दोस्त की बेहन के साथ सुहागरात

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हेलो मेरा नाम राज है. मेरी उमर 30 साल है. उसे समय मेरी उमर 20 साल होगी और दोस्त की बेहन जिसका नाम प्रीत था, उसकी उमर 19 साल थी. उसे समय मेरे मॅन मे उसके लिए कभी एसा ख्याल नही आया था. मैने उसे अपनी बेहन की तरह हे मानता था. हमारा घर अगाल-बगल मे होने की वजह से झट से सब सॉफ दिखता है. एक दिन मे झट पर किसी काम से हैरान रही गया.. वाहा प्रीत पूरी नंगी हो कर नहा रही थी. शायद उसके घर मे कोई नही था. मे काफ़ी देर तक, मे उसे नहाते हुए देखता रहा पर उसकी नज़र मेरे ऊपर पड़ गयी.

मे तो उसे समय ड्ऱ हे गया था की कही उसने घर पर किसी को बता दिया तो क्या होगा और जल्दी से मे झट से नीचे आ गया. मेरे दिमाग़ से वो पल जा हे नही रहा था की मैने उसे नंगी नहाते हुए देखा था. उसके छोटे-छोटे नींबू जैसे बूब्स और बिना बालो वाली चुत और उसका गोरा और चिकना मस्त बदन को याद कर के मेरा लंड खड़ा हो गया. फिर मे बाथरूम मे गया और बहुत देर तक मूठ मारी. बहुत बार मूठ मरने के बाद भी मे उसे पल को भूल नही पाया. एक दिन जब उसके घर पर कोई नही था. तब मे वाहा गया और इधर- उधर की बाते करने लगा. शायद वॉक आम उमर होने की वजह से वो बात भूल गयी थी. पर मुझ पर तो हवस का बहुत चढ़ा था. मैने बाते करते- करते अपना लंड बाहर निकल लिया और असाई हे बैठे हुए हुए बात करने लगा.वो थोड़ी घबरा गयी और दूसरे कमरे मे जाने लगी.

मैने उसका हाथ पकड़ा और बोला- प्रीत थोड़ी देर यही बैठे रहो. मे कुछ नही करूँगा. तुमको हाथ भी नही लगायूंगा. बस मेरे पास बैठ जाओ. वो घबराती हुई, मेरे पास बैठ गयी. उसे समय भी मेरा लंड बाहर हे था. और बाते करते-करते, मैने अपनी पेंट उतार दे. और उसके बगल मे बैठ कर मूठ मराता रहा. मुझे बहुत हे अच्छा लग रहा था. उसके लिए यह सब नया था पर शायद उसे भी अच्छा लग रहा था. बस थोड़ा घबरा रही थी. फिर मैने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया. उसने अपनी आँखे बंद कर ली और लंड को ज़ोर से पकड़ लिया. धीरे- धीरे वो उसको सहलाने लगी. क्या बतायु यारो… क्या मस्त एहसास थॉ ओ, जब वो अपने कोमल हाथो से मेरे लंड के साथ खेल रही थी. बहुत माज़ा आ रहा था. उसने मेरे लंड अपने दोनो हाथो से पकड़ा हुआ था और मेरे लंड को मसल रही थी.

हम दोनो एक दूसरे को किस करने लगे और किस करते हुए वो मेरा लंड सहला रही थी और मे उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाल कर उसके दूध दबा रहा था. हम दोनो बस शांत हो के एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे. फिर मैने उसकी फ्रॉक के अंदर हाथ डाला और उंगली उसकी चुत मे डाल कर सहलने काग़ा. धीरे से उसकी पेंटी नीचे की और बोला की मुझे तुम्हारी चुत चतनी है. वो शर्मा गयी. मैने उसकी टांगे फैलाई और चुत को चातने लगा वो तड़प रही थी. फिर हम अलग हुए और अपने कपड़े पहने और एक- दूसरे से चिपक के बैठ गये और वो रोने लगी. फिर मैने उसे शांत करवाया और भरोसे मे लिया की किसी को कुछ नही बठाना. उसके बाद मे घर चला गया. बड़ा अच्छा- अच्छा सा महसूस हो रहा था. उसको भी मेरा एहसास अच्छा लगा था.

फिर हमे जब भी मौका मिलता यह सब करते और एक दूसरे को खुश रखते . हमे तो बस मौका चाहिए था मुझे करने का. इसे दे काफ़ी टाइम निकल गया. हमे जितना मौका मिलता हम मुझे करते थे. लेकिन कभी पूरा कुछ करने का मौका नही मिल पाया. एक बार देल्ही मे उसे कोई एंट्रेन्स एग्ज़ॅम देने जाना था. उसकी मम्मी ने मुझे उसके साथ देल्ही जाने के लिए बोला क्यूंकी उसका भाई बाहर जॉब कराता था. मैने भी सोचा आख़िर चोदने का मौका मिल हे गया और मैने हां भी कर दी. हम दोनो ने रिज़र्वेशन करवा लिया. पर साथ मे उसके साथ के लड़किया भी अपने भाइयो के साथ उसी ट्रेन मे जा रही थी.

ट्रेन मे तो कुछ भी करना इम्पूसिब्ले था. मे और वो दोनो हे बहुत बेचैन थे और हूर मौके का ज़यादा से ज़यादा फ़ायदा उतने के मूड मे थे. फिर रात होने पर जब सब सो गये. मैने उसको कहा- टाय्लेट मे जाना चुपके से. मौका देख कर उसके टाय्लेट मे जाने के बाद मे भी चला गया. दरवाजा बंद था टाय्लेट का अंदर से. मैने पूछा कौन है? उसने कहा- मे हू प्रीत. उसने दरवाजा खोला और मे अंदर घुस गया. हम एक दूसरे पर टूट पड़ा. वो कहने लगी इतने सालो का इंतेज़ार कल पूरा हो जाएगा. कल मेरी सुहाग्रात है ना. मैने कहा- हां, कल तुम्हारी सुहाग रात है.

और तेरी चुदाई तेरा यह भैया करेगा. वो तो हॉर्नी हो चुकी थी. उसने जल्दी से मेरी पेंट उतरी और लंड तुरंत मूह मे ले लिया. पूरा का पूरा लंड गले तक पहुच चुका था. 10 मिनिट बाआड़, लंड मे मलाई निकली और सारा माल उसके मूह के अंदर हे निकल गया. उसके होंठों से मेरा जूस निकल रहा था. इस हालत मे वो ब्लू फिल्म की हेरोयिन लग रही थी. फिर उसने अपना मूह सॉफ किया , हमने कपड़े ठीक किए और फिर हम बर्थ पर आकर सो गये.

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