बस वाली महिला को चोद गर्भवती बनाया

हेलो दोस्तो,

मेरा नाम संजय है। मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। लखनऊ में मेरा छोटा सा व्यापार है। मेरी उम्र 25 साल है, और मैं दिखने में आकर्षित हूँ और अच्छा शरीर है।

मैंने पहले बहुत सी भाभियों को चोदा है। बात कुछ! एक साल पुरानी फरवरी महीने की है। मुझे अपने व्यापार के सिलसिले में पास के शहर सीतापुर जाना था।

अभी ठंड कम हुई थी! उसी दिन सुबह से धीमी धीमी बारिश होने लगी और बारिश के बाद ठंडा बढ़ गया! ठंडी-ठंडी हवाओं की वजह से, खैर! बारिश रूक गई!

मैं बस स्टैंड पहुँचा, और जैसे ही! मैं बस स्टैंड पहुँचा! बारिश फिर शुरू हो गई। खैर! भागता हुआ! मैं सीतापुर की बस में चड़ा। बस में बारिश की वजह से कुछ 7-8 लोग है थे!

तभी मेरा ध्यान एक भाभी पर पड़ा! वो अकेले एक सीट पर बैठी थी, और भीग जाने की वजह से वो कंपकंपा रही थी। यह देख कर! मेरे मन में लड्डू फूट गए।

मैं सीधा उसकी सीट पर गया और पूछा- क्या मैं बैठ सकता हूँ?

उसने कुछ ना बोलते हुए, अपना सर हिला दिया। मैं उसके पास बैठ गया और उसके शरीर को निहारने लगा। जैसे ही! मेरी नज़र उसकी चूचियों पर गई। मैं तो जैसे पागल ही हो गया!

उसने बुरखा पहन रखा था! पर उसमें से भी, उसके दूध साफ नज़र आ रहे थे! यह देख मैं सोचने लगा! कि कैसे इसको चोदा जाए! अब बस चल पड़ा! मैं बस सोचता रहा!

जैसे ही! बस शहर से बाहर निकली! मैं उससे चिपक कर बैठ गया और उससे बातें करना शुरू कर दिया। की आप कहाँ जा रही हैं? वगैरह वगैरह!

उसने बताया, कि वो सीतापुर की रहने वाली है, और लखनऊ दवाई लेने आई है।

यह सुन मैंने उससे पूछा- किस तकलीफ की दवा लेने जा रही हैं?

वो तो पहले शरमाई! फिर बोली- औलाद सुख के लिए! उसकी शादी को चार साल हो गए थे पर कोई बच्चा नही था! यह सुन कर! मेरी खुशी का ठिकाना नही था!

खैर! हम बातें करते रहे, और मैंने अपना काम शुरू किया! मैं बोला- ठंडा कम होने का नाम ही नही ले रहा है! यह बोलते हुए, मैंने अपना एक हाथ उसकी जाँघ पे रख दिया!

हालांकि! उसने इसका कोई विरोध नही किया और बोली- आज तो बहुत ठंडी हवा चल रही है! फिर क्या! मुझे हरी झंडी मिल गई थी!

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी जाँघें सहलाना शुरू कर दिया! वो कुछ भी नही बोली! अब मैंने उससे उसका नाम पूछा?

उसने कहा- शबनम! क्योंकि बस में बहुत कम लोग थे, और हम बीच में बैठे थे! कोई भी ना हमारे आगे सीट पर! और ना हमारे पीछे सीट पर बैठा था!

अब मैंने धीरे से! अपना हाथ उसकी पीठ की ओर बढ़ाया, और उसे सहलाने लगा! यह एहसास पाकर! शबनम ने आँख बंद कर ली, और शाल से मेरा हाथ ढक लिया।

यह देख मेरी हिम्मत और बढ़ गई! और मुझे हरी झंडी मिल गई! अब मैंने अपना दूसरा हाथ अंदर डाल कर उसके दूध को ऊपर से सहलाने लगा! मेरी तो आज! जैसे लौटरी लग गई थी!

मैंने धीरे धीरे! उसके बुरखे के बटन खोल दिए! और अपना हाथ अन्दर डाल कर उसकी चूचियों को कसकर दबाने लगा! अब शबनम ने अपने होंठ दबाने शुरू कर दिए!

अब उसने भी! अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया! उसकी गर्म साँसों को मैं महसूस कर सकता था! अब मैंने एक हाथ नीचे बढ़ा कर उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया!

मैं सलवार के ऊपर से ही! उसकी चूत की गर्मी महसूस कर सकता था! मैंने उसकी चूत ऊपर से ही रगड़ना शुरू कर दिया! यह देख शबनम का हाथ मेरे लोहा हो चुके 7″ के लौड़े पर चला गया!

वो भी मज़े ले रही थी! मेरे लौड़े को ऊपर से सहला रही थी। खैर! उतनी देर में सीतापुर आ गया! और हमें उतरना पड़ा! जाते जाते! शबनम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे गई।

मैं अपना काम निपटा कर, वापस लखनऊ गया। उसी रात! मैंने उसे फ़ोन किया, उसने मुझे पहचान लिया और बोली- तुमने मुझे तड़पा कर छोड़ दिया!

मैंने कहा- मेरी रानी! लखनऊ आओ! तुम्हारी सारी प्यास बुझा दूँगा!

उसने कहा, कि वो गुरुवार को लखनऊ आएगी! और मुझे मिलेगी। अब यह सुन मैं गुरुवार का इंतज़ार कर रहा था! मैंने सारा इंतज़ाम कर लिया था!

मेरे दोस्त के होटल में! उसे फोन कर, मैंने कमरा ले लिया। खैर! गुरुवार आ गया! मैं अपने ऑफिस में बैठा! शबनम के फोन का इंतज़ार कर रहा था!

दोपहर एक बजे! शबनम का फोन आया और उसने मुझे बस स्टैंड बुलाया। मैं वहाँ पहुँच कर उसे बाईक पर बिठाकर सीधा होटल ले गया!

रास्ते में उसने मुझसे पूछा- हम कहाँ जा रहे हैं?

मैंने उससे कहा- परेशान ना हो! और हम होटल पहुँचे, मैंने रूम की चाभी ली और हम सीधे रूम गए। शबनम रूम में गई! और मैं कमरे के बाहर अपने दोस्त से बातें कर रहा था।

करीब 2-3 मिनट बाद! मैं कमरे में गया तो देखा! कि शबनम कमरे में नही थी! मैं बाथरूम की तरफ देखा! उसका दरवाज़ा खुला था।

जब मैं अंदर गया! तो शबनम सिर्फ़ चड्डी और ब्रा में, खड़ी अपना मुँह धो रही थी। यह देख मैंने पीछे से! उसे पकड़ लिया! और उसकी कंधे और कान के पीछे चूमने लगा!

यह देख! वो पलट गई, और मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी! मुझे मज़ा आने लगा! वो होंठों को ऐसे चूस रही थी, जैसे बहुत प्यासी हो!

मैं अब धीरे धीरे! उसके दूध भी सहला रहा था! करीब 10-15 मिनट तक! वो मेरे होंठों को चूसती रही, फिर उसका हाथ मेरे लौड़े पर गया।

मैं अब उसे गोद में! उठा कर बेड पर ले आया। उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मेरी पैंट में से मेरे लौड़े को निकल कर चूसने लगी!

उसके मुँह की गर्मी पाकर! मैं जैसे! जन्नत में पहुँच गया था! वो मेरे लौड़े को आइसक्रीम की तरह चूस रही थी! 5 मिनट में ही! मैं उसके मुँह में झड़ गया! और वो मेरा सारा पानी पी गई।

पानी पीने के बाद! शबनम बोली- मेरे राजा आज मेरी प्यास बुझा दो!

यह बात सुनते ही! मैं उसे बेड पर लेटा दिया! और उसके नुकीले चूचियों को चूसने, और उसके बड़े बड़े दूध दबाने लगा! वो जैसे पागल हो गई थी!

वो मेरी पीठ पर! एक हाथ से सहला रही थी और एक हाथ से अपने बाल नोंच रही थी। अब मैं अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया! और उसकी चूत को सहलाने लगा!

उसे बहुत मज़ा आ रहा था! अब मैं उसके पीठ को चूमते हुए! उसकी चूत पर आ गया! चूत बहुत गीली हो गई थी! मैंने अपनी जुबान उसकी चूत के दाने पर रखी!

वो चिल्ला उठी- यअहह! मेरे राजा! यह मज़ा तो मुझे किसी ने नही दिया! मैंने अपनी जुबान उसकी चूत में डाल दी। वो तो जैसे तड़पने लगी हो! थोड़ी देर बाद! मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली!

वो और आवाजें निकालने लगी! मेरे आठ-दस बार ही उंगली करने के बाद! उसने अपनी जाँघों से मेरे मुँह को दबाया और अपने हाथ से मेरे मुँह को चूत में और दबा के मेरे मुँह में झड़ गई!

झड़ने के बाद! उसने मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे होंठों को फिर से चूसने लगी! अब अपने हाथ से मेरे लौड़े को सहलाने लगी! मेरा लौड़ा अब बिल्कुल खड़ा था!

उसने मेरे लौड़े को एक बार फिर मुँह में लिया! एक दो मिनट! चूसने के बाद! वो बोली- मुझे और ना तड़पाओ! यह सुनते ही! मैं उसे लिटा उसकी टाँगें फैला कर, अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा!

अब मैंने एक झटका मारा! जिससे मेरा लौड़ा 3″ उसकी चूत में घुस गया! मेरा लौड़ा 7″ लम्बा और मोटा होने की वजह से! उसकी चीख निकल गई! और आँखों में आँसू भी आ गए!

हालांकि! अब मैं रुकने नहीं वाला था! मैंने और ज़ोर से झटका मारा और मेरा पूरा लौड़ा उसकी चूत में घुस गया! जिससे वो तड़पने लगी!

यह देख! मैं थोड़े आराम से झटके मारने लगा! अब शबनम मस्ती से मज़े लेने लगी! अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी!

अब शबनम चिल्ला रही थी- आआ! हह! मेरे राजा चोदो! और चोदो! फाड़ दो इस चूत को! मैं भी! बिल्कुल रंडी की तरह, उसे चोद रहा था!

करीब 35 मिनट! अलग-अलग तरीके में चोदने के बाद! मैं झड़ने वाला था! मैंने उससे पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ! कहाँ झाड़ू?

उसने कहा- अन्दर ही झाड़ दो! क्योंकि! उसे मुझसे संतान सुख भी चाहिए था! मैं अपना गर्म माल उसकी चूत के अन्दर ही झाड़ दिया! और झाड़ कर उसके ऊपर ही लेट गया।

उस दिन! मैंने उसकी तीन बार चुदाई करी! उसे एक लड़का भी हुआ! मुझसे आज भी जब भी शबनम को मौका मिलता है! वो मुझसे चुदवाने के लिए आ जाती है!

2 Comments
  1. June 21, 2017 | Reply
  2. Rk kaushik
    June 22, 2017 | Reply

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