पड़ोसन आंटी की रस भरी गरम चूत को चोदा जी भरके

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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और उदयपुर से हूँ। मेरी उम्र 22 साल की है और  इसी के साथ मैं एक अच्छे खासे जिस्म का मालिक भी हूँ। मैं आज आप सभी कामलीला डॉट कॉम के चाहने वालों के लिए अपनी एक नई मस्त सच्ची कहानी लिख रहा हूँ और यह कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाली एक आंटी की है और इस कहानी में मैंने अपनी उस हॉट सेक्सी आंटी को बहुत अच्छी तरह प्यार किया है और उनकी चुदाई के मज़े भी खूब लिए। मैं उनकी चुदाई के पिछले कुछ दीनों से सपने देख रहा था और वो सब मैंने पूरा किया दोस्तों मेरे लंड का साइज़ भी इतना लम्बा है कि किसी भी चूत को संतुष्ट करने के लिए काफ़ी है। आज मैं आप लोगों से अपनी ज़िन्दगी का वो पल शेयर करने जा रहा हूँ जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था की कभी मेरे साथ ऐसा होगा। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आपको पसन्द आएगी।

दोस्तों बात आज से 6 महीने पुरानी है। हमारे पड़ोस में एक आंटी रहती है। जिनका नाम राज कँवर था जिनकी उम्र 32 साल की थी। उनका फिगर क्या बताऊ दोस्तों. कमाल की फिगर थी। और उनकी गांड थोड़ी सी मोटी और बब्स बहुत मस्त गोरे बाहर की तरफ निकले हुए है। उन्होंने अपने पूरे बदन को बहुत अच्छी तरह से सम्भालकर रखा है इसलिए उनका हर एक अंग बहुत आकर्षक है उन्हें देखक़र तो अच्छे-अच्छे मर्दों का लंड खड़ा हो जाए। उनके शरीर का कटाव 34-32-36 का था। मेरा उनके घर पर आना-जाना था। एक दिन मैं दोपहर को उनके घर पर गया तो मेन गेट खुला हुआ था, मैं अन्दर आ गया और आवाज दी आंटी जी कहाँ हो? उनकी आवाज आई मैं नहा रही हूँ. तुम बैठ जाओ। मैं सोफे पर बैठ गया। थोड़ी देर में आंटी बाहर आई. दोस्तों क्या बताऊँ एक उस्न की परी लग रही थी उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। उनके गीले-गीले बाल. उन्होंने पूरे जिस्म को तौलिये से लपेट रखा था। मैं आंटी को देखे जा रहा था। उनके बब्स  आह्ह.. क्या बताऊँ इतने बड़े थे कि मन कर रहा था अभी पकड़कर इनका रसपान कर लूँ। उधर आंटी भी मेरे पेंट के फूलते हुए उभार को देख रही थी. मानो मेरा लंड पेंट फाड़कर बाहर निकल आएगा। आंटी मुस्कुरा के बोली तुम 5 मिनट बैठो. मैं कपड़े पहनक़र अभी आती हूँ। फिर वो कमरे में चली गई और उन्होंने अपने कमरे का गेट थोड़ा खुला छोड़ दिया था, उस खुले दरवाजे से मुझे अन्दर तक का  सारा नजारा दिख रहा था। आंटी ने अन्दर जाकर अपने जिस्म को तौलिये से मुक्त कर दिया और उसी तौलिये से अपने शरीर को पोंछने लगी। मेरे मन में आंटी को नंगी देखने की लालसा जाग उठी थी। मुझे डर भी लग रहा था. लेकिन हिम्मत करके मैं कमरे के नजदीक चला गया। अब मैं आंटी को छुपकर देखने लगा, आंटी अपनी चूत को साफ़ कर रही थी। दरवाजे की झिरी से मैं सही से देख पा रहा था. क्योंकि उनका मुँह अन्दर की तरफ था। अब आंटी अपनी लाल रंग की पेंटी पहन रही थी फिर ब्रा पहनी और उनके ऊपर मैक्सी पहन ली। मैं उनको देखकर भूल गया था कि मैं कहाँ खड़ा हूँ और अपने लंड को पेंट में ही दबाने लगा। तभी एकदम से आंटी घूम गई, वो मेरी तरफ देखकर बोली।

आंटी :- राहुल ये क्या कर रहा है?

मैं एकदम से चौंक गया।

मैं :- कुछ नहीं आंटी.

आंटी :- क्या कुछ नहीं. तू यहाँ क्या कर रहा है. मैंने तो तुझे सोफे पर बैठने को कहा था ना?

मैं :- मैंने कहा सॉरी आंटी मुझे माफ़ कर दो।

आंटी :- मैं कपड़े पहन रही हूँ और तू मुझे देख रहा था।

मैं एकदम चुप खड़ा था। आंटी एकदम से आवाज में मधुरता लाकर बोली चल अब यहाँ पर बैठ जा. अब आंटी मुझे बड़ी मदहोशी भरी निगाहों से देख रही थी, मैं गुमसुम खड़ा था।

आंटी :- मुझे पता है. तू क्या देख रहा था।

मैं :- मैंने फिर कहा सॉरी आंटी.

आंटी :- मैं तुझे बहुत दिनों से देख रही हूँ. तू मुझे देखता रहता है. बात क्या है?

मैंने सोचा यही अच्छा मौका है, मैंने आंटी का हाथ पकड़कर बोल दिया आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। फिर आंटी ने मुझे भी अपनी आँखों में भरकर देखा और बोला तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो। बस फिर क्या था दोस्तों. मैंने अपने होंठ आंटी के होंठों पर रख दिए और चूसने लगा। आंटी भी मेरा पूरा साथ देने लगी, मैं एक हाथ से उनके बब्स को दबा रहा था. वो और कामुक होती जा रही थी। कुछ ही पलों में मैंने आंटी की मैक्सी उतार दी. अब वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में थी। हाय दोस्तों क्या कयामत लग रही थी। वो बोली चलो उधर बेड पर चलते है। मैं उनको चूमता हुआ ‘हाँ’ बोला। वो बोली पहले तुम बाहर के गेट पर कुण्डी लगाकर आ जाओ। मैं कुण्डी लगाने चला गया और जैसे ही लौटकर कमरे में अन्दर गया तो देखा आंटी बिस्तर पर लेटी हुई थी। मैंने आंटी के पैरों को चूमा और फिर उनकी जाँघों को चूमता हुआ ऊपर बढ़ने लगा। मैं आंटी की पैन्टी को ऊपर से ही चाटने लगा। आंटी ने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरे सर को अपनी चूत में घुसाने लगी। फिर आंटी थोड़ा सा ऊपर होकर मुझे पैन्टी निकालने का इशारा करने लगी। मैंने फटाफट उनकी पैन्टी को निकालकर फैंक दिया और उनकी एकदम मस्त रसीली चूत को चाटने लगा। क्या मस्त गुलाबी चूत थी दोस्तो. आंटी के मुँह से सिसकियां निकलने लगी आअह…. उम्म्ह… मैं और तेजी से आंटी की चूत को चाटने लगा, आंटी मेरा पूरा सर अपनी चूत में दबाती जा रही थी और जोर-जोर से आआहह.. ओह.. करती जा रही थी। मैं पूरे जोश से आंटी की चूत को चाटता जा रहा था, तभी आंटी का जिस्म अकड़ने लगा और उन्होंने एकदम से सारा माल मेरे मुँह में ही छोड़ दिया। मैंने आंटी की चूत का सारा रस चाट-चाटकर साफ़ कर दिया। अब मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और आंटी के साथ लेट गया। कुछ देर एक-दूसरे को चूमने के बाद वो बिस्तर के नीचे उतर आई और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। कसम से ऐसा लग रहा था की मैं जैसे जन्नत में आ गया हूँ। आंटी जोर-जोर से मेरा लंड को चूस रही थी। मेरे मुँह से उफ़.. आह्ह.. और तेज और तेज निकल रहा था। अब मैं झड़ने वाला था और एकदम से आंटी के मुँह में झड़ भी गया। अब हम दोनों लेट गए और आंटी मेरे होंठों को चूसने लगी और लंड को हिलाने लगी। दोस्तों ये कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

थोड़े देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैं आंटी के ऊपर चढ़ गया। और फिर मैंने आंटी के दोनों पैरो को फैलाया और उनकी जाँघों को सहलाते हुए मैंने जैसे ही लंड को आंटी की चूत में लगाकर पेला तो आंटी चिल्ला उठीं उईई माँ मर गई आंटी बोली की प्लीज थोड़ा सा धीरे-धीरे से डालो ना फिर मैं आराम-आराम से लंड घुसाने लगा। जब मेरा लंड उनकी चूत में पूरा घुस गया तो मैं आंटी के दोनों होठों को चूसने लगा फिर मैंने आंटी की एक टाँग को अपने कंधे पर रखा और उनकी चूत में तेज-तेज धक्के मारने लगा। आंटी के मुँह से मस्त आवाजें निकल रही थी ओहह.. ओह… आआअ.. ओर जोर से चोदो आहह… राहुल बहुत मज़ा आ रहा है थोड़ा अन्दर तक और घुसावो ना लंड को उनके कहते ही मैं और जोश में आ गया अब मैंने अपनी चुदाई की स्पीड और तेज कर दी, आंटी पूरी मस्ती में लम्बी-लम्बी सिसकियाँ ले रही थी। फिर करीब 20 मिनट तक आंटी की चूत में अपने लंड से मैं लगातार धक्के देता रहा और जब मेरा काम पूरा होने लगा की मैं अब झड़ने वाला हूँ। तो फिर धीरे-धीरे आंटी की चुदाई करते-करते थोड़ी देर में आंटी की चूत में ही अपना वीर्य डाल दिया और उसके बाद भी मैं करीब 15 मिनट आंटी के ऊपर ही लेटा रहा और मैं उनके होठों को चूसता रहा, तब उन्होंने मुझसे कहा की आज तो तुमने मुझे चोदकर मेरी बहुत पुरानी भूख़ को शांत कर दिया है और मैं बहुत समय से इस मस्त चुदाई के मज़े लेने को तरस रही थी, तुमने आज मेरी चूत की आग को बहुत अच्छी तरीके से शांत कर दिया है तुम बहुत अच्छे हो और बहुत अच्छी मस्त दमदार चुदाई भी तुम करते हो, मुझे तुम्हारे साथ यह सब करके बहुत मज़ा आ गया और फिर उसके बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता तो हम जमकर चुदाई का आनन्द लेते और वो मुझसे अपनी चूत की चुदाई करवाकर मेरे साथ मजे करती है।

दोस्तों अब मुझे कभी भी आंटी को चोदने का मन करता है तो मैं उनके घर पर जाकर उनको जमकर चोद लेता हूँ। उस चुदाई में हमेशा वो मेरा पूरा-पूरा साथ देकर मेरे साथ खूब मज़े लेती है।

 

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