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चुदाई का पहला एक्सपीरियेन्स भाभी

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मेरा नाम समीर है और मैं 30 साल का हू. मुझे इंसेंट कहानिया अच्छी लगी जिसमे किसी के साथ सेक्स करने का सिचुयेशन अंजाने मे बन गया और सेक्स का मज़ा लिया. ऐसी कहानिया पढ़ते समय मुझे अपनी कहानी याद आ गयी.

वो घतना आज से 9 साल पहले की है जब मैं देल्ही मे कॉंपिटेटिव एग्ज़ॅम्स की तैयारी कर रहा था. मैं 1भक वाले किराए के मकान मे फर्स्ट फ्लोर पर रहता था. उसी फ्लोर पर एक 2भक भी था जिसमे एक फॅमिली किराए पर रहती थी. उसे परिवार मे सुरेंदर और उसकी वाइफ रजनी थी और 1 साल का एक लड़का था सोनू. सुरेंदर एक प्राइवेट कंपनी मे काम कराता था और रजनी एक हाउसवाइफ थी. शुरू मे कोचिंग क्लास जाते या आते समय उनलोगो से सामना होने पर बातचीत सिर्फ़ नमस्ते तक सीमित थी. धीरे धीरे सुरेंदर से मेरी बात होने लगी. उनका स्वाभाव बहुत ही अच्छा था. वो भी मुझे अपने छोटे भाई की तरह मानने लगे और मैं भी उनको भैया कहकर संबोधित करने लगा. सुरेंदर मुझे सनडे की शाम को चाय पर बुलाते और तब भाभी से भी कुछ बात हो जाती थी. कुछ ही दीनो मे हम लोग घुलमिल गये. कभी कभी तो मैं भाभी से हाँसी मज़ाक भी करने लगा था. भाभी भी नहले पर दहला माराती और हम हंस पड़ते.

एक दिन मैने देखा की सुरेंदर भैया और भाभी कही से आ रहे थे. भाभी की हालत ठीक नही लग रही थी. मैने भैया से पूछा तो उन्होने बताया की भाभी की तबीयत 4 दिन से खराब है. डॉक्टर ने कुछ टेस्ट करवाए थे और रिपोर्ट देखने के बाद बताया है की विराल फीवर है. मैने अफ़सोस जताते हुए कहा की मुझे क्यों नही बताया. बुरे समय मे ही तो पड़ोसी कम आते है और आप तो मुझे भाई की तरह मानते है. इस पर भैया ने कहा की आज मैं तुमसे बात करने ही वाला था क्यों की 4 दिन से मैं ड्यूटी नही जा पा रहा हूँ. तुम तो जानते हो प्राइवेट जॉब मे छुट्टी कितनी मुश्किल से मिलती है. अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो कल से दिन मे तुम भाभी और सोनू का देखभाल कर सको तो बड़ी मेहरबानी होगी. मैं कहा कैसी बाते कर रहे हो भैया, इसमे बुरा मानने या मेहरबानी वाली कौन सी बात है. आप निश्चिंत हो कर ड्यूटी जाइए. मैं सब संभाल लूँगा.

खैर मैने हर तरह से भाभी और सोनू का ध्यान रखने लगा. कोचिंग क्लास आते जाते उनसे हाल समाचार पूचेटा. कोई समान बाहर लाना हो तो लाड़ेता था. भाभी के कहने पर कभी कभी उनके घर मे चल जाता और सोनू के साथ खेलता. कभी सोनू को संभलता तो भाभी अपना घर का काम कर लेती थी. शाम को सुरेंदर भैया आए तब भी मैं वही था. भाभी ने उनसे कहा की समीर ने दिनभर बहुत मदद की है, इसकी आज पढ़ाई भी ठीक से नही हो पाई होगी. अगर ये नही होता तो मैं परेशन हो जाती. सुरेंदर भैया के चेहरे पर थॅंक्स के भाव थे. कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा जब तक भाभी की तबीयत ठीक नही हो गयी.

एक दिन सुरेंदर भैया ने मुझे कहा की उनको 10 दीनो के लिए अफीशियल तौर पर जाना है और मैं उनके पीछे उनके घर का ध्यान रखू. मैं उन्हे अस्वासन दिया और कहा आप निश्चिंत हो कर जाइए. वो अगले दिन चले गये. मैं कभी कभी उनके घर जाता और सोनू के साथ खेलता और भाभी से भी बातचीत और हँसी-मज़ाक कराता.

एक दिन मेरे कोचिंग क्लास की छुट्टी थी तो मैं दोपहर मे भाभी के घर चला गया और हमेशा की तरह सोनू के साथ खेलने लगा तभी भाभी बोली की तुम सोनू के साथ खेलो तब तक मैं नहा लेती हूँ और वो बाथरूम मे चली गयी. मेरा बहुत मॅन कर रहा था की मैं भाभी को नहाते हुए देखु, लेकिन मॅन मसोस कर रही गया. थोड़ी देर मे बाथरूम का दरवाजा खुला. मेरी नज़र उधर चली गयी और जो देखा वो देख कर मैं हैरान रही गया. भाभी एक टवल लपेटे हुए बाथरूम से निकली. टवल उनके पूरे बदन को ढकने का नाकाम कोशिश कर रहा था. उनके दोनो बूब्स आधे से ज़्यादा टवल के बाहर दिख रहे थे जिसे हाथ से छुपाने रही थी और नीचे उनकी गोरी गोरी चिकनी टाँगे जाँघो तक खुली थी. मैं देखते ही जैसे पागल सा हो गया. मैं बिना पालक झपकाए उन्हे देख रहा था. भाभी मेरे पास आई और मुस्कुराते हुए पूछा ऐसे क्या देख रहे हो. मैं झेपटे हुए कहा कुछ नही. वो मुस्कुराते हुए बेडरूम मे चली गयी.

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