बस एक चुत दिला दो कोई

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माथुर साहब की बीवी की मटकती गांड हो या खोशला साहब की बीवी के लटकते चुंचे. साला वोचमेन का काम करते करते अब हम देखने वाले ही बन गए हैं. लेकिन लंड तो हमारा भी खड़ा होता हैं, चुत तो उसको भी चाहियें. लेकिन साला अपनी काली चमड़ी की वजह से कोई अपनी चुत हमें भी देंगा भी कैसे. पिछले महीने भोपाल गया था तब आखिरी बार चुत देखी थी. अरे नहीं आप समझ रहे हैं बिलुकल भी वैसा नहीं हैं. हम वहाँ रंडी चोद के नहीं आये. वो तो हमारे दोस्त कुंदन और विनीत के साथ हमने ब्ल्यू फ्लिम देख के आये थे. क्या फिल्म बनाते हैं यह गोरे लोग भी.

चुत और गांड की शामत ही आ जाती हैं इन फिल्मो में तो. कुंदन और विनीत मुझे शाम की गाडी में छोड़ के गए. गाडी ने अभी तो स्टेशन भी नहीं छोड़ा था की मैं टॉयलेट में जा घुसा. वही पे एक खाली पानी की बोतल में मैंने आधा पानी भर लिया. फिर अपने लंड को बहार निकाल लिया. अब जैसे ही मैंने अपने लौड़े को पकड़ के आँखे बंध की मेरी नजर के सामने वही ब्ल्यू फिल्म की चुत और गांडे मंडराने लगी. मैंने अपने लंड को हौले हौले मसलना चालू कर दिया. अरे बाप रे क्या मजा था ऐसे मुठ मारने में. यह पहला अवसर था जब मैंने ब्ल्यू फिल्म देख के मुठ मारी थी. 3-4 मिनिट की औसत थी मेरी मुठ मारने की. लेकिन उस दिन तो मैं 1 मिनिट भी नहीं संभाल पाया अपनी भावनाओं को. 50 सेकंड्स के अंदर ही सारी मलाई छुट गई मेरी. मैंने बोतल के पानी से अपना लंड धोया और उसे वापस अपनी पतलून के अंदर डाल दिया.

शर्मा साब की बीवी की मटकती गांड देखी

फिर मैं वापस यहाँ आ गया अपने वोचमेन के काम के लिए. अब वही आती जाती आंटी और भाभियों की गांड और चुंचे निहारो और उनकी चुत के कल्पनाचित्र बनाओ. शर्मा सब तीसरी मंजिल पे रहते हैं. वप बेंक में कशियर का काम करते हैं. उनकी बीवी गौरी भाभी एक टीचर हैं और बड़ी सेक्सी औरत हैं. दिवाली के बोनस के वक्त जब हम उनके घर जाते हैं तो भाभी जी हमें बड़े प्यार से अंदर बुला के मिठाई देती हैं. मन तो हमारा तभी करता हैं की उन्हें पीछे से पकड़ के उनकी चुत चोद दे लेकिन क्या करे भाई ओन ड्यूटी तो हम मजबूर हैं हैं. सुना हैं ना वो डायलोग, बोडिगार्ड लवली सिंह रिपोर्टिंग मेडम. अपना भी कुछ वैसा ही हिसाब बना हुआ हैं. जज्बातों को जॉब पे बहाना ठीक नहीं हैं ना, हाँ कभी कबार मटकती गांड और उछलते चुंचे देखना बुरी बात नहीं हैं.

गौरी भाभी आज निचे कोमन प्लाट में ही थी. पापड़ बनवा रही थी वो मुकेश साब की बीवी शिला जी को. बड़े मजे थे भाई यह भाभियों को देखने में. कभी शिला भाभी निचे झुकती तो कभी गौरी भाभी. कभी मैं शिला भाभी की गांड देख लेता तो कभी गौरी भाभी अपने चुंचो को झांकी करा देती थी. मेरा लंड टाईट होने लगा था. और वैसे भी मैंने थोड़े दिन पहले ही ब्ल्यू फिल्म देखी थी तो मुझे उसके सिन भी याद आ रहे थे. तभी मेरे दिमाग में एक शैतानी ख़याल आया की यदि यह भाभियाँ इंग्लिश फिल्मों में चुदवाने का काम करेंगी तो कैसे लगेंगी. यकीन मानियें इतना सोचते ही मेरी आँखों के सामने के नंगे द्रश्य लाईव होने लगे जैसे की. गौरी भाभी को एक काला हब्सी उल्टा लिटा के चोद रहा हो जैसे और शिला भाभी को भी दो बड़े लंड से एक साथ चोदा जा रहा था. उनकी चुत में एक लंड पड़ा था और गांड के अंदर भी लौड़ा दिया गया था. मेरे तोते उड़ गए. मैंने अपने आप को एक थप्पड़ मारा ताकि मैं सपनों की दुनिया से हकीकत की दुनिया में वापस आ जाऊं.

चुत मिलती नहीं लेनी पड़ती हैं

थप्पड़ की वजह से मैं तो असली दुनिया में वापस आ गया लेकीन खड़े लंड का क्या करता मैं. मैंने सोचा की चलो भाई जो करते आये हैं पिछले कई सालो से वो ही आज भी करेंगे अपने लंड के साथ. मैं अब बेसब्री से अपने लंच टाइम का इन्तजार कर रहा था. मैंने मन में मुठ मारने का इरादा बना लिया था. गौरी भाभी और शीला भाभी के चुतड और मटकती गांड को मैंने दोपहर के 2 बजे तक खूब निहारा और फिर मैंने अपने लंच ब्रेक के लिए पीछे क्वार्टर में चला गया. अंदर टिफिन पडा हुआ था लेकिन मुझे कुछ और ही भूख लगी हुई  थी. पर अब मैं यह उलझन में था की आँख बंध कर के चोदुं किसे. शिला भाभी की गांड अच्छी थी तो गौरी भाभी की चुंची क्या कम सेक्सी थी…!

मैंने बाथरूम की तरफ रास्ता नापा और अंदर जा के कड़ी की जगह बाँधी हुई डोरी को सक्कल में फंसाया. फिर निकाला अपना गिरगिट जैसे लौड़े को मैंने बहार. आँखे बंध की; उलझन अभी तक वही थी. लेकिन मैंने बिच का रास्ता सोच लिया था. गौरी भाभी के चुंचे अच्छे थे इसलिए उनकी चुत मैं मुठ में चोदुंगा और शिला की जवानी की आग उसकी गांड से निकालूँगा. आँखे बंध की और लगा मैं लटकते हुए खंजर की मालिश करने में. आह आह करती हुई शिला भाभी अपनी गांड मरवा रही थी और गौरी भाभी की चुत मेरे लंड से चुद रही थी. मेरे हाथों के झटके यकायक बढ़ने लगे और मैंने अपने लंड से पिचकारी निकाल के बाथरूम की मोरी में मार दी.

बड़ा मजा आ गया; कलेजे में चंदन की ठंडक पड़ गई. लेकिन फिर मैंने सोचा की क्या लंड ऐसे ही सपनो में चुत से मजे लेंगा क्या इस लौड़े को उस गरम गरम भोसड़ी का असली स्वाद मिलेंगा या नहीं. देखता हूँ कुछ दिन और शादी के लिए कोई मिला तो ठीक हैं नहीं तो रंडियों की कहाँ कमी हैं. वैसे मेरे एक दोस्त ने एक फोन सेक्स की साईट भी बताई हैं. सोच रहा हैं इस फोन सेक्स साईट को ही ट्राय कर लूँ. दोस्त तो कहता हैं की बढ़िया साईट हैं; लडकियां बड़े मजे देती हैं…! आप के पास मेरी मदद के लिए कोई तरकीब हो तो जरुर कमेन्ट में भेजना प्लीज़…!

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