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घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में घुसा दिया

दोस्तों ये बात एक साल पहले की है जब मै कानपूर में नौकरी करता था । मैं वहाँ अपनी मौसी के यहाँ रहता था। उनके पड़ोस में एक घर था जिसमें दो लड़कियाँ रहती थी, दोनों बहनें थी जिनमें छोटी बहन बहुत ही मस्त थी। उसका बदन होगा कोई ३२-२८-३४, एकदम गोरी और ५.४” लम्बी ! कोई भी उसे देख ले तो लंड खड़ा हो जाये। शाम को अक्सर मैं छत पर घूमा करता था, मैंने देखा कि वो लड़की मेरी तरफ देख कर मुस्कराती थी तो एक दिन मैंने भी हिम्मत करके उससे उसका नाम पूछ लिया। उसने अपना नाम सौम्या बताया। मैंने उसको अपना मोबाइल नंबर दे दिया। अगले दिन उसका फ़ोन आया तो मैंने उससे मिलने का प्रोग्राम बनाया और फिर दो दिन बाद हम लोग एक पार्क में मिले। वहाँ मैंने बातों बातों में ही उसे अपने मन की बात कह दी। तो उसने बोला- सोच कर बताऊँगी।

अगले दिन हम फिर मिले, मैंने उससे जवाब मांगा तो उसने हाँ में जवाब दिया। तभी मैं उसके होंटों को चूसने लग गया और वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मे पर रख दिया और दबाने लगा। क्या मम्मे थे, एकदम सख्त ! बहुत मजा आ रहा था, तभी उसने मेरे को धक्का दिया और कहने लगी- पहली बार में ही सब कुछ कर लोगे? तो मैंने कहा- क्या करूँ ! तुम इतनी मस्त जो हो !आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

वह कहने लगी- अभी नहीं, वक्त आने पर सब कुछ करेंगे ! अभी यहाँ पर नहीं ! मैंने कहा- ठीक है ! और हम लोग वापस घर आ गए। शाम को मैंने उसे फ़ोन किया और कहा- रात को मैं कमरे का दरवाजा खुला रखूँगा, तुम आ जाना ! पहले तो वो मना करने लगी, लेकिन बाद में मान गई। मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था। फिर मैंने खाना खाया और अपने कमरे में सोने आ गया पर मुझे कहा नींद आने वाली थी, बस लेटा हुआ उसके बारे में सोच रहा था और सोचते सोचते पता नहीं चला कि कब नींद आ गई।

अचानक मुझे अपने दरवाजे पर किसी कि आवाज लगी, मैंने देखा तो सौम्या मेरे सामने खड़ी हुई थी। मैं तो उसे देखता ही रह गया। इतने में वो बोली- अन्दर आने को नहीं कहोगे? “हाँ हाँ यार, आओ !” और मैंने तुरंत उसको बाहों में ले लिया, उसको चूमने लगा, उसके होंटों से अपने होंट लगा दिए और चूसने लगा। क्या मजा आ रहा था, बता नहीं सकता ! फिर मैंने एक हाथ उसकी नाइटी के अन्दर हाथ डाला और मम्मे दबाने लगा और वो सिसकारियाँ भरने लगी। फिर मैंने एक एक करके दोनों मम्मों को बहुत देर तक दबाया।

फिर मैंने उसकी नाइटी उतार दी।

अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा पेंटी में थी। क्या माल लग रही थी ! अब मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया, उसकी चूत गीली हो चुकी थी और धीरे धीरे उसकी चूत में उंगली घुसाने लगा। जैसे ही उंगली घुसी, उसकी धीमे से आह की आवाज निकल गई और मुझे पता चल गया कि उसे भी मजा आ रहा है। उसने भी अपना हाथ मेरी चड्डी के अन्दर डाल दिया। मेरे पहले से खड़े हुए लंड को चड्डी से बाहर कर दिया और आगे-पीछे करने लगी।

फिर मैंने उसको अपना लंड मुँह में लेने को कहा तो उसने मना कर दिया- नहीं, मुझे उलटी आ जाएगी ! और मुह में नहीं लिया। अब मैंने उसकी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी तो अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। मैंने भी अपनी चड्डी निकाल दी और उसको उठा कर बेड पर लिटा दिया। अब हम 69 की अवस्था में आ गए और मैंने उसकी चूत में मुँह लगा दिया और जीभ से चाटने और अन्दर बाहर करने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

इससे उसे भी बहुत मजा आ रहा था, वो सिसकारियाँ भरने लगी और चूतड़ों को हिलाने लगी।अब उसने भी मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। तभी मैंने देखा कि उसकी योनि से कुछ पानी सा निकल रहा है, वो झड़ चुकी थी, मैंने उसका सारा पानी चाट लिया…

 

… अभी तक मेरा पानी नहीं निकला था, मैं उसकी टांगों के बीच में था और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखकर लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा और एकदम से लंड उसकी चूत के छेद पर रखकर एक जोरदार धक्का लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में घुस गया और वो चिल्लाने लगी। तभी मैं उसके होंटों को चूसने लगा। उसके होंटों को अपने कब्जे में ले लिया ताकि वो चिल्ला न सके।

मेरा पूरा लंड चूत में घुस गया

एक धक्का और दिया और पूरा 5 इंच का लंड उसकी चूत में घुसा दिया, थोड़ी देर ऐसे ही रहा, जब वो शांत हो गई तब मैं धीरे धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा। अब उसे भी मजा आने लगा और वह चूतड़ हिला हिला कर साथ देने लगी।

मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज तेज धक्के लगाने लगा। अब मैंने अपना लंड बाहर निकाला, उसको घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में घुसा दिया। करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था तो उसकी चूत से लंड निकाल कर उसे सीधा करके सारा माल उसके पेट पर निकाल दिया और ऐसे ही उसके ऊपर लेट गया। हम बहुत देर तक लेटे रहे। इतनी देर हम दुबारा चुदाई के लिए तैयार थे और हमारा दूसरा दौर 30 मिनट तक चला।

उसके बाद उसने और मैंने कपड़े पहने और चुपके से उसे उसके घर भेज दिया। अब तो जब भी मौका मिलता था तभी मैं अपने घर पर उसकी चुदाई करता था और कई बार तो दोस्तों के घर पर लेजाकर चोदा। अब उससे मेरी कोई बात नहीं होती है क्यूंकि मेरी नौकरी जबलपुर में लग गई है।  आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

तो दोस्तों मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी मुझे मेल कर बता सकते है |

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