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जीजा के लॅंड मे दम नही ओर मेरी बेहेन चुद्वाने मे किसी से कम नही

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दोस्तों ये कहानी आप अन्तर्वासना पर पड़ रहे है।

दोस्तों मेरा नाम दीनू है, मैं उत्तर प्रदेश से हु, आज मैं आपको अपनी बहन की एक सच्ची कहानी सूना रहा हु, दोस्तों पहले तो मुझे अपनी कहानी लिखने में थोड़ी हिचकिचाहट हो रही थी, क्यों की मुझे लग रहा था की क्या मैं अपनी बहन

की कहानी जो की एकदम सच्ची है मैं बताऊँ की नहीं, कई बार लग रहा था की लोग क्या सोचेंगे की क्या बहन के साथ भी सेक्स किया जा सकता है, क्या कोई भाई अपने बहन के साथ जिस्मानी रिश्ता कायम कर सकता है. पर दोस्तों जब मैं

अन्तर्वासना पे और भी कहानियां पढ़ी तब मुझे लगा, की पता नहीं कब कैसा माहौल बन जाये और अपने ही परिवार के लोगो के साथ सेक्स सम्बन्ध बन जाये कुछ भी नहीं पता, सच तो ये है की सेक्स ही ऐसी चीज है, जब दो जिस्म में आग

लगती है. तब कुछ भी नहीं दिखाई देता है, की क्या सही है और क्या गलत. दोस्तों मैं अब आपको अपनी कहानी पर आता हु, की क्या बात हुई और क्या हालात हुई की मुझे अपनी ही बहन की चुदाई करनी पड़ी. मेरी बहन किरण की शादी १४ महीने पहले

हुई है. किरण देखने में श्यामली है, पर हैं नक्स काफी अच्छी है. बदन भरा पूरा है, ज्यादा लंबी नहीं है. अगर आप सच पूछिये तो मुझे ऐसी ही लड़की पसंद है. मैं किरण को अपनी वासना भरी निगाहों से पहले भी देखा करता था. जब वो नहाती थी

और घर में कोई नहीं होता था तो मैं दरवाजे में जो छेद से उससे किरण को निहारा करता था. मुझे बहूत ही अच्छी लगती थी. पर कुछ कर नहीं सकता था सिर्फ मूठ मार कर काम चला लेता था. हां एक बाद और है की मैं अपने बहन की चार चार पेंटी

और ब्रा चुरा ली थी और अभी रोज रात को लंड से सटा कर मूठ मारा करता था और सूंघता था. जब बहन की शादी हुई, वो दिल्ली चली गई क्यों की उसके पति वही पर रहते थे. अच्छा खासा काम था, तीन चार महीने तक तो रिश्ते सामान्य रहे उसके बाद

सब कुछ ठीक नहीं रहा, इसका रीज़न था, जीजा के भाबी के साथ नाजायज सम्बन्ध, जीजा की जो भाभी थी बहूत ही ज्याद हॉट और सेक्सी औरत है. जीजा जी के भाई का देहांत एक दुर्घटना में हो गया, असल में उन्हीं का बिज़नस था जो आज कल जीजा जी

कर रहे है. तो लाजमी है उनके परिवार का भरण पोषण वही करेंगे. पर वो सब कुछ करने लगे. मैं भी देखा है. उनकी भाभी बहूत ही हॉट है. मैं जब पहली बार उनको देखा था मैं खुद भी फिदा हो गया था. पर धीरे धीरे नफरत होने लगी क्यों की वो

मेरी बहन के ज़िन्दगी में आ गई थी. और खुद ही चुदवा रही थी. जिनसे मेरी बहन चुदवाती वो किसी और को चोद रहा है. दोस्तों मेन बात यही थी. मेरी बहन हमेशा फ़ोन करके घर बात करती और रो रो कर अपना दुखड़ा सुनाती, मेरा माँ पापा को रहा

नहीं गया और उन्होंने मुझे भेज को जाओ तुम किरण को देख आओ और सब कुछ बताना की वो किस हाल में है. मैं दिल्ली पहुच गया, किरण को मैंने देखा बहूत ही उदास रहती थी, मैंने पूछा की माँ पापा बोले की किरण से पूछ कर आओ, तुम कैसी हो

किरण, वो बोली भैया दो दिन रहो सब कुछ पता चल जायेगा. मैं चुप हो गया, इसके आगे क्या कहता, शाम को देखा की मेरी बहन सजी संवरी और मैंने देखा की जीजा के आगे पीछे कर रही थी. ताकि तो ठीक से बोल ले. थोड़ा प्यार कर ले. पुरे घर का

खाना बनाई, खिलाई, और मुस्कुरा मुस्कुरा के जीजा को देखती और रिझाने की कोशिश करती, पर वो घास नहीं डाल रहा था मादरचोद, मुझे काफी गुसा आ रहा था, पर मैं पति पत्नी के बिच में नहीं आ रहा था. मैंने देखा मेरी बहन के तरफ तो देख

नहीं रहा था पर साला वो अपनी भाभी को रंडी बना कर रख रखा था. वो उसकी अदाओ पर मर रहा था. मैं समझ गया की ये साला कुत्ता है और ये कुतिया बहन चोद आज मैं देखता हु, ये दोनों क्या करता है. रात हुई, मेरी बहन के कमरे में वो नहीं आया

और अपने भाभी के कमरे में चला गया और कुण्डी बंद कर ली. मैंने दूसरे कमरे में था मेरी बहन दूसरे कमरे में और वो दोनों दूसरे कमरे में. मैं सब कुछ देख रहा था. अचानक हलकी सी रौशनी बाली बल्ब जल गया, और फिर शांति छा गई. दोस्तों

करीब १० मिनट के बाद ही मैंने उसके कमरे से आह आह आह आह उफ़ उफ़ उफ़ उफ़ ओह्ह ओह्ह और पलंग की आवाज आने लगी. आवाज बहूत ही ज्यादा थी, मैं हैरान था. ऐसा तो पोर्न मूवी में भी नहीं मोन करते है जितना जीजा और उनकी भाभी कर रही थी. सच

पूछो तो मैंने ऐसी आवाज फिल्मो में ही सुनी थी, आज रियल लाइफ में पहली बार सुन रहा था, मेरा लंड खड़ा हो गया, मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए, और सिर्फ जांघिया में था, मैंने अपने लंड में थोड़ा सा थूक लगा कर, गीला कर लिया, और

धीरे धीरे मैथुन करने करने हाथ से. मुझे रहा नहीं गया, मैंने उनके दरवाजे के पास पहुच गया और वह झांक कर अंदर देखने लगा. पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. वही बगल में खिड़की थी मैंने झांक कर देखा, थोड़ी खिड़की खुली थी. ओह्ह्ह

माय गॉड. जीजा जी अपने भाभी को पेल रहे थे. वो दोनों नंगे थे, और एक दूसरे को खूब साथ दे रहे थे. मैं क्या बताऊँ दोस्तों, मैं काफी ज्यादा कामुक हो गया था. मुझे लग रहा था मैं अंदर जाकर चोद दू. मैं भी अपने लंड को जोर जोर से

हिलाने लगा और अंदर झाँकने लग्गा. तभी इमरे पीठ पर किसी का हाथ महसूस हुआ मैंने देखा किरण थी. दोस्तों मैं उस समय नंगा था. क्यों की मैंने अपनी जांघिया भी वही उतार कर कूलर पर रख दी थी. मैंने जैसे मुदा किरण मेरी आँखों में

आँखों डाल कर देख रही थी. मेरा लंड खड़ा और काफी तना हुआ था. तुरंत किरण मुझमे लिपट गई. मैंने उसको गोद में उठा लिया और उसके रूम में ले गया, पलंग पर लिटा दिया, उसकी चूचियां काफी तानी हुई थी. अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. किरण ने

कहा भैया आज जहा से तुम झांक रहे थे रोज रोज मैं वही से झांकती हु, मेरा मर्द किसी और औरत को चोद रहा होता है और मैं चुपचाप सब कुछ वही से देखते रहती हु, मैं कुछ भी नहीं कर सकती.दोस्तों ये कहानी आप अन्तर्वासना पर पड़

रहे है। मैंने कहा कोई बात नहीं बहन मैं हु, और मैंने अपने बहन को होठ को चूसना शुरू कर दिया, वो भी मुझे खूब सहयोग कर रही थी. मैंने उसके नाईटी को उतार दिया, वो अंदर से पूरी नंगी थी. मैंने तुरंत उसके चूच को मसलना और मुह से

पीना शुरू कर दिया. वो आह आह आह आह उफ़ करने लगी. मैंने उसके चूत पे हाथ रखा, उसकी चूत काफी गीली हो चुकी थी. उसकी आँखे लाल लाल हो गई थी. वो अंगड़ाई ले रही थी. मुझे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड उसके मुह में डाल दिया और मुह में

पेलने लगा. वो भी खूब मजे लेने लगी. मैंने भी पहले उसके मुह में ही लंड को डालने लगा. उसके बाद किरण बोली की भैया मुझे चोदो मेरी चूत की आग बुझा दो. मैं काफी प्यासी हु, मैं चुदाई के बिना नहीं रह सकती. मुझे चोदो मेरी जवानी को

भोगने बाला कोई नहीं है. मुझे भोगो, मुझे जो करना है जैसे करना है करो मैं नहीं रोकूंगी. मैंने निचे आके उसके दोनों पैरों को ऊपर किया और अपना लंड उसके चूत पर सेट किया और जोर से धक्का दिया पूरा नौ इंच का लंड उसके चूत में

चला गया. वो जोर से चिल्लाई, मैंने उसका मुह दबा दिया ताकि मेरा जीजा ना सुन ले, फिर मैंने चूचियां दबाते हुए उसके चूत में लंड को जोर जोर से अंदर बाहर करने लग्गा. वो खूब मजे लेने लगी. मैं भी कोई कसार नहीं छोड़ा, वो खूब

अच्छी तरह से मुझसे चुदी मैंने उसको पूरा आनंद दिया. करीब ३० मिनट बाद जब मेरा वीर्य उसके चूत में लबालब भर गया तो वो बोली आज मैं संतुष्ट हुई हु. मैंने कहा जब तक चाहो तुम मेरे से ये रिश्ता रख सकती हो. मैं कभी भी मना नहीं

करूँगा. उसके बाद मैं अपने कमरे में आके सो गया, सुबह मैंने जीजा से बात की की माँ पापा किरण को थोड़े दिन के लिए बुला रहे है. तो जीजा बोला थोड़े दिन के लिए क्यों जाओ जब तब मर्जी है तब तक रखो. फिर हम दोनों वापस कानपूर आ गए.

अभी वह से आये हुए करीब पंद्रह दिन हुए है. अभी हम दोनों साथ ही सोते है. और रोज रोज चुदाई करते है. पापा माँ निचे सोते है हम दोनों ऊपर के फ्लोर में सोते है मेन दरवाजा बंद करके, माँ पापा को लगता है हम दोनों अलग अलग कमरे में

सोते है पर सच तो ये है की हम बहन भाई पति पत्नी की तरह रह रहे है.

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