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नौकरानी के साथ थोड़े मजे

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ये अक्सर हमसब लोग भूल जाते है कि घर में जब हम अपनी खूबसूरत बीवियों के साथ सम्बन्ध बनाते है तो हमें बस उनसे मजे लेने की जल्दी पड़ी रहती है। ऐसे ही कई बार कुछ ऐसा होता है जिससे हम भूल जाते है की हमें शायद कही कोई देख रहा होगा। मेरा एक बेटा है जिसकी उम्र कुछ 7 साल की थी तब की ये कहानी है। पर डर हमें बेटा का नहीं किसी और का था और वो थी हमारे घर की नौकरानी सविता। सविता यू तो देखने में सामान्य दर्जे की औरत लगती थी पर मेरी बीवी हमेशा मुझे लुभाभती थी की मैं अपनी बीवी के अलावा किसी और को न देखू। ये शायद बेहद अच्छी बात भी थी क्यूंकि मुझे मेरी बीवी सबसे ज्यादा खूबसूरत औरत लगती थी। आखिर हमारा विवाह जो था।

मेरी खूबसूरत बीवी
मुझे मेरी भी से ज्यादा कोई और दूसरी पंसंद नहीं आती थी। ये उन दिनों की भी बात है जब मेरी बीवी ने मुझे घास डालना बंद ही कर दिया था और तब मुझे अपने शारीरिक जरुरतो के लिए कुछ और साधन ढूंढने पड़ते थे पर मैं अपनी बीवी को कभी भी धोखा देने की बात नहीं सोंची। मैं आज भी अपनी बीवी से बहुत प्यार करता हू पर हू तो मर्द ही , जहा कही भी मुझे किसी लड़की के खूबसूरत अंग दिखते थे वह बस मैं अपनी नजर गड़ा लेता था। ये बात मेरी खूबसूरत बीवी भली भन्ति तरीके से जानती थी। कई बार ऐसा भी हुआ की मैं अपना मन रात को बिस्तर पर काम के बहाने लैपटॉप पर पोर्न वीडियोस देखता था और मेरी खूबसूरत बीवी मुझे पकड़ लेती थी। बीवी का मूड तब तो ऐसा लगता था की बस इसका भी मूड कुछ पोर्न की लड़कियों जैसा हो जाये तो बस क्या कहने। पर ऐसा न होकर मैं उसकी नजर में गिर जाता था।

मेरी खुबसूरत नौकरानी
इस पर मुझे भी बड़ी निराशा होती थी ,मैं जब भी उससे हमारे घटते शारीरिक सम्बन्ध के बारे में पुछता था तब भी वो मुझे गन्दा ही समझती थी सो मैं अब पूछना ही बंद कर दिया। पर चुप हो जाना कोई जवाब नहीं था। मन बहुत विचलित होने लगता है अगर उसे इतनी खूबसूरत बीवी सिर्फ अंग दिखाए और खाने को घास भी न दे। आखिर ऐसी तड़प के दिनों में मुझे एक बार मेरी खूबसूरत बीवी ने मौका दे ही दिया आखिर उसके घर वालो का एक बड़ा अटका हुआ काम जो पूरा किया था मैंने। उस दिन वो ख़ुशी से मुझे घर में आने दी और मुझे बहो में लेते हुवे बोली “जो तुम मुझसे बहुत दिनों से करना चाहते थे आज वो सब और उससे ज्यादा करने के लिए मैं तुम्हे खुला मौका देती हु।” फिर क्या था मैंने सीधा उसे कमरे में घुसा लिया क्यूंकि हमारी नौकरानी सविता वह पर हमारी बातो को सुन ही ली थी।

पर मैं इस मौके का फायदा उठाना चाहता था सो मैंने अपनी बीवी को कमरे में लेजाकर उससे जवानी का खेल खेलने लगा। बड़ा मजा आया उस वक़्त भले ही वो दोपहर का समय था। हम मियां बीवी लगभग एक घंटे तक कमरे में जवानी के रास पिटे रहे और जब मैं कमरे से बाहर आया तो मैंने देखा की सविता अपनी चूत को रगड़ रही थी और मेरी बेटी सो चुकी थी। सविता को कुछ पता नहीं चला की मैं उसके पीछे हू पर यह अनोखा दृश्य देखने का मेरा मन दौड़ने लगा। दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l उसके स्तन मैं आगे बढ़ा और मैंने उसके स्तन को उसके कपड़ो से बहार पाया। मैं फिर पीछे हटा और अपने गले से खास कर मैने आपने वहा पर मौजूद होने का सबूत दिया। सविता जल्दी बाजी में अपने कपड़ो को ठीक करने लगी और फिर वो पलटी।

उसने काफी कुछ ठीक कर लिया था पर वो ब्लाउज तो ठीक ढंग से सही नहीं कर पाई थी जिससे मुझे उसके स्तन के बड़े होने का संकेत साफ़-साफ़ मिल रहा था। पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगा की उसके स्तन को देखना चाहिए। वो मुझे देख कर हसने लगी और मैंने भी कुछ वैसा ही जवाब दिया। मेरी खूबसूरत बीवी मुझसे सम्बन्ध बनाने के बाद थक कर गहरी नींद में सो गई थी और तभी मेरा मन मचल की मैं अपनी नौकरानी सविता से कहु की वो मुझे अपने स्तन दिखा दे।

अपनी बीवी को बहो में
मैंने उसी कामिनी मुश्कान से सविता के पास जाकर बोला की मैंने उसे साफ़-साफ़ पकड़ लिया है। वो शर्मा और घबराई हुई सी दिखी। मैंने फिर सोचा कि मौका अच्छा है उससे बोलकर उसके स्तन देख लेता हु। मैंने फिर उससे बोला की अगर वो चाहती है की मैं उसे न निकलू तो उसे मेरा एक काम करना होगा। निकलता तो मैं उसे किसी भी तरह से नहीं क्यूंकि आज तक उसने कोई शिकायत का मौका नहीं दिया था और रही मौजूदा हरकत की बात तो वो तो किसी को भी हो सकता था आखिर उसके सामने ही मैं अपनी बीवी को बहो में भर कर कमरे में जो ले गया था। मैंने फिर अपने स्वर बदले और उससे कहा की मेरा यह सौभाग्य होगा अगर मैं उसका स्तन देख लू।

फिर उसके बाद जो हुआ उसका इल्म भी मुझे नहीं था। उसने न केवल स्तन दिखाए बल्कि मेरी बीवी के सोते उसने मुझे अपने शरीर से बड़ा ही रोचक अनुभव दिया। वो शादी-शुदा थी और उसका तजुर्बा मेरी बीवी से कही ज्यादा था।

वो भले ही दिखने में साधारण सी थी पर उसके अंग मेरी बीवी के अंगो के आकार में काफी मजेदार थे। मेरी बीवी जहा कमजोर हो जाती थी वही ये नौकरानी काफी मजे से मुझे मजे देती थी। मैंने फिर अपनी पत्नी का पीछा करना ही छोड़ दिया। इसका फायदा यह हुआ की मेरी इज़्ज़त बीवी की नजर में किसी महात्मा जैसी बन गई थी और मै सविता के साथ मजे लेकर मैं उसे थोड़े टिप्स के नाम पर पगार से ज्यादा पैसे देदेता था। हालाँकि वो मुझसे पैसे नहीं मांगती थी और न ही लेना चाहती थी पर शायद उसकी खूबसूरती का सही अहसास मुझे हुआ जिसकी वजह से वो बीते दस साल से पैसे किसी न किसी तरह ले लेति है।

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