते ही मुनमुन को बड़ा मजा आ गया. वो अपनी गांड हिला हिला के मजे लुटने लगी. मैंने उसकी भी 5 मिनिट ली और फिर मैंने न्याय किया. मैंने बारी बारी लता आंटी और मुनमुन की मारने लगा. जब निढाल हुआ तो लता आंटी की गांड के ऊपर मेरा 50 ग्राम जितना वीर्य निकल गया. आंटी ने अपनी ऊँगली से वो मलाई अपनी चूत और पिछवाड़े के छेद पे लगाईं. मुनमुन मेरे सामने देख रही थी और उसके होंठो पे हंसी थी…! माँ के साथ चुदवा के उसे भी बहुत मजा आया था. और उसे यह पता नहीं था की यह थ्रीसम तो अभी आगे बहुत बार होनेवाला था….!

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