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चुलबुली चाची ने मुझसे अपनी चूत चुदवा कर मजा लिया

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Chulbuli Chachi Ne Mujhse Apni Choot Chudwakar Maza Liya :

हाय दोस्तों! मेरा नाम सौरभ है, मैं 21 वर्ष का हूँ। मैं नई दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में रहता हूँ। मेरी हाइट 6 फिट है और मेरा लिंग भी करीब 7 इंच का है। तो दोस्तों आज मैं आपको अपनी चाची की चूत चुदाई की अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
दोस्तों, हमारे घर में मैं अपने परिवार और चाचा व चाची के साथ संयुक्त से रहता हूँ। मैं अपने पिता जी का अकेला लड़का हूँ। मेरे चाचा की शादी 3 साल पहले हुई थी। चाची भी दिल्ली से ही हैं। सभी लोग आपस में मिलजुल कर रहते है और एक दूसरे की मदद करते रहते है। इस तरह मेरा और चाची में बोलचाल बहुत ही अच्छा था। चाचा के कोई भी बच्चा नहीं था।

इस कारण चाची मेरे साथ अच्छा व्यवहार करती थी। मैं भी काॅलेज से लौटने के बाद ज्यादातर समय चाची के साथ ही बिताता था। चाची स्वभाव से काफी हसमुख और चुलबुली थी, और उनकी उम्र करीब 28 साल थी। और हम अक्सर एक दूसरे से हँसी मजाक करते रहते थे। चाचा पिता जी के साथ फर्नीचर की शॉप पर बैठते थे। मेरी माँ सरकारी टीचर हैं और रोज पढ़ाने के लिए जाती थी। इस तरह मैं और चाची घर पर अकेले बचते थे। चाची गोरे रंग की और पतले दुबले शरीर की थी। उन्होंने अपनी बॉडी को अच्छा मेनटेन कर रखा था। इसलिए काफी आकर्षक लगती थी, और कभी कभी तो मेरी निगाहें भी उन पर टिक जाती थी और चुपके से उनको तड़ लिया करता था। चाची अपने चुलबुले स्वभाव के कारण मुझे तंग करती रहती, और मैं उनकी हरकतों को इग्नोर कर देता था,

पर जब कभी उनक शरीर मेरे तन से टकरा जाता तो मेरे शरीर में सनसनी सी मचा देता। एक बार मैं दोपहर में चाची से बातें करते करते उनके बेड पर ही सो गया और जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि मेरे बगल में चाची सो रही थी और उनके कूल्हें मेरे कूल्हों से सटे हुए थे। मैं तुरंत उठकर उनके कमरे से बाहर चला गया, पर मेरे विचारों में उथल पुथल होना शुरू हो गया। इसके बाद मैं धीरे धीरे चाची की शरारतों को समझने लगा। उनका मेरी ओर रूझान बढ़ रहा था और अब मैंने भी उनकी आँखों को पढ़ना शुरू कर दिया, जिनमें एक अधूरापन झलकता था। शायद चाची, चाचा से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं थी। अब मैं समझ चुका था कि चाची मुझसे कुछ उम्मीदें लगा रही है, और मेरी तरफ से भी पहल का इंतजार कर रही थीं।

अब मैंने भी चाची के साथ करीबी बनाना शुरू कर दिया। और मौका मिलते ही हम दोनों में नजदीकियाँ आने लगी। पर मेरा दिल अभी भी अन्दर से कमजोर पड़ रहा था, लेकिन चाची अपनी सेक्सी अदायें दिखाकर मेरे ठंडे पड़े अरमानों को जगा देती थी। इसी क्रम में एक दिन चाची ने अचानक पीछे से आकर मेरे गाल पर किस कर दिया और मेरे कुछ समझने से पहले ही तेजी से अपने कमरे की ओर भाग गयी। यह चाची की ओर से मुझे पहला किस था जिसका स्वाद मुझे बहुत ही मीठा अहसास दे गया। इसके बाद मैंने भी हिम्मत जुटाकर सबकी नजरें बचाते हुए चाची के आस पास रहकर शरारतें करना शुरू कर दिया। अब दोनों ही एक दूसरे के करीब आने का मौका खोजने लगे। इसी बीच एक दिन पिता जी, माँ और चाचा को जमीन के बटवारे के लिए गाँव जाने के लिए फोन आया। अब मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं था और मैं उनके गाँव जाने का इंतजार करने लगा। अगले दिन शाम को 5 बजे की ट्रेन से तीनों लोग गाँव के लिए रवाना हो गये। इस बीच मेरे और चाची दोनों के ही मन में लड्डू फूट रहे थे और रात होने का इंतजार करने लगे।

रात को करीब 8 बजे हम दोनों ने एक साथ खाना खाया। इसके बाद चाची अपने रूम में शावर लेने चली गयी। मैं भी अपने कमरे में आराम करने लगा, मैं हाफ पैंट और बनियान में था और चाची के ही बारे सोच रहा था। कुछ देर बाद मैं अपने को रोक न पाया और खुद ही चाची के रूम में चला गया। चाची बाथरूम में ही थी और मैं जाकर उनके बेड पर बैठ गया। इतने में चाची बाथरूम से बाहर निकली। उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि उन्होंने ऊपर ब्रा नहीं पहनी थी। मुझे देखकर वह मुस्कुराते हुए आईने के सामने खड़े होकर खुद को निहारने लगी। उन्हें इस तरह देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने भी तुरंत बेड से उतर कर चाची को पीछे से बाहों में भर लिया, और इसके बार उनकी गर्दन को अपनी जीभ से चाटने लगा। मैंने दोनों हाथों से उनके गुदगुदे, नरम नरम बूब्स को दबाने लगा और निप्पलों को जोर जोर से मसलने लगा। ऐसा करते ही चाची बेचैन होने लगी।

इसके बाद मैंने अपने एक हाथ से उनकी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया क्योंकि चाची ने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी। मैं उनके जोश को जगाने के लिये चूत में दो उंगलियाँ डालकर उसे तेजी से कुरेदने लगा। इसी बीच मेरा लंड उनकी गांड से रगड़ रहा था। फिर मैं चाची को अपनी ओर घुमाकर उनके होठों पर किस करने लगा। इस तरह मैं उनको चूमता हुआ कमर तक पहुँचा और फिर उनकी चूत पर आकर रूक गया। मैं चाची की रसभरी चूत को रगड़ रगड़ कर चाटने लगा और उनके चूत के पानी का मजा लेने लगा और इसी के साथ चाची की आह आई के आवाजें भी पूरे कमरे में गूँजने लगी। अब चाची से भी सब्र न हुआ और उन्होंने मेरी पैंट उतार कर मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ लिया और बोली कि तुम्हारा लंड तो चाचा से भी बड़ा है, इससे चुदने में मजा आ जायेगा, इतना कहते हुए उसको मुँह में डालकर चूसने लगी। मैं भी लंड चुसाई का मजा लेने लगा। थोड़ी देर बाद चाची ने मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाला और उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी और बोली कि आज मेरी ऐसी चुदाई करो कि मैं कभी न भूलूं।

इतना कहते ही उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत में थोड़ा सा अंदर कर लिया, फिर मैंने भी झटका मारकर पूरा लंड चाची की टाइट चूत में डाल दिया। और चाची जोर जोर से आवाजे भरने लगी। पहले कुछ देर मैंने चाची को हवा में उठाकर चोदा, फिर उनको अपनी जांघों पर रखकर चोदा और एक दूसरे को किस करते रहे और चाची ने अपने नाखून मेरी पीठ में घुसा दिये और मुझे कसकर अपनी छाती से लगाये रहीं। मैं करीब 20 मिनट तक बिना रूके चाची को चोदता रहा और दोनों ही पोजीशन में भरपूर चुदाई का मजा लिया। और फिर चाची की चूत में ही झड़ गया। इसके बाद मैंने पूरी रात कई पोजीशनों में जमकर चुदाई की। और अपनी चाची की चूत की आग ठंडी की।
हां तो दोस्तों, यह थी मेरी सच्ची सेक्स स्टोरी। इसे पढ़कर ज्यादा से ज्यादा लाइक करें और शेयर करें। धन्यवाद।

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